दिल्ली/रायपुर: महादेव ऐप सट्टा घोटाले में पुलिस तंत्र के इस्तेमाल को लेकर सीबीआई की जांच निर्णायक मोड़ पर है, ऐसे समय एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस सूत्रों की माने तो महादेव ऐप सट्टा घोटाले के असली खिलाड़ियों को बचाने के लिए उनके खिलाफ सट्टा जुआ एक्ट के बजाय आबकारी एक्ट के तहत कार्यवाही की गई थी। ताकि पुलिसिया सट्टा कारोबार की किसी को भनक ही ना लग सके। यही नहीं दुर्ग में पुलिस कर्मियों ने मुनादी कर उन सटोरियों को थाने बुलवाया था, और हाथों-हाथ थाने से ही जमानत दे दी, जिनका नाम महादेव ऐप कारोबार के कर्णधारों के रूप में लिया जाता था। ऐसे कई आरोपियों को सस्ते में छोड़ कर महादेव ऐप सट्टा घोटाले के राज दफ़न करने का मामला सामने आया है।

बताते है कि सटोरियों के खिलाफ कड़ी-वैधानिक जांच और कार्यवाही करने के मामलों से जिम्मेदार अधिकारियों ने अपना मुँह मोड़ लिया था। अलबत्ता वे महादेव ऐप के मुख्य कर्ताधर्ता बन गए थे। यह भी बताते है कि रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर रेंज में दागी आईपीएस अधिकारियों ने अपना कब्ज़ा जमा कर सुनियोजित कारोबार किया था। उनके ही निर्देश पर कई बेरोजगारों और पुलिस कर्मियों ने महादेव ऐप सट्टा पैनल संचालन की जिम्मेदारी संभाली थी।
बताते है कि सट्टे में फायदे का धंधा नजर आने पर आला पुलिस अधिकारियों ने कई सटोरियों के नाम से महादेव ऐप पैनल ख़रीदे थे। फिर इसमें स्वयं का निवेश कर मोटी कमाई में जुटे थे। सट्टा बाजार की माने तो पुलिस अफसरों ने सट्टा कारोबार में महारत हासिल कर ली थी। सूत्र तस्दीक करते है कि छत्तीसगढ़ के कई पुलिस कर्मियों के महादेव ऐप सट्टा पैनल देश के कई राज्यों में आज भी संचालित किये जा रहे है। हालांकि सीबीआई की छापेमारी के बाद चर्चित सटोरियों ने बाजार से दूरियां बना ली है। पंजाब में लुधियाना, चंडीगढ़, मोगा और अमृतसर में महादेव ऐप पैनल का संचालन छत्तीसगढ़ में पदस्थ पुलिस अधिकारियों का बताया जाता है।

यही हाल मुंबई, नागपुर, अमरावती, बुलढाणा का बताया जा रहा है, यहाँ भी भिलाई के कई युवक डेरा डाले हुए है, कुछ के नाते-रिश्तेदार पुलिस में प्रभावशील अधिकारी है, तो कोई भिलाई के स्थानीय नेताओं का करीबी होने का दावा करता है। सूत्र तस्दीक करते है कि पड़ोसी राज्य मध्यप्रदेश और ओड़िशा में भी दर्जनों सट्टा पैनल का संचालन छत्तीसगढ़ के कतिपय पुलिस अधिकारियों के मालिकाना हक़ से जुड़ा है।

भिलाई-दुर्ग से निर्यात किये गए कई बेरोजगारों को स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने बेहतर रोजगार बताकर महानगरों में झोंक दिया है।प्रदेश में सट्टा कारोबार की रोकथाम के बजाय सरकार और पुलिस की बेरुखी चर्चा में है। अब उन पुलिस अधिकारियों की दास्तान सामने आ रही है, जिन्होंने पूर्ववर्ती भूपे राज में पद और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए महादेव ऐप सट्टे घोटाले की जड़े मजबूत करने में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।

अब ऐसे अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर सवालिया निशान भी लग रहे है, जिनके खिलाफ महादेव ऐप सट्टा कारोबार में लिप्तता के प्रमाण ED ने EOW को सौंपे थे। बताते है कि ED ने उन सबूतों और तथ्यों को स्पष्ट करते हुए EOW को वैधानिक कार्यवाही के लिए निर्देशित किया था। लेकिन प्रभावशील अधिकारियों के आगे ‘सरकार’ की भी एक ना चली। दागी अफसरों के खिलाफ EOW में नामजद FIR के बजाय अज्ञात में प्रकरण दर्ज किया गया था।

ED ने अपनी सूची में 2004 बैच के आईपीएस अजय यादव समेत अन्य दो अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर तत्थ्यात्मक जानकारी छत्तीसगढ़ सरकार को सौंपी थी। जेल में बंद पुलिस अधिकारी चंद्रभूषण वर्मा ने भी अपने बयानों में साफ़ किया था कि दुर्ग और रायपुर में विभिन्न पदों पर तैनात रहे अजय यादव को भी हर महीने बतौर प्रोटेक्शन मनी 20 लाख से ज्यादा की रकम का भुगतान किया जाता था। लेकिन मौजूदा पूछताछ सूची में अजय यादव के नाम का नदारत होना चर्चा का विषय बना हुआ है।

भूपे राज में एसएसपी दुर्ग और रायपुर की कमान संभालने वाले अजय यादव की आईजी रायपुर रेंज और प्रदेश के इंटेलिजेंस प्रमुख के रूप में ताजपोशी की गई थी। इस दौर में महादेव ऐप सट्टा कारोबार दिन दुगुनी रात चौगुनी प्रगति कर रहा था। यही नहीं प्रदेश के कई सटोरिये आसमान छू रहे थे। लेकिन अब पुलिस अफसरों के साथ उनके कारोबारी रिश्ते धरातल पर नजर आने लगे है। मामला महादेव ऐप के सटोरियों पर पुलिस अधिकारियों की विशेष कृपा से जुड़ा है।

भिलाई-दुर्ग के चर्चित सट्टा कारोबारी राज गुप्ता उर्फ़ राजा गुप्ता की तस्वीरें इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। ये तस्वीरे अंजोरा के एक ढाबे में महादेव ऐप पैनल की ट्रेनिंग के दौरान पुलिस की छापेमारी से जुड़ी बताई जाती है। सटोरिये राज गुप्ता के मोबाइल को अपने हाथों में लेकर अवलोकन करते कुर्सी पर बैठा तस्वीरों में नजर आ रहा शख्स भिलाई के तत्कालीन ASP संजय ध्रुव बताये जाते है। जबकि उनकी कुर्सी के करीब जमीन पर बैठे शख्स की शिनाख्ती राज गुप्ता की बताई जाती है।

बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान महादेव ऐप पैनल के साथ राज गुप्ता और उनके साथी धर लिए गए थे। ASP ध्रुव ने इस दौरान मोबाइल पर महादेव ऐप सट्टा डाटा समेत कई अधिकारियों के साथ सटोरियों की सांठगांठ के पूरे ब्यौरे का अवलोकन किया था। मोबाइल में कई गोपनीय कोड भी थे। लेकिन तत्कालीन ASP ने असलियत पर पर्दा डालते हुए घटनाक्रम को ही बदल दिया था। महादेव ऐप सट्टे पर मारी गई छापेमारी चंद मिनटों में ही आबकारी एक्ट के तहत पंजीबद्ध कर ली गई थी।

यह भी बताया जा रहा है कि कई स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने महादेव ऐप पैनल संचालन के लिए अपने इलाकों में ट्रेनिंग सेंटर भी खोले थे। नतीजतन, सटोरियों पर उनकी खास मेहरबानी थी। ED और आम जनता की आंखों में धूल झोंकने के लिए शिकायतों के बाद सट्टा कारोबारियों पर छापेमारी तो की जाती थी लेकिन प्रकरणों का रुख दूसरे अपराधों की ओर मोड़ दिया जाता था।

जानकार तस्दीक कर रहे है कि सटोरियों के खिलाफ वैधानिक तौर पर आपराधिक प्रकरण दर्ज ना करते हुए अन्य अपराधों में सटोरियों को पंजीबद्ध करने के निर्देश उच्चाधिकारियों से प्राप्त होते थे। नतीजतन, तत्कालीन सरकार ने महादेव ऐप घोटाले की उच्च स्तरीय जांच में कोई रूचि नहीं दिखाई थी। अलबत्ता कई नामचीन आरोपियों को थानों से सस्ते में छोड़ दिया जाता था। कई नामचीन सटोरियों को सिर्फ मुचलके के आधार पर थाने से छोड़ा गया था।
अब ये सटोरिये दुबई में स्थापित बताये जाते है। पुलिस सूत्रों की माने तो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के निर्देश पर सिर्फ आरोपी राज गुप्ता के ही खिलाफ सट्टा जुआ एक्ट के तहत कार्यवाही नहीं की गई थी। बल्कि ऐसे सैकड़ों सटोरिये थे, जिन्हे उनके अपराधों के बजाय आबकारी एक्ट में धरा गया था। इस मामले से जुड़ी एक FIR भी सोशल मीडिया में तैर रही है।

इसमें उन लोगों का नाम शामिल बताया जाता है, जिनका आबकारी मामले से कोई लेना-देना नहीं था। वायरल तस्वीरें महादेव ऐप सट्टा घोटाले के उन आरोपियों की बताई जाती है, जिनके आईपीएस अधिकारियों के साथ करीब का कारोबारी संबंध था। पुलिस सूत्रों की मानें तो प्रभावशील एसएसपी और आईजी स्तर के अधिकारियों ने महादेव ऐप सट्टा संचालन को बे रोक-टोक जारी रखने के लिए विभिन्न अधिकारियों को मौखिक हिदायत दी थी। ना फ़रमानी करने वाले कई ईमानदार अफसरों को फील्ड पोस्टिंग से बाहर का रास्ता दिखा कर ठिकाने लगा दिया गया था। बताते है कि सट्टा कारोबार के मद्देनजर विभिन्न थानों की जवाबदारी कुछ चिन्हित अधिकारियों के हाथों सौंपी दी गई थी।

इन पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली सुर्ख़ियों में
देश के कई राज्यों में संचालित महादेव ऐप सट्टा कारोबार को लेकर जिन पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया जा रहा है, उनमे ASP संजय ध्रुव, ASP अभिषेक माहेश्वरी, CSP हेम प्रकाश नायक, इंस्पेक्टर गिरीश तिवारी, गौरव तिवारी, विजय पांडे (ACB-EOW), TI वीरेंद्र चंद्रा (EOW) और हवलदार सरफराज चिश्ती का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

बताते है कि हवलदार सरफराज चिश्ती और विजय पांडे आईपीएस अजय यादव और आईपीएस प्रशांत अग्रवाल के लिए हैंडलर का कार्य करते थे। जबकि दुर्ग में पदस्थ हेम प्रकाश नायक का कारोबार किसी सतनाम नामक सटोरिए के नाम पर संचालित बताया जाता है। नायक कई मौकों पर सतनाम के साथ पेट्रोलिंग पार्टी में सट्टा सेंटरों का जायजा लेते भी देखे जाते थे। सतनाम के भतीजे सनी का महादेव ऐप पैनल लुधियाना पंजाब में संचालित बताया जाता है।


क्राइम ब्रांच में पूर्व पदस्थ हवलदार समित मिश्रा ,प्रदीप ठाकुर और बहादुर के भी दीपक नेपाली नामक सट्टा कारोबारी के साथ मिलकर महादेव पैनल संचालन का दावा सट्टा बाजार में किया जा रहा है। इसी तर्ज पर भिलाई के उतई निवासी अमित मिश्रा नामक शख्स के माध्यम से कतिपय पुलिस अधिकारियों का दिल्ली में तीन स्थानों पर महादेव ऐप पैनल संचालित बताया जाता है। यह भी बताते है कि दिल्ली में संचालित महादेव ऐप पैनल का मालिकाना हक़ 2001 बैच के आईपीएस आनंद छाबड़ा के नियंत्रण में है। इसे भिलाई के संतोष गुप्ता और पन्ने नामक शख्स अपने भतीजे के माध्यम से संचालित कर रहे है।

सूत्र तस्दीक करते है कि आनंद छाबड़ा द्वारा अनूप शर्मा और जगदीश गौड़ नामक व्यक्ति को इन पैनलों की देख-रेख की जवाबदारी सौंपी गई है। फ़िलहाल, महादेव ऐप सट्टे घोटाले में जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली सुर्ख़ियों में है, सीबीआई जांच में जुटी है। माना जा रहा है कि जल्द ही कई नए पुलिस अफसर तलब किये जा सकते है। जबकि कुछ के सीबीआई के हत्थे चढ़ने की तैयारी जोरो पर बताई जा रही है।