
रायपुर : रायपुर के सिविल लाइन और बैरन बाज़ार इलाके में निवासरत हज़ारों लोग कानतोडू लाउडस्पीकर की आवाज़ से दो-चार हो रहे है | इस इलाके के कई धार्मिक केंद्रों में लाउडस्पीकर की कानतोडू गूंज से उन परिजनों की मुश्किलें बढ़ गई है,जिनके बच्चों की परीक्षाएं शुरू हो गई है,या फिर सिर पर है|अल सुबह से लेकर देर रात तक लाउडस्पीकर का शोर थमने का नाम ही नहीं लेता| पीड़ित परिवार तस्दीक करते है,कि शहर के हृदय स्थल में ही “कोलाहल अधिनियम” का उल्लंघन हो रहा है| लाउडस्पीकर की आवाज़ तय मापदंड से काफी अधिक डेसिबल पर सुनाई दे रही है,इससे घरों के भीतर भी तेज़ स्वर आने से स्कूली बच्चों से लेकर कॉलेज जाने वाले छात्रों का ध्यान भंग हो रहा है|

छत्तीसगढ़ कॉलेज में ‘अध्ययनरत सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने “कोलाहल अधिनियम” के उल्लंघन पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुए शासन-प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है | उनके मुताबिक,सुबह की पाली से लेकर शाम तक कॉलेज में परीक्षाओं और अध्ययन का दौर जारी है | इस बीच लाउडस्पीकर की कानतोडू आवाज़ ना केवल उनका ध्यान भटका रही है,बल्कि मुश्किलें भी पैदा कर रही है | उनके मुताबिक, इस इलाके के कई घरो की छतों पर लाउडस्पीकर तान दिए गए है| पीड़ित छात्रों ने उन घरों में निवासरत लोगों से लाउडस्पीकर का स्वर नियमानुसार रखने की भी गुहार लगाई गई थी,लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ|

बैरन बाजार और सिविल लाइन इलाके में कई सरकारी-गैर सरकारी स्कूल,अस्पताल,सरकारी दफ़्तर,मैटरनिटी होम,गर्ल्स हॉस्टल, शादी घर भी संचालित हो रहे है | यहां के अध्यापक से लेकर कामकाजी महिलाएं भी लाउडस्पीकर के शोरगुल से लाल-पीले हो रहे है | उनके मुताबिक,आस-पास के इलाकों में शादी-ब्याह और उत्सवों पर आए दिन लाउडस्पीकर का स्वर छात्रों की पढ़ाई-लिखाई में बाधा उत्पन्न कर रहा है | इन इलाकों के शादी घरों और अन्य स्थानों पर DJ की धुन और लाउडस्पीकर की आवाज़ का तेज़ स्वर में सुनाई देना आम हो गया है,जिसे चौबीसों घंटे सुना जा सकता है |

यहां के पीड़ितों की माने तो,बच्चे और छात्र चाहे घर में हो या फिर स्कूल-कॉलेज में,उनके मुंह में शोरगुल के स्वर रच-बस चुके है,यही हाल बड़े-बुज़ुर्ग का भी है, वे भी लाउडस्पीकर के रंग में रंगे नजर आ रहे है| जबकि,इलाके के उन बुजुर्गों का बुरा हाल है,जिन्हें नींद ना आने की बीमारी है| पीड़ितों की माने तो, इस इलाके में लाउडस्पीकर खास घरों की छतों पर बेरोक-टोक स्थापित किए गए है,एक ही स्थान में कई दो तो कही दिशाओं के चारों ओर लाउडस्पीकरों को लगाया गया है,ताकि दूर-दूर तक लोगों को उसका स्वर सुनाई दे|

वे तस्दीक करते है,कि बड़ी मुश्किल से नींद आती है,लेकिन कानफोड़ू आवाज़ चैन से सोने का मौका ही नहीं दे रही है|उनकी माने तो चाय पान के ठेलों में भी DJ बजने से यह पूरा इलाका शोरगुल का गढ़ बन गया है|कई पीड़ित यह भी दावा करते है,कि इलाके के पार्षदों तक ने लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक लगाने के बजाए शिकायतकर्ताओं का मुंह बंद करा दिया है|उनकी दलील है,कि “जैसा चल रहा है,चलने दीजिये”| फ़िलहाल,“कोलाहल अधिनियम” की उड़ती धज्जियों से भले ही मुट्ठी भर लोगो का मनोरंजन हो रहा हो,लेकिन इलाके के छात्र-छात्राओं की बाधित होती पढ़ाई -लिखाई उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ के रूप में देखी जा रही है |




