
कानून के शासन, लोकतांत्रिक एवं संसदीय संस्थाओं और चुनावी प्रक्रियाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी ने चुनावी विश्लेषण एवं प्रबंधन, राजनीतिक संचार और विधायी मसौदा तैयार करने के क्षेत्र में तीन नए स्नातकोत्तर डिग्री कार्यक्रम शुरू किए हैं।
शुभारंभ समारोह में प्रमुख हस्तियां
कार्यक्रम का शुभारंभ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (मुख्य अतिथि) और विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल (विशिष्ट अतिथि) की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति व सांसद नवीन जिंदल सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
तीन नए एम.ए. कार्यक्रमों की शुरुआत
विश्वविद्यालय ने एक वर्षीय तीन एम.ए. कार्यक्रम शुरू किए हैं—विधायी मसौदा तैयार करने में एम.ए., चुनावी विश्लेषण एवं प्रबंधन में एम.ए. और राजनीतिक संचार में एम.ए.। इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य लोकतंत्र, चुनाव प्रशासन, राजनीतिक अभियान, रणनीतिक संचार और उच्च गुणवत्ता वाले कानून निर्माण से जुड़े पेशेवरों की बढ़ती मांग को पूरा करना है।
लोकतंत्र को मजबूत करने पर जोर
ओम बिरला ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और ये पाठ्यक्रम लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, तकनीकी विकास और जनभागीदारी को नई दिशा देगी।
विधायी मसौदा तैयार करने का महत्व
अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि विधायी भाषा का प्रत्येक शब्द महत्वपूर्ण होता है और सटीक मसौदा तैयार करना शासन व्यवस्था का आधार है। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्र कानून निर्माण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ विकसित कर सकेंगे।
शैक्षणिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण का समन्वय
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, कार्यक्रमों में इंटर्नशिप, लाइव परियोजनाएं, नीति-निर्माताओं से संवाद और व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल होगा, जिससे छात्रों की रोजगार क्षमता और पेशेवर दक्षता में वृद्धि होगी।
लोकतांत्रिक संवाद और नीति निर्माण में योगदान
इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और छात्रों को शासन, नीति निर्माण, मीडिया, नियामक संस्थानों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों में करियर के लिए तैयार करना है।




