छत्तीसगढ़ सेक्स सीडी कांड पर बड़ा खुलासा कर सकते है कैलाश मुरारका, उद्योगपति सुरेश गोयल और खनूजा सरकारी गवाह ? आरोपियों को उपकृत करने पर कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले सबूतों के उजागर होने के आसार…     

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दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित फर्जी सेक्स सीडी कांड में सीबीआई एक बार फिर सक्रिय हो गई है। हालांकि बीते 7 सालों में उसके कई अफसर रिटायर तो कई इधर से उधर हो गए है। लेकिन मामले की विवेचना से जुड़े दस्तावेज जहाँ की तहाँ फाइलों में कैद है। एजेंसी उन दस्तावेजों के अवलोकन और परीक्षण के बाद अपना पक्ष अदालत के सामने रख रही है। फर्जी सेक्स सीडी कांड की तह तक जा पहुंची सीबीआई ने इस मामले में राज्य के पूर्व CM भूपे बघेल उनके सलाहकार विनोद वर्मा, विजय पांड्या, विजय भाटिया और कैलाश मुरारका के खिलाफ कई सबूत भी जुटाए है। हालांकि, मुख्य आरोपियों में से एक रिंकू खनूजा की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। हालिया एक क़ानूनी प्रक्रिया के तहत तमाम आरोपी रायपुर की स्थानीय कोर्ट में पेश हुए थे। इसके साथ ही फर्जी सेक्स सीडी कांड एक बार फिर सुर्ख़ियों में आ गया है।

माना जा रहा है कि इस मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को तमाम आरोपी अपने बचाव के लिए ऐसी दलीले पेश कर सकते है, जो प्रकरण की विवेचना और सबूतों से जुड़े हुए है। इस कड़ी में पूर्व बीजेपी नेता कैलाश मुरारका के कुछ महत्वपूर्ण चौकाने वाले खुलासे किये जाने के आसार जाहिर किये जा रहे है। सूत्र तस्दीक करते है कि कथित सीडी को पहले मंत्री की सेक्स सीडी करार देकर ब्रेकिंग न्यूज़ के रूप में प्रसारित करने और फिर ‘सौदेबाजी’ के बाद उसी सीडी को फर्जी करार देकर नए सिरे से समाचार प्रसारित करने के मामले में स्थानीय चैनल संचालक सुरेश गोयल की गतिविधियों को लेकर कई महत्वपूर्ण सबूतों के उजागर होने के आसार है।

सूत्र यह भी तस्दीक करते है कि सेक्स सीडी निर्माण और उसके प्रसारण को लेकर लवली भाटिया और सुरेश गोयल के बीच बड़ा लेनदेन हुआ था। इससे जुड़ा एक वीडियो वायरल होने के 2 दिनों बाद ही संदेहास्पद परिस्थितियों में एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा की मौत हो गई थी। उसका शव फांसी पर लटका पाया गया था। यह भी बताया जाता है कि रिंकू खनूजा गुप्त कैमरे और वीडियो रिकॉर्डिंग के अच्छे तकनीकी जानकार थे। वे लवली भाटिया के अधीनस्थ कार्यरत थे। सूत्रों की मानें तो कथित सीडी के निर्माण और प्रसारण को लेकर ब्लैकमेलिंग जोरो पर थी। इस दौरान वो ऑडियो क्लिप रिंकू के हाथों में लग गई, जिसमे लेनदेन के लिए सुरेश गोयल अपने एक अन्य साथी लवली भाटिया पर दबाव बना रहे थे।

बताते है कि फर्जी सेक्स सीडी कांड की असलियत से वाकिफ कराने के लिए रिंकू ने यह ऑडियो क्लिप सीबीआई को सौंपी थी। इस ऑडियो क्लिप में लेनदेन का पूरा ब्यौरा साफ-साफ रिकॉर्ड बताया जाता है, ऑडियो क्लिप में लवली भाटिया अनावश्यक दबाव बनाने पर उद्योगपति सुरेश गोयल को आत्महत्या करने की चेतावनी भी दे रहे है। बावजूद इसके अवैध वसूली को लेकर गोयल का दबाव अपराध की असली जड़ों की ओर इशारा कर रहा है।

सूत्र यह भी तस्दीक करते है कि इस ऑडियो क्लिप के सीबीआई के संज्ञान में आने के दो-तीन दिन बाद ही रिंकू को ठिकाने लगा दिया गया था। यही नहीं छत्तीसगढ़ पुलिस के रायपुर में पदस्थ तत्कालीन प्रभावशील अधिकारियों ने बगैर ठोस जांच और विवेचना के आनन-फानन में रिंकू की मौत को आत्महत्या करार दे देकर फाइल क्लोज कर दी थी। जबकि पीड़ित परिजन उसकी हत्या का आरोप लगाते हुए मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम और न्याय की गुहार लगा रहे थे। 

जानकारी के मुताबिक मृतक रिंकू के परिजनों के सक्रिय होने के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने उद्योगपति सुरेश गोयल को तलब भी किया था। लेकिन राजनैतिक दबाव और फर्जी सेक्स सीडी कांड की हकीकत बयां होने के भय से रिंकू खनूजा की मौत की फाइल थाने की आलमारियों में कैद कर दी गई थी। इधर करीब 7 साल बाद इस प्रकरण की फाइल एक बार फिर चर्चा में आ गई है। सूत्र तस्दीक करते है कि लवली भाटिया और सुरेश गोयल की फर्जी सेक्स सीडी कांड में संलिप्तता के बावजूद, दोनों को सरकारी गवाह बनाया गया है। हालांकि सीबीआई की ओर से इस मामले में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

लेकिन कोर्ट-कचहरी के गलियारों से आ रही जानकारी के मुताबिक बचाव पक्ष ने दस्तावेजी प्रमाणों के साथ सुरेश गोयल और लवली भाटिया के खिलाफ भी समान आपराधिक प्रकरण दर्ज किये जाने को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्य जुटाए है। रायपुर की विशेष कोर्ट में फर्जी सेक्स सीडी कांड की क़ानूनी प्रक्रिया दोबारा शुरू हो गई है। आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री भूपे बघेल, विनोद वर्मा, कैलाश मुरारका, विजय पांड्या और विजय भाटिया ने कोर्ट में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेष न्यायाधीश भूपेश कुमार बसंत की अदालत में सीबीआई ने भी अपराध से जुड़े तथ्य पेश किये है।

सीबीआई अभियोजक ने कोर्ट में दलील पेश करते हुए बताया कि 2017 में मुबंई में मानस साहू ने सीडी को मार्फ (टेंपरिंग) किया था। इसके लिए करीब 95 हजार रुपए का लेनदेन हुआ था। सीडी निर्माण के एक साल बाद दिल्ली में इसकी कॉपी की गई थी। इस प्रकरण में स्पेशल टीम ने दिल्ली से विनोद वर्मा और कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष भूपे बघेल को गिरफ्तार कर जेल दाखिल कराया गया था।

विशेष अदालत में पेश चार्जशीट में एजेंसी ने इससे संबंधित गवाहों के बयानों को इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस के साथ आरोपियों के अपराधों का ब्यौरा पेश किया है। मामले की बहस पूरी कर ली गई है। अब बारी बचाव पक्ष की है, 4 मार्च को अगली सुनवाई नियत है। सूत्र तस्दीक करते है कि कैलाश मुरारका फर्जी सेक्स सीडी कांड को लेकर कई महत्वपूर्ण तथ्यों से अदालत को अवगत करा सकते है। यही नहीं उनके द्वारा चौंकाने वाले ऐसे तथ्यों का भी खुलासा किया जा सकता है, जो इस प्रकरण में न्याय की दिशा में ‘मील का पत्थर’ साबित हो सकते है, लोगों की निगाहे इस ओर लगी हुई है।