
नई दिल्ली : जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) कैंपस एक बार फिर से सुलग गया है. एक बार फिर से 2020 की देश विरोधी कांड के 6वीं बरसी पर नारे लगे. ये नारे सोमवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगे. ये घटना तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में स्टूडेंट एक्टिविस्ट उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया.

सूत्रों का कहना है कि ये नारे साबरमती हॉस्टल इलाके में लेफ्ट-समर्थित स्टूडेंट ग्रुप्स के कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान लगाए गए थे. बता दें कि खालिद और इमाम पांच साल से ज़्यादा समय से ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं. वहीं, पुलिस ने सुबह इस घटना पर जानकारी देते हुए कहा था कि अभी तक फॉर्मल एफआईआर के लिए शिकायत नहीं मिली है. हालांकि, मामला को तूल पकड़ते देख दोपहर को जेएनयू के चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर ने वसंत कुंज पुलिस स्टेशन एसएचओ को पत्र लिख एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.

कांग्रेस का कहना है, यह गुस्सा जाहिर करने का एक तरीका है। JNU में 2020 दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ गुस्सा है। उमर खालिद और शरजील इमाम साथ ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान हैं। उनके साथ नाइंसाफी हुई है। SC का फैसला बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। वही बीजेपी का कहना है, कुछ लोग हैं जो इस प्रकार के देश विरोधी, धर्म विरोधी नारे लगाते हैं। ये अफजल गुरू के लिए भी नारे लगाते हैं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ, आतंकियों-नक्सलियों के समर्थन में नारे लगाते हैं लेकिन इनके नारे बस नारे तक ही सीमित हैं। यह बस उनकी छटपटाहट है।







