
मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध के बीच Iran ने India को मानवीय सहायता के लिए धन्यवाद दिया है। भारत ने ईरान के नौसैनिक जहाज़ IRIS Lavan को तकनीकी और लॉजिस्टिक सहायता के लिए Kochi Port पर सुरक्षित ठहरने की अनुमति दी। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली (Mohammad Fathali) ने बताया कि यह कदम उस घटना के बाद उठाया गया जब ईरानी नौसैनिक जहाज़ IRIS Dena हिंद महासागर में डूब गया। रिपोर्ट के अनुसार यह जहाज़ Sri Lanka के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी के टॉरपीडो हमले के बाद डूब गया।
राजदूत ने कहा कि ईरान अभी भी इस घटना की जांच कर रहा है और जहाज़ के चालक दल की स्थिति पर नजर रख रहा है। राजदूत फतहाली ने कहा कि भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन ने जहाज़ को डॉकिंग की अनुमति देकर मानवीय दृष्टिकोण दिखाया। उन्होंने कहा “हम भारत सरकार और स्थानीय अधिकारियों के सहयोग और मानवीय दृष्टिकोण के लिए दिल से धन्यवाद देते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि इस कठिन समय में भारत का सहयोग दोनों देशों के पुराने और मित्रवत संबंधों को दर्शाता है।
कोच्चि में ठहरे 183 नाविक
सूत्रों के अनुसार IRIS Lavan में 183 क्रू सदस्य हैं। सभी को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है। भारत ने जहाज़ को तकनीकी सहायता और लॉजिस्टिक समर्थन भी दिया है। बचाव अभियान में भारतीय नौसेना की अहम भूमिका रही। जब IRIS Dena डूबा, तब भारत ने बचाव अभियान में भी सहयोग किया। भारतीय नौसेना ने INS Tarangini, INS Ikshak और Boeing P-8I Poseidon समुद्री गश्ती विमान तैनात किए ताकि खोज और बचाव अभियान में मदद मिल सके। रिपोर्ट के अनुसार जहाज़ में करीब 180 नाविक थे, जिनमें से लगभग 87 की मौत हो गई और करीब 32 लोगों को बचा लिया गया।
जयशंकर ने बताया ‘मानवीय फैसला’
S. Jaishankar ने Raisina Dialogue 2026 में कहा कि भारत का यह फैसला पूरी तरह मानवीय आधार पर लिया गया। उन्होंने कहा कि जहाज़ और उसके युवा चालक दल “गलत समय पर गलत जगह” फंस गए थे। राजदूत फतहाली ने विश्वास जताया कि Tehran और New Delhi के बीच ऐतिहासिक और रचनात्मक संबंध भविष्य में और मजबूत होंगे। उन्होंने भारत सरकार और जनता को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।





