
रायपुर : छत्तीसगढ़ के आदिवासी और साहू समाज के कई दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल की आँखो की किरकिरी बन गए है। सत्ता से हाथ धोने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री इस समाज को आड़े हाथो ले रहे है, इन समुदाय के नेताओं की तुलना बंदरो से कर रहे है। बिलासपुर के लिंगियाडीह इलाके में पूर्व मुख्यमंत्री की बदजुबानी से आदिवासी और साहू समाज में काफी नाराजगी देखी जा रही है। जहाँ आदिवासियों का गुस्सा उबल रहा है,वही साहू समाज ने बघेल से माफ़ी की मांग की है।

तस्दीक की जा रही है, कि विधान सभा चुनाव में मुंह की खाने के बाद बघेल ने इस समाज के बड़े नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ आग उगलना शुरू कर दिया है। प्रदेश में ब्राह्मणों के बाद आदिवासियों और साहू समाज के ख़िलाफ़ बघेल की टिप्पणी ने इस समाज को झकझोर दिया है। दावा किया जा रहा है, कि कांग्रेस की हार का ठीकरा बघेल ने आदिवासियों और साहू समाज पर फोड़ा था, जबकि भ्रष्टाचार में लिप्त बघेल अभी भी खुद को पाक-साफ़ साबित करने में जुटे बताये जाते है। वो अपनी सफाई पेश करने के लिए बगैर बुलाए उन इलाकों में अपनी उपस्थिती दर्ज करा रहे है,जहाँ सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन जारी है। यह भी कहा जा रहा है, कि उनका समर्थन नहीं करने के चलते पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की नाराजगी अब तक ख़त्म नहीं हुई है। “खिसियानी बिल्ली खम्बा नोचे” जैसी कहावत को चरितार्थ करते हुए बघेल ने अब समाज के गौरवशाली नेताओं को निशाने पर ले लिया है।

कुर्सी भले ही ख़िसक गई हो,लेकिन मुख्यमंत्री का भूत अभी भी उनके सिर पर सवार है, ब्राह्मणों के बाद साहू समाज और उनके वरिष्ठजनों पर बघेल ने अब निशाना साधना शुरू कर दिया है। इस समुदाय पर अशोभनीय टिप्पणी करने से बघेल बाज़ नहीं आ रहे है। नतीजतन, समाज ने उनके खिलाफ वैधानिक कार्यवाही के लिए पुलिस अधीक्षक को शिकायत की है। बताया जाता है, कि सत्ता में काबिज़ होने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल और उनके स्व पिता ने ब्राह्मणों और बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोला था। लेकिन अब कांग्रेस के हाथो से सत्ता चली गई है, फिर बघेल के सिर पर “मुख्यमंत्री का भूत” आज भी सवार बताया जाता है।

ताज़ा मामला बिलासपुर का है, यहाँ के लिंगियाडीह इलाके में पिछले 37 दिन से जारी ग्रामीणों के आंदोलन का समर्थन करने पहुंचे बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उप मुख्यमंत्री अरुण साव पर तीखा हमला बोला था। लेकिन घमंड और सत्ता के नशे में चूर पूर्व मुख्यमंत्री बघेल बदजुबानी करने लगे। उन्होंने स्थानीय समस्या के निराकरण पर तो चुप्पी साधी रही, लेकिन साहू समाज के जनप्रतिनिधियों पर “ऊल-जलूल और अशोभनीय टिप्पणी” करने लगे। मुख्यमंत्री जैसे सम्मानीय पद पर काबिज़ आदिवासी समुदाय के दिग्गज नेता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर बघेल ने गुस्सा उतारा।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लिंगियाडीह बस्ती को तोड़कर जो गार्डन बनाया जा रहा है, उसमें,“क्या मुख्यमंत्री अपनी पत्नी के साथ वहां घूमने आएंगे।” पूर्व मुख्यमंत्री के बोल यही नहीं थमे, दम्भ भरते हुए बघेल ने उप मुख्यमंत्री अरुण साव की तुलना बंदर से कर दी। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, कि दो साल में केवल 950 मीटर सड़क बन सकी और किसी भी मामले में काम नहीं हो पा रहा। पूर्व सीएम की इसी टिप्पणी के बाद से प्रदेश के आदिवासियों और साहू समाज के बीच नाराजगी देखी जा रही है। साहू समुदाय के संघ ने बघेल को आड़े हाथों लेते हुए कार्रवाई की मांग की है।

साहू समाज के अध्यक्ष नीरेन्द्र साहू ने बघेल से माफ़ी की मांग की है, साहू समाज ने पत्र जारी कर कहा है कि, भूपेश बघेल 10 दिनों के अंदर माफी मांगें। अन्यथा समाज उनके खिलाफ आंदोलन करने पर मजबूर होगा। साहू समाज ने कहा कि डिप्टी CM अरुण साव समाज के गौरव है, उनके खिलाफ अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ ज्ञापन सौंपने के लिए साहू समाज ने सभी जिलाध्यक्षों को पत्र जारी किया है। इस बारे में सामाजिक नेता 5 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।






