
रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ में आईएएस और आईपीएस के पद रेवड़ियों की तरह बांटे जा रहे है| इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन और अन्य क़ायदे-कानूनों को मज़ाक बना दिया गया है| राज्य में IAS-IPS अवॉर्ड पाने के लिए नियमानुसार योग्यता के नियम रद्दी की टोकरी में डाल दिए गए है,बस डबल इंजन सरकार में आपका,“जुगाड़” भर होना चाहिए|फिर घर बैठे आपको संघ लोक सेवा आयोग अपनी “सेवाएं” प्रदान करेगा| CGPSC का बगैर सामना किए भी आप IAS-IPS अधिकारी बन सकते है| राज्य की बीजेपी सरकार ने इसके लिए अपने दरवाज़े खोल दिए है|“अनुकंपा” नियुक्ति की आड़ में IAS-IPS अवॉर्ड प्रदान करने का गोरखधंधा प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनैतिक हलकों में सुर्खियां बटोर रहा है|

तस्दीक की जा रही है,कि प्रदेश की सुशासन सरकार ने साफ़ कर दिया है,कि भले ही आप CGPSC “सिलेक्ट” ना भी हो,तो भी चलता है,UPSC आपको हाथों-हाथ IAS अधिकारी बना कर ही दम लेगी| यही नहीं,पिछले दरवाज़े से IAS-IPS अवॉर्ड प्राप्त कर रहे अफसरों को राज्य सरकार बेरोक-टोक शासन-प्रशासन पर थोपने में भी पीछे नहीं है| ताज़ा जानकारी के अनुसार,अनुकंपा नियुक्ति के मार्फ़त पहले डिप्टी कलेक्टर और अब IAS अवॉर्ड प्राप्त सौमिल रंजन चौबे को लेकर बड़ी खबर आ रही है| उनका IAS अवॉर्ड रद्द करने की मांग प्रशासनिक हलकों से ही सामने आ रही है |

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सौमिल रंजन चौबे ना तो CGPSC सिलेक्ट है,और ना ही राज्य लोक सेवा आयोग ने उनका डिप्टी कलेक्टर से IAS अवॉर्ड हेतु अनुमोदन किया है ? यही नहीं,सुप्रीम कोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर स्पष्ट गाइड लाइन जारी की है,कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने कई प्रकरणों में “राजपत्रित अधिकारी” के पद को अनुकंपा नियुक्ति के तहत भरे जाने पर आपत्ति भी जाहिर की है| सुप्रीम कोर्ट ने सैद्धांतिक रूप से स्पष्ट किया है,कि शासकीय सेवा के दौरान मृत्यु होने पर संबंधित अधिकारी के पद के स्टेटस के अनुसार नियुक्ति नहीं दी जा सकती|

सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में यह भी साफ़ कर दिया है,कि संबंधित अधिकारी के पद और योग्यता को देख कर भी “राजपत्रित अधिकारी” के पद पर नियुक्ति नहीं दी जा सकती| यह भी जानकारी सामने आ रही है,कि उनके पिता स्व. विनोद चौबे की मृत्यु के दौरान जुलाई वर्ष 2009 में सौमिल रंजन चौबे की डिप्टी कलेक्टर पद पर नियुक्ति इसलिए नहीं की गई थी,क्योंकि उस वर्ष उनकी उम्र 21 वर्ष से कम थी |

जबकि,डिप्टी कलेक्टर पद हेतु न्यूनतम उम्र 21 वर्ष निर्धारित है | यही नहीं,सौमिल रंजन चौबे को अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को शिथिल कर जब डिप्टी कलेक्टर पद पर नियुक्ति दी जा रही थी,तब मंत्री परिषद की बैठक में GAD ने नियम कायदों के हवाला देते हुए डिप्टी कलेक्टर पद पर सौमिल रंजन चौबे की नियुक्ति को अनुचित जताते हुए कानूनन कैबिनेट नोट में आपत्ति दर्ज की थी | इस आपत्ति के बाद उनकी नियुक्ति टाल दी गई थी| लेकिन इसके उपरांत चंद महीनों बाद एक नया कैबिनेट नोट तैयार कर नए सिरे से सौमिल रंजन चौबे की डिप्टी कलेक्टर पद पर नियुक्ति को हरी झंडी दे दी गई थी | जबकि,CGPSC ने चौबे की डिप्टी कलेक्टर पद पर नियुक्ति का अनुमोदन नहीं किया था |

सौमिल रंजन चौबे को प्रदान की गई अनुकंपा नियुक्ति में “दोहरे कैबिनेट” नोट को लेकर गहमा-गहमी तेज़ हो गई है | उधर, CGPSC के मौजूदा अधिकारी नाम ना जाहिर करने की शर्त पर इस तथ्य को स्वीकार कर रहे है,कि IAS अवॉर्ड हेतु उनके द्वारा सौमिल रंजन चौबे का अनुमोदन नहीं किया गया है | एक अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया,कि कांग्रेस सरकार के दौर में तत्कालीन CGPSC के अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने भी चौबे की डिप्टी कलेक्टर पद पर नियुक्ति का अनुमोदन किया था या नहीं ? इसका ब्यौरा देख कर ही बताया जा सकता है | CGPSC के पदाधिकारी जिस तर्ज पर सौमिल रंजन चौबे की अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण को लेकर अनभिज्ञता जाहिर कर रहे है,उससे साफ़ है,कि दाल में कुछ काला है ?

यह भी बताया जाता है,कि छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा के दौरान शहीद सरकारी कर्मियों और अधिकारियों के पारिवारिक सदस्यों को सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन और अनुकंपा नियुक्ति की “टर्म्स एंड कंडीशन” को दरकिनार करते हुए “राजपत्रित अधिकारी” संवर्ग-2 के स्तर पर डिप्टी कलेक्टर और DSP जैसे पदों पर सहानुभूतिपूर्वक नियुक्ति दी जा रही है| इसके लिए नियमों और प्रावधानों की शिथिलता की गलत व्याख्या भी की जा रही है|जानकार यह भी तस्दीक कर रहे है,कि IAS-IPS अवॉर्ड के दौरान ऐसे अभ्यर्थी के संबंध में कई महत्त्वपूर्ण जानकारियां UPSC और DOPT से छिपाई जा रही है| ताकि मनपसंद अधिकारियों को पिछले दरवाजों से IAS-IPS जैसा कारगर अवॉर्ड प्राप्त हो सके|

जानकारी के मुताबिक,सौमिल रंजन के पिता स्वर्गीय वीके चौबे राज्य के राजनांदगांव जिले के एसपी रहते वर्ष 2009 में मदनवाड़ा में हुए नक्सली हमले में शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद उनके पुत्र सौमिल को राज्य सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को शिथिल कर डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्ति दी थी। उन्हें डिप्टी कलेक्टर का 2010 बैच अलॉट किया गया था।अनुकंपा नियुक्ति पाने के बाद सौमिल बिलासपुर नगर निगम कमिश्नर वित्त विभाग के उपसचिव,राज्य शहरी विकास अभिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी समेत कई पदों की जवाबदारी संभाल चुके है |

छत्तीसगढ़ में स्टेट सिविल सर्विस के सात अधिकारियों को हालिया प्रमोट करके IAS बनाया गया है। इस संबंध में भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ़ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DOPT) से आदेश जारी किए गए थे। नोटिफिकेशन के मुताबिक, केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ स्टेट एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (SAS) के सात अफसरों को इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) में प्रमोट किया है। ये प्रमोशन 2024 की सिलेक्शन लिस्ट का हिस्सा बताए जाते हैं |

यह भी बताया जाता है,कि 1 जनवरी, 2024 और 31 दिसंबर, 2024 के बीच रिक्त हुए पदों को भरने के लिए अवॉर्ड प्रदान किए गए हैं। छत्तीसगढ़ SAS से अफसरों की सूची में जिन अधिकारियों को अवॉर्ड दिया गया उनमें तीरथराज अग्रवाल,लीना कोसम,सौमिल रंजन चौबे,बीरेंद्र बहादुर पंचभाई,सुमित अग्रवाल,संदीप कुमार अग्रवाल,आशीष कुमार टिकरिहा का नाम शामिल है | फ़िलहाल,IAS अवार्ड की बानगी और कानूनी दांवपेचों को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज़ है |







