
रायपुर: मुख्यमंत्री निवास में आयोजित ‘वीर बाल दिवस’ के विशेष आयोजन में प्रदेश के चार नन्हे वीरों को उनके साहसिक कार्यों और अद्भुत हिम्मत के लिए सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम में गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबजादों की पावन स्मृति में स्थापित पुरस्कार प्रदान किए। समारोह में सांसद संतोष पांडेय, विजय बघेल सहित बड़ी संख्या में अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन बच्चों ने संकट की घड़ी में जो साहस दिखाया, वह पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से ‘वीर बाल दिवस’ राज्यभर में और भी बड़े स्तर पर मनाया जाएगा। साथ ही, इस विषय को कक्षा तीसरी के पाठ्यक्रम में भी जोड़ा गया है ताकि बच्चे बहादुरी और त्याग की सीख ले सकें। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी द्वारा प्रदेश के विकास विजन प्रस्तुत करने पर मुख्यमंत्री ने उसकी भी सराहना की।

सिविल सोसायटी के संयोजक डॉ. कुलदीप सोलंकी ने बताया कि सोसायटी के प्रयासों के परिणामस्वरूप ही केंद्र सरकार ने 26 दिसंबर को राष्ट्रीय ‘वीर बाल दिवस’ घोषित किया।
सम्मानित बच्चों की वीर गाथाएं
ओम उपाध्याय, कोहका भिलाई — साहिबजादा अजीत सिंह अवॉर्ड
भिलाई में आक्रामक कुत्तों के हमले से बच्चों को बचाते हुए ओम ने निडरता दिखाई। घायल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और साहस के दम पर मासूमों को सुरक्षित किया।

कांति, मोहनपुर, सरगुजा — साहिबजादा जुझार सिंह अवॉर्ड
सिर्फ सात साल की उम्र में कांति ने अद्भुत हिम्मत दिखाई। हाथियों के झुंड के बीच फंसी तीन साल की बहन को उसने जोखिम उठाकर सुरक्षित बाहर निकाला।
अंशिका साहू, संबलपुर धमतरी — साहिबजादा जोरावर सिंह अवॉर्ड
खुले बिजली तार की चपेट में आई अपनी बड़ी बहन को अंशिका ने सूझबूझ से बचाया। बिना घबराए उसने प्लास्टिक चप्पल का उपयोग कर बहन को करंट से अलग किया और उसकी जान बचाई।
प्रेमचंद साहू, रामपुर (डंगनिया) रायपुर — साहिबजादा फतेह सिंह अवॉर्ड
तालाब में डूब रहे एक बच्चे को प्रेमचंद ने अपनी जान खतरे में डालकर बचाया। तेज बहाव और गहराई को मात देते हुए उन्होंने बच्चे को सुरक्षित किनारे पहुंचाया।

इस आयोजन ने न केवल इन बच्चों के साहस का सम्मान किया, बल्कि समाज में बहादुरी, मानवता और कर्तव्यभाव का मजबूत संदेश भी दिया।







