रायपुर : छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार ने एक ओर जहाँ जीएसटी दरों में मामूली छूट दी है। वही जमीनों के खरीद -फ़रोख्त में 100 फ़ीसदी से ज्यादा का इज़ाफ़ा कर लोगों को मुश्किल में डाल दिया है। पीड़ित लोग सड़कों पर उतर कर सरकार के फैसले का विरोध कर रहे है। दरअसल, प्रशासन ने कलेक्टर गाइडलाइन दरों में एकमुश्त भारी बढ़ोत्तरी कर दी है. कई जगहों पर ये बढ़ोतरी 300 फीसदी तक की गई है. कलेक्टर गाइडलाइन की दरों में इजाफा किए जाने के बाद जमीन और मकान खरीदना आम लोगों के लिए अब मुश्किल हो सकता है.

प्रदेश में अचल संपत्तियों की सरकारी गाइडलाइन दरों में अचानक की गई भारी-भरकम बढ़ोतरी ने संपत्ति बाजार में हलचल मचा दी है। राजधानी समेत कई जिलों में दरें 20 प्रतिशत से लेकर 10 गुना तक बढ़ा दी गई हैं। नई दरों के लागू होते ही जमीन और मकानों की रजिस्ट्री में टैक्स कई गुना बढ़ गया है, जिससे मध्यम वर्ग को सबसे बड़ा झटका लगा है।

शासन के इस फैसले के बाद रियल एस्टेट कारोबारी और आम खरीदार दोनों ही इसे बाजार विरोधी, अर्थव्यवस्था को पीछे ले जाने वाला कदम बता रहे हैं. इसी बढ़ोतरी के विरोध में आज रायपुर के कलेक्टर परिसर में कारोबारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया. जहाँ सैकड़ों की संख्या में व्यापारी रैली निकालकर सड़कों पर उतरे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।


वही नाराज लोगों और व्यापारियों का कहना है, कि गाइडलाइन दरों में तीन गुना वृद्धि से न केवल जमीन खरीदना मुश्किल होगा बल्कि बेचना भी मुश्किल हो जाएगा. व्यापारियों का कहना है कि इस फैसले से प्रॉपर्टी बाजार ठप पड़ेगा और इससे जुड़े हजारों लोग बेरोजगारी का सामना करने को मजबूर हो जाएंगे.फ़िलहाल, कलेक्टर गाइडलाइन दरों में की गई इस ताबड़तोड़ बढ़ोतरी ने ना सिर्फ आम लोगों के घर खरीदने के सपने पर ब्रेक लगा दिया है, बल्कि रियल एस्टेट सेक्टर में भी अनिश्चितता बढ़ा दी है। अब देखना होगा कि सरकार व्यापारियों और जनता की आवाज सुनते हुए अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करती है या फिर जमीन से जुड़े ये विरोध और उग्र रूप ले लेते हैं।
