
रायपुर : छत्तीसगढ़ में ठगों की लॉटरी निकल आई है, डिजिटल फ्रॉड से एक ओर जहाँ पुलिस दो -चार हो रही है, वही परंपरागत ठगों ने भी उसकी नाक में दम कर दिया है। राहत भरी बात यह है, कि पीड़ितों से शिकायत मिलने के बाद क़िस्म -क़िस्म के ठगराज पुलिस के हत्थे चढ़ रहे है। धोखाधड़ी, जालसाज़ी और ठगी की वारदातें दिलचस्प ही नहीं बल्कि हैरान करने वाली भी है। बिलासपुर पुलिस ने एक ऐसे ठग को धरदबोचा है, जो तहसीलदार बनकर एक युवती पर डोरे डाल रहा था। पीड़ित युवती ने आई मुसीबत को टालने के लिए पुलिस से संपर्क किया, देखते ही देखते तहसीलदार साहब की पोल खुल गई।

जानकारी के मुताबिक फेसबुक के जरिए स्वयं को तहसीलदार बताकर युवती से फर्जी तहसीलदार ने पहले दोस्ती किया और फिर प्रेम की पींगे बढ़ाने लगे, तब तक युवती समझ चुकी थी, कि तहसीलदार फर्जी है। उसने जैसे ही बातचीत बंद की आरोपी ने उसका फोटो और मोबाइल नंबर फर्जी आईडी के ज़रिये सोशल मीडिया में वायरल कर दिया। पीड़ित की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी को जांजगीर-चांपा जिले के मुलमुला गांव से गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपी का नाम आशुतोष उपाध्याय पिता नरेंद्र उपाध्याय 35 वर्ष मुलमुला, जिला जांजगीर-चांपा बताया जाता है। सरकंडा निवासी युवती ने 26 दिसंबर को पुलिस को बताया, कि आरोपी से उसकी फेसबुक के जरिए 2022 में जान-पहचान हुई थी। उसके मुताबिक स्वयं को तहसीलदार बताने वाला आशुतोष उपाध्याय से जब उसने बातचीत बंद कर दिया तो वह अलग अलग नंबरों से कॉल करता और अभद्र बातें करने लगा। उसने फर्जी आईडी बनाकर उसका फोटो और मोबाइल नंबर वायरल कर दिया था।
डॉक्टर साहब भी ठगी के शिकार, 100 करोड़ कैश की जप्ती के लिए फर्जी आयकर अधिकारी की दस्तक़-
यह घटना 16 दिसंबर 2025 को धमतरी थाने में दर्ज की गई,पता चला की एक स्थानीय डॉक्टर के घर में 100 से 200 करोड़ रुपए कैश होने की सूचना पर एक आयकर अधिकारी के नेतृत्व में डॉक्टर के घर पर छापेमारी की थी। आईटी अफ़सर के साथ दर्जन भर से ज्यादा अन्य अधिकारियों की टीम भी थी। छापेमारी के दौरान इस टीम ने घंटों तक डॉक्टर के घर का कोना-कोना छान मारा लेकिन उम्मीद के अनुसार डॉक्टर के घर से कुछ नहीं बरामद हुआ। यह टीम निराश होकर ख़ाली हाथ ही निकल गई। उधर,डॉक्टर पहले तनाव में और फिर कुछ बाद निश्चिन्त नजर आये |

दरअसल, उन्हें शक हुआ, कि कही ये शातिर बदमाशों का गैंग तो नहीं, पढ़े-लिखे डॉक्टर को माजरा समझने में देर नहीं लगी। उन्होंने हिम्मत की और पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई, फ़ौरन हरकत में आई पुलिस ने आरोपियों को धरदबोचा,अब ये सभी शातिर जेल की हवा खा रहे हैं। पुलिस ने अलग-अलग राज्यों से छापेमारी कर आयकर अधिकारियों की 12 सदस्यीय टीम को गिरफ्तार किया था |

बताया जाता, कि स्पेशल-26 फिल्म की तर्ज पर ठगों ने इस वारदात को अंजाम दिया था। धमतरी के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत रत्नाबांधा रोड स्थित डॉ. दिलीप राठोर पैथोलॉजिस्ट की शिकायत के बाद उनके घर के बाहर लगे CCTV फुटेज को खांगला गया था. पुलिस को CCTV फुटेज में दो गाड़ियां नजर आई थी. जो कि 8 पासिंग राजनंदगांव की गाड़ियां बताई गई। तलाश में जुटी पुलिस ने फ़ौरन शिकंजा कसा और देखते ही देखते तमाम आरोपी धर लिए गए।
फर्जी ACB अधिकारियों की धमा-चौकड़ी लैपटॉप-मोबाइल लूटे –
इसी साल 25 नवंबर 2025 को ACB अधिकारियों की छापेमार कार्यवाही सामने आई, कुछ देर बाद जंगल में आग की तरह ख़बर फ़ैली की एंटी करप्शन ब्यूरो की कोई छापेमारी नहीं हुई है, बल्कि बदमाशों ने फर्जी ACB अधिकारी बनकर एक घर में घुसकर लूटपाट की घटना को अंजाम दिया है।

पुलिस के अनुसार, 25 नवंबर को तीन युवक सोरम गांव के एक घर में घुसे थे। उन्होंने खुद को एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) का अधिकारी बताया और घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान वे एक लैपटॉप और आठ मोबाइल लेकर फरार हो गए। पीड़ित परिवार ने तत्काल इसकी शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद पुलिस को कुछ संदिग्धों की पहचान हुई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। जाँच के बाद पुलिस ने दो युवकों को गिरफ्तार कर जेल दाखिल कराया,एक अन्य आरोपी अभी भी फरार बताया जाता है। पुलिस ने लूटा गया सारा सामान बरामद किया। यह घटना रुद्री थाना क्षेत्र के सोरम गांव में अंजाम दी गई थी। आरोपियों ने एक लैपटॉप और आठ मोबाइल लूटे थे।

ये IB अफसर भी निकला फर्जी, बुर्का पहनकर ससुर की जासूसी करते धरा गया, लोगों ने कपड़े उतारकर पीटा,VIDEO भी बनाया–
रायपुर में ट्रैफिक पुलिस का एक कर्मी उस समय हैरत में पड़ गया जब चालान कटने से बचने के लिए एक शख्स उलटे सीधे दावे करने लगा। ट्रैफिक रूल्स तोड़ने के बाद इस शख्स को पुलिस कर्मी ने अपनी गिरफ़्त में ले लिए था। लेकिन पुलिस कर्मी उस समय हैरत में पड़ गया जब इस शख्स ने खुद के IB अफसर होने का दावा किया। इसकी पुष्टि के लिए उसने आईडी कार्ड भी दिखाया लेकिन पुलिस कर्मी को उसकी बातचीत से शक हुआ। उसने जैसे ही बाल की खाल उधेड़ी,मामला साफ़ हो गया। पहली ही नजर में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का आई कार्ड फर्जी नजर आया। फिर चालान से बचने के लिए,इस शख्स पैतरे समझने में पुलिस कर्मी को देर नहीं लगी। पूछताछ में उसकी पूरी पोल खुल गई।

पुलिस के मुताबिक आरोपी का नाम विशाल कुमार (29), पिता राजीव कुमार) बताया गया था। वारदात इसी वर्ष 31 अगस्त की है,जब रायपुर के चंदनडीह चौक, नंदनवन जीई रोड पर पुलिस वाहन चेकिंग अभियान चला रही थी। सड़क पर स्कूटी सवार एक युवक हवा से बात करते नजर आया। युवक ने खुद को IB अफसर बताते हुए पुलिस को अपना पता ठिकाना भी बताया था। उसके मुताबिक वह भोपाल के नर्मदापुरम रोड डी-मार्ट के पास निवासरत है, फिलहाल वह रायपुर के टैगोर नगर में शेख सलीम के मकान में अपने रिश्तेदार के घर पर सैर सपाटे के लिए आया है, बातचीत के दौरान यह शख्स पुलिस को रौब दिखाने लगा, लेकिन पुलिस की नजरों से बच नहीं पाया।

आमानाका पुलिस ने उसके खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में अपराध दर्ज किया और गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस की जांच में भोपाल में घटित उसका एक हैरान करने वाला किस्सा भी सामने आया था। दरअसल, यह युवक बुर्का पहनकर अपने होने वाले ससुर की जासूसी करने अपनी मंगेतर के यहां पहुंच गया था। इस दौरान पकड़ने जाने पर युवक की जमकर पिटाई हुई थी, जिसका वीडियो भी सामने आया था।
ACB अफसर बनकर 6 साल तक मौज़ -मस्ती, ड्रग्स और सट्टा कारोबारियों से वसूले लाखों-
रायपुर राजधानी में सरकार की नाक के नीचे करीब 6 साल तक ACB अफसर बनकर एक शख्स वसूली का खेल खेलते रहा। आखिरकार उसकी असलियत भी सामने आ गई। ड्रग्स तस्करी के मामले में एक कारोबारी से वसूली के लिए यह शख्स अचानक क्राइम ब्रांच का अफ़सर बन गया था। जब वो पुलिस के हत्थे चढ़ा तो उसके पास एसीबी का फर्जी आईडी कार्ड बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक आशीष दास उर्फ आशीष सिंह राजपूत उर्फ आशीष शर्मा फर्जी एसीबी अधिकारी बनकर घूम रहा था। इसकी जानकारी होने पर पुरानी बस्ती पुलिस ने उसे हिरासत में लिया है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग के अलग -अलग मामले दर्ज किये गए।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक पुरानीबस्ती इलाके में पीड़ित से एसीबी अधिकारी बनकर वसूली कर रहे इस शख्स को मौके पर ही धरदबोचा गया था। उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 204, 319(2), 336(3), 339, 340 (2) के तहत अपराध दर्ज कर उसकी दो दिन की पुलिस रिमांड भी ली थी। पीड़ितों के मुताबिक स्थानीय TI संग पेट्रोलिंग करने वाले इस शख्स ने भी लोगों को लाखों का चूना लगाया था। कई थानेदारों के अलावा कुछ दो नंबर का धंधा करने वाले लोगों से भी इसके तार जुड़े हुए थे।

जानकारी के मुताबिक इस वसूलीबाज का बखूबी उपयोग पुलिस तंत्र के भीतर ही एजेंट की तर्ज पर किया जा रहा था। कई पुलिस अधिकारी उसे लेकर सरकारी गाड़ी में घूमते फिरते नजर आते थे। यही नहीं उसके द्वारा निर्देशित कार्य को प्राथमिकता के साथ निपटाते थे। ड्रग्स रैकेट में फंसे एक कारोबारी को छुड़ाने के लिए जब यह क्राइम ब्रांच का उपयोग करने लगा तो ईमानदार जाँच अधिकारी को उसकी गतिविधियों पर शक हुआ। उसने आशीष घोष उर्फ आशीष दास उर्फ आशीष शर्मा उर्फ आशीष सिंह राजपूत के कई कारनामों को करीब से जानने और समझने का मौका मिला।

ड्रग्स रैकेट में शामिल नव्या मलिक के पकड़े जाने के बाद कई रसूखदारों का नाम संदेही के तौर पर सामने आया था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक घटना में क्राइम ब्रांच के सिपाही से वसूली करने के दौरान उसकी तीखी झड़प भी हुई थी। सिपाही से उसने पैसों की मांग की थी लेकिन सिपाही ने पैसे देने से मना कर दिया था। इसके बाद उसने इस सिपाही का ट्रांसफर करवा दिया था। यह भी बताया जाता है, कि उसके द्वाराएक सिपाही की पत्नी को भी प्रताडि़त किया था। हालांकि सिपाही ने विभाग के अफसरों के साथ अच्छे सम्बन्धो के चलते मामले की शिकायत नहीं की, लेकिन इस सिपाही के साथियों ने आशीष की जमकर पिटाई कर दी थी।







