CGPSC घोटाले के तार भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपे से जुड़े, राज्य सरकार के अनुरोध पर बढ़ सकता है सीबीआई जांच का दायरा, अदालत में पेश चालान में भविष्य की जांच की ओर इशारा, फ़िलहाल 5 आरोपियों को जेल…..  

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रायपुर: छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन में बैक डोर से कुपात्रों की नियुक्ति के तार तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपे बघेल के सचिवालय से जुड़ते नजर आ रहे है। यही नहीं, PSC चैयरमैन के रूप में टामन सिंह की नियुक्ति के फैसलों और सेवा शर्तों को लेकर भी सवालिया निशान लग रहे है। बताया जा रहा है कि फर्जीवाड़े को असली संरक्षण और टॉनिक पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के हाथों से मिल रहा था। इस गहमा-गहमी के बीच बीजेपी नेता उज्जवल दीपक ने पूर्व मुख्यमंत्री की पुत्री दीप्ति बघेल की सहायक प्राध्यापक पद पर हुए चयन की भी सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने सीएम साय को ज्ञापन भी सौंपा है। इसमें अब पिछले पांच साल में हुई सभी भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग की गई है। 2018 से 2023 तक की सभी परीक्षाओं एवं भर्तियों के मामले को भी सीबीआई को सौंपने की इस ज्ञापन में मांग की गई है। 

कयास लगाया जा रहा है कि मुख्यमंत्री साय इस घोटाले की उच्च स्तरीय जांच में कुछ नए बिंदुओं को शामिल करने के लिए सीबीआई से अनुरोध कर सकते है। उज्जवल ने आरोप लगाया कि आहर्ता नियमों में बदलाव कर तत्कालीन मुख्यमंत्री की पुत्री दीप्ति बघेल की नियुक्ति की गई थी। उनके मुताबिक पिछले 4 साल तक इस परीक्षा के नतीजे वेबसाइट पर नहीं दिख रहे थे।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर पद के दुरुपयोग और CGPSC में फर्जीवाड़ा करने का गंभीर आरोप लगाते हुए जांच का दायरा बढ़ाने की मांग की है। उज्जवल ने सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक, भ्रष्टाचार से चयनित अधिकारियों का नार्को परीक्षण कराने, पीएससी 2021-2022 के परिणाम रद्द करने के साथ ही सभी नियुक्तियों को रद्द करने की मांग की है।  

उधर सीजीपीएससी घोटाले में पेश एक चालान में तत्कालीन चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी पर सीबीआई ने कई गंभीर आरोप लगाए है। इसमें अपात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति देने के तौर-तरीके जांच के दायरे में बताये जाते है।सीबीआई ने कोर्ट में लगभग 400 पेज का चालान पेश कर पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक को मुख्य आरोपी बनाया है। सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में लिखा है कि पूर्व चेयरमैन और तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक ने अपात्र उम्मीदवारों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाते हुए उन्हें नियुक्ति दी है। 

CGPSC घोटाले में अब तक गिरफ्तार सभी 7 आरोपियों को सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया था। इनमे 19 नवंबर को सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन टामन सिंह और बजरंग इस्पात के पूर्व डायरेक्टर श्रवण गोयल की गिरफ्तारी की गई थी। इनके अलावा अन्य आरोपी, टामन सिंह सोनवानी के भतीजे नितेश सोनवानी व साहिल सोनवानी, उद्योगपति श्रवण गोयल के बेटे शशांक गोयल व भूमिका कटियार, तत्कालीन डिप्टी एग्जाम कंट्रोलर ललित गणवीर के आचार खिलाफ चालान पेश कर सीबीआई ने कई गंभीर आरोप लगाए है। 

सभी को इस घोटाले में संयुक्त रूप से आरोपी बनाया गया है। चालान में स्पष्ट आरोप लगाया गया है कि अपात्र अभ्यर्थियों का गलत तरीके से चयन किया गया है, लाभ पहुंचा कर गलत तरीके से नियुक्ति दी गई है। इसके लिए संयुक्त रूप से पैसों का लेनदेन और पेपर लीक किया गया है। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में 59वें दिन चालान पेश कर,जांच की नई राह भी साफ़ कर दी है।