दिल्ली/रायपुर: महादेव ऐप सट्टा घोटाले से कांग्रेस के दामन पर लगते दाग देख कर पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ता सकते में है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब पार्टी प्रभारी करप्शन बघेल का अजीबों गरीब बयान कांग्रेस के ही गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसके पूर्व 2200 करोड़ के शराब घोटाले में पूर्व आबकारी मंत्री लखमा का अजीबों गरीब बयान सामने आया था। लखमा ने खुद के अनपढ़ होने का दावा कर घोटालों के लिए अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया था। अब खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बघेल भी कानूनी दांवपेचों का ज्ञान पेल रहे है। मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर 5 साल तक काबिज रहने के बाद भी बघेल के क़ानूनी ज्ञान में वृद्धि ना होना चिंताजनक बताया जा रहा है।

दरअसल, बघेल ने दावा किया है कि केंद्र सरकार के पास गैम्बलिंग का कोई कानून नहीं है, उनका यह भी दावा है कि ऑनलाइन गैम्बलिंग का भी कानून नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री सीबीआई के लपेटे में आने के बाद एजेंसियों से महादेव ऐप सट्टा को लेकर सवाल कर रहे है कि ये कानूनी है या गैर कानूनी ? अगर कानूनी है तो प्रोटेक्शन मनी की कोई बात नहीं है और अगर गैर कानूनी है तो ऐप अब तक चल क्यों रहा है। बघेल के इस अजीबों गरीब बयान को कांग्रेसी हलकों में ही हवा-हवाई दावा करार दिया जा रहा है। दरअसल, महादेव ऐप सट्टा घोटाला उजागर होते ही इसे रफा-दफा करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल ने सरकारी प्रयास भी शुरू कर दिए थे। इसके तहत दुर्ग एवं भिलाई में मुनादी करके चिन्हित सटोरियों को तुरंत स्थानीय थाने में उपस्थित करा कर मुचलके पर ही जमानत दे दी गई थी।

स्थानीय थानों में जुआ एवं सट्टा एक्ट के तहत महादेव ऐप के कर्मी-पैनल ऑपरेटर एवं अन्य सटोरियों को बगैर पूछताछ कागजी कार्यवाही कर थाने से ही छोड़ दिया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री के सट्टे के खिलाफ कोई कानून ना होने की दलील लोगों के गले नहीं उतर रही है। उन्होंने कहा, एफआईआर में सबसे ऊपर रवि उप्पल का नाम है। छठवें नंबर पर भूपेश बघेल, आठवें पर सौरभ चंद्राकर।
जिनके नाम से सब संचालन हो रहा शुभम सोनी, उसका नाम ही नहीं है जो खुद को मलिक बताता है, लेकिन मुझे लेकर जो बयान दिया, उसके आधार पर मुझे आरोपी बनाया गया है। मोगेम्बो खुश हुआ कि तर्ज पर ये काम कर रहे। गिरफ्तार करना है तो कर ले, गिरफ्तार होने का मुझे डर नहीं है। न पहले भागे थे, न अब भाग रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा दावा किया जा रहा है कि सेंट्रल एजेंसियां उनकी राजनीतिक हत्या करना चाहती हैं, शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना चाहती हैं।

महादेव सट्टा ऐप मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सीबीआई समेत केंद्रीय जांच एजेंसियों और भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए है। बघेल ने कहा कि सीडी कांड में सीबीआई की 7 साल के जांच के बाद भी कोर्ट ने चार्जशीट दायर करने के लायक मामला नहीं समझा और उन्हें आरोपमुक्त कर दिया। उनका दावा है कि सेक्स सीडी कांड में उनके छूटने से बौखलाकर ये कार्रवाई की जा रही है।
महादेव ऐप सट्टा घोटाले की विवेचना को आड़े हाथों लेते हुए बघेल ने दावा किया कि एफआईआर 18 दिसंबर 2024 को हुई, लेकिन 1 अप्रैल 2025 को सार्वजनिक हुआ है। एफआईआर ईडी से लेकर सीबीआई तक इधर उधर हो रही है। उन्होंने कहा, हम छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय मुद्दों पर लगातार बात कर रहे हैं, इसलिए ये कार्रवाई कर रहे हैं। जनता का ध्यान भटकाने के लिए ये काम किया जाता है।

उधर महादेव ऐप सट्टे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री की सफाई पर बीजेपी ने चुटकी ली है। बीजेपी नेता गौरीशंकर श्रीवास ने पूर्व मुख्यमंत्री बघेल की सेहत को लेकर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि सीबीआई के खौफ के चलते बघेल के मानसिक संतुलन में गिरावट आई है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद महादेव ऐप समेत धड़ल्ले से जारी सट्टा कारोबार पर विराम लगा है। गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि कांग्रेस राज में आम जनता ने बड़े करीब से पूर्व मुख्यमंत्री और उनके करीबी पुलिस अधिकारियों को महादेव ऐप सट्टा को संरक्षण देते देखा है। उनके मुताबिक एजेंसियों की वैधानिक कार्यवाही को प्रभावित करने के लिए बघेल राजनैतिक दबाव बनाने में जुटे है।

पूर्व मुख्यमंत्री के एजेंसियों पर हमले को राजनैतिक खुद के बचाव में अंतिम अस्त्र बताया जा रहा है। राजनैतिक गलियारों में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के राजनैतिक भविष्य को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। उन्हें पंजाब प्रभारी के पद से हटाए जाने की मांग भी जोरो पर बताई जा रही है। सीबीआई और ED के छापों के बाद बघेल कुनबे में इन दिनों गहमा-गहमी देखी जा रही है।

बघेल परिवार के कई सदस्य और कारोबारी मित्र नामी-बेनामी संपत्ति को लेकर चार्टर्ड एकाउंटेंट के दफ्तरों में नजर आ रहे है। बताया जाता है कि कई परिजनों को बीते 5 साल में कमाई गई आकूत दौलत को ठिकाने लगाने के लिए क़ानूनी दांवपेचों का सहारा लेना पड़ रहा है। उनकी नंबर-1 और नंबर-2 की रकम का लेखा-जोखा व लेनदेन का ब्यौरा सराफा कारोबारियों के बीच भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

इधर पूर्व मुख्यमंत्री समर्थक कई कार्यकर्ता तस्दीक कर रहे है कि भूपे का ज्यादातर वक़्त पार्टी के काम काज के बजाय घोटाले के संदेहियों का मुँह बंद करने में व्यतीत हो रहा है। बताते है कि बघेल को उन आईपीएस अधिकारियों से खतरा महसूस होने लगा है, जिनके साथ उनके लेनदेन के संपर्क स्थापित थे। कुछ समर्थकों के मुताबिक सुबह होते ही महोदय कोर्ट-कचहरी और वकीलों के चक्कर में पड़ गए है। जानकारी के मुताबिक बघेल के अजीबों गरीब व्यवहार और बयानों से सिर्फ बीजेपी ही नहीं खुद कांग्रेसी भी हैरान परेशान बताये जा रहे है।

उनका दावा है कि ऐसे ही बयानों के चलते बीजेपी को बैठे-बिठाए कांग्रेस के खिलाफ मुद्दे मिल रहे है। उनकी माने तो सीबीआई और ED के पास उपलब्ध सबूतों की भनक लगने के बाद बघेल अपने कुनबे को लेकर पसोपेश में है।फ़िलहाल, पूर्व मुख्यमंत्री के साथ दागी आईपीएस अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारा गरमाया हुआ है।