
पटना/दिल्ली : बीजेपी शासित छत्तीसगढ़ में ही नौकरशाहों की बल्ले-बल्ले नहीं है| बल्कि,बिहार में भी नौकरशाही का नया रंग नज़र आ रहा है| चार्टर फ्लाइट में सवार एक आईएएस अफ़सर और उनके परिवार की प्लेजर ट्रिप ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की रातों की नींद उड़ा दी है| इस मामले को लेकर विधान सभा में हंगामा मचा है,जवाब देने में सरकार का पसीना छूट रहा है| मामला सेवा के बदले मेवा से जुड़ा बताया जाता है |

राजनीति के जानकारों के मुताबिक,अभी तक दिल्ली में छत्तीसगढ़ की नौकरशाही के “फील गुड” की चर्चा होती थी,लेकिन अब बिहार के अफसरों के भी चर्चे लोगों की जुबान पर है| दरअसल,राजधानी पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हाल ही में एक लग्जरी चार्टर विमान की लैंडिंग ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब विमान का दरवाजा खुला तो किसी बड़े उद्योगपति या नेता की जगह बिहार में तैनात एक प्रभावशील आईएएस अधिकारी अपने परिवार के साथ प्लेन से बाहर निकलते नजर आए | उनके सैर सपाटे की ख़बर लगते ही एयरपोर्ट स्टाफ से लेकर मौके पर मौजूद सैंकड़ों यात्रियों को हैरान हुई। इस दौरान एयरपोर्ट में कई नेता भी मौजूद थे,जो कि दिल्ली जाने के लिए नियमित फ्लाइट का इंतज़ार कर रहे थे |

बताया जा रहा है, कि यह चार्टर विमान Dassault Aviation का Dassault Falcon 2000 था, जिसे बेहद आलीशान बिजनेस जेट माना जाता है। जानकारी के मुताबिक, यह विमान दिल्ली से पटना आया था और अधिकारी अपने परिवार के साथ उसमें सवार थे।
विधानसभा में उठा मुद्दा इस मामले को गुरुवार को बिहार विधानसभा में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक राहुल शर्मा ने उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि संबंधित अधिकारी को चार्टर विमान से यात्रा की अनुमति किसने दी और इसका खर्च किस स्रोत से वहन किया गया। हालांकि, सदन में इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, दिल्ली से पटना और वापसी की इस तरह की चार्टर उड़ान का खर्च लगभग 20 लाख रुपये तक हो सकता है। जबकि नियमित वाणिज्यिक उड़ानों में यही यात्रा अपेक्षाकृत कम खर्च में पूरी हो जाती है। ऐसे में इस निजी चार्टर यात्रा को लेकर राजनीतिक दलों ने पारदर्शिता की मांग तेज कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित अधिकारी द्वारा घोषित संपत्ति के विवरण में सीमित चल-अचल संपत्ति का उल्लेख है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे में इतनी महंगी यात्रा का खर्च कैसे वहन किया गया, इस पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। फिलहाल, सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन विपक्ष के तेवरों को देखते हुए आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।





