रायपुर: छत्तीसगढ़ में पीएम के दौरे से पूर्व कांग्रेस के सिर पर उनका भूत सवार हो गया है। सीबीआई के खिलाफ आयोजित धरना- प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के समर्थकों ने पीएम और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जानकारी सामने आई है कि केंद्र सरकार के पुतला दहन को चंद जिलों में ही आंशिक कामयाबी मिल पाई।

रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, अंबिकापुर, महासमुंद, धमतरी, राजनांदगांव समेत दर्जनों जिलों में मुट्टीभर बघेल समर्थक ही धरने में शामिल रहे। आम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने ऐसे धरना-प्रदर्शनों से दूरियां बनाई रखी। कई महत्वपूर्ण कांग्रेसी नेता और विधायक भी प्रदर्शन से दूर रहे। हालांकि, कैमरों और छायाकारों के सामने बघेल समर्थकों ने बीजेपी और केंद्र के खिलाफ नारेबाजी करने में कोई कसर बाकि नहीं छोड़ी।

बताते है कि अब सीबीआई मुख्यालय में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल का इंतज़ार शुरू हो गया है, जल्द ही उन्हें सीबीआई का न्योता मिलने वाला है। छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई सौगातों को लेकर आ रहे है। बिलासपुर में 30 मार्च को विकास योजनाओं के शिलान्यास के मौके पर भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके अभियान के भी जिक्र छिड़ने के आसार बढ़ गए है।

दरअसल, राज्य में आईटी-ईडी की सक्रियता के बाद सीबीआई की दबिश से कई प्रभावशील घोटालेबाजों की नींद उड़ी बताई जाती है। इस फेहरिस्त में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल गिरोह सबसे अव्वल नंबर पर बताया जाता है। ईडी की हालिया छापेमारी के बाद सीबीआई की दबिश से बघेल गिरोह में हड़कंप मच गया है। कई काले-चिट्ठे बाहर आने का अंदेशा जाहिर किया जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री और उनके पुत्र चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को लेकर एजेंसियों के पास ठोस सबूत मौजूद है। लिहाजा, बाप-बेटे की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

उधर महादेव सट्टा ऐप घोटाले में सीबीआई की छापेमारी पर पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने सवाल उठाते हुए दावा किया है कि ‘क्या भाजपा रच रही है षड्यंत्र?’ मोदी आ रहे है, इसलिए भाषण की स्क्रिप्ट तैयार की जा रही है ? बघेल ने दावा किया कि महादेव सट्टा ऐप के बारे में देश में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही इस पर 74 एफआईआर दर्ज हुईं, 200 से अधिक गिरफ्तारियां हुईं और 2000 से अधिक बैंक खाते सीज किए गए।

हालांकि मुख्यमंत्री के हवा-हवाई दावों पर पत्रकारों की ओर से कोई प्रति-प्रश्न नहीं होने के चलते महत्वपूर्ण हवाला कारोबारियों को अपराधों से बचाने की पूर्व मुख्यमंत्री की मुहीम को लेकर कोई सवाल-जवाब नहीं किये जाने से बघेल के बोल यही नहीं थमे। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ईडी ने झूठी खबर फैलाई कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल को दुबई में गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन बाद में ये दोनों वहां शिव कथा की जजमानी करते पाए गए थे।

पूर्व मुख्यमंत्री ने क़ानूनी सवाल करते हुए दावा किया कि सीबीआई की कार्रवाई में उनके रायपुर स्थित शासकीय आवास में प्रवेश किया गया, लेकिन उन्हें इसकी कोई सूचना नहीं दी गई। इसी तरह भिलाई स्थित निवास पर भी बिना सूचना के सीबीआई अधिकारियों का आना पूरी तरह अनाधिकृत है। सीबीआई की छापेमारी की कामयाबी रंग दिखाते नजर आ रही है।

छत्तीसगढ़ जैसे विकासशील प्रदेश में 5 साल के भीतर अरबों के घोटालों से विकास की गति धीमी हो गई है। इसे पटरी पर लाना राज्य की विष्णुदेव साय सरकार के सामने बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति सुनिश्चित होने से अपेक्षित परिणामों का सामने आना भी शुरू हो गया है। दिल्ली,मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में इन्वेस्टर मीट फलदायी साबित हुई है।

कई बड़ी कंपनियों ने प्रदेश में भरपूर निवेश में रूचि दिखाई है। साल-डेढ़ में रोजगार के नए अवसर भी नजर आ रहे है। जबकि बीते 5 वर्षों में तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल के नेतृत्व में प्रदेश की छवि कांग्रेसी नेताओं के लिए ‘एटीएम’ के रूप में बन गई थी। छत्तीसगढ़ को राजनीति का चारागाह बना देने से दर्जनों घोटाले सामने आये है। प्रदेश से लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियां कार्यवाही में जुटी है।

राजनीति चमकाने की आड़ में सरकारी तिजोरी पर दिन-दहाड़े सेंधमारी का ऐसा दौर ना तो पहले मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजित जोगी के कार्यकाल में देखा गया और ना ही पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के 15 वर्षों के राजनैतिक सफर में कांग्रेस कोई ठोस आरोप तत्कालीन बीजेपी सरकार पर लगा पाई। बघेल पूरे 5 वर्ष तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहे, लेकिन तत्कालीन डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ चुटकी भर सबूत भी इकठ्ठा नहीं कर पाए।

यही नहीं इन वर्षों में रमन सिंह मंत्रिमंडल के सदस्यों से लेकर बीजेपी के किसी भी विधायकों तक को आरोपित नहीं किया जा सका। साफ़ है कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने सत्ता के लिए झूठ बोलकर जनता को गुमराह किया था। मतदाताओं से लोकलुभावन वादे कर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को चारागाह बना दिया था। प्रदेश में घोटालों की झड़ी लगने के बाद गरीब जनता की ‘सरकारी तिजोरी’ नेताओं के लिए ‘एटीएम’ बन गई थी। भूपे सरकार का हाल देखकर कई कांग्रेसी नेता खुद को ठगा महसूस कर रहे थे।

लेकिन कांग्रेस की सत्ता से रवानगी से पूर्व उजागर हो रहे काले कारनामों का सिलसिला अब तक नहीं थम पाया है।कई केंद्रीय एजेंसियां प्रदेश में डेरा डाले हुए है, घोटालेबाजों को हवालात की सैर करनी पड़ रहे है। घोटालों की राजनैतिक तपिश की आंच से कांग्रेस आलाकमान भी अछूता नहीं बताया जा रहा है। फ़िलहाल, जनता की निगाहे सीबीआई के अगले कदम पर टिकी है।