
नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिकी युद्ध के मद्देनजर प्रभावित हो रहे देशों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर भारत पर टिकी हुई है,अब भारत भी इस युद्ध की मार झेल रहा है|हालाँकि,हमारे दश में पेनिक स्थिति नहीं है,लेकिन देश में विकसित हो रहे नए संकट के बीच भारत पर इस युद्ध के आर्थिक और सुरक्षा प्रभावों को लेकर बढ़ती चिंताओं से केंद्र सरकार भी सक्रिय हो गई है | इसके लिए आज बुधवार शाम 5 बजे संसद परिसर में सर्वदलीय बैठकआयोजित की गई है | इसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे | बैठक में पीएम की मौजूदगी भी महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है|

जानकारी के मुताबिक,विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा पार्टी नेताओं को ताज़ा घटनाक्रम और भारत की कूटनीतिक स्थिति की जानकारी दिए जाने की उम्मीद जाहिर की जा रही है।यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद के दोनों सदनों में दिए गए बयानों के बाद की जा रही है, जिसमें उन्होंने स्थिति को “अभूतपूर्व संकट” बताया था, जिसके लंबे समय तक प्रभाव पड़ सकते हैं।रूस और इजराइल से भारत सतत संपर्क में है,जबकि अमेरिका और ईरान के साथ भी केंद्र सरकार अपनी विदेश नीति का समुचित पालन कर रही है | पश्चिम एशिया का यह संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है और इससे प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग बाधित हो रहा हैं | खासकर होर्मुज जलडमरू मध्य के जरिए आयात होने वाली सामग्री की आपूर्ति लगातार ठप्प पड़ रही है |इन तनावों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है | सप्लाई चेन प्रभावित होने से देश में महंगाई बढ़ने की आशंका जाहिर की जा रही है | बताया जाता है,कि ताज़ा हालात से विपक्ष को वाकिफ़ करने के लिए केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक का एलान किया है |




