
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का रक्षा उद्योग इतना मजबूत होना चाहिए कि देश की जरूरतों की पूर्ति के साथ-साथ सैन्य उपकरणों का निर्यात भी बढ़े। उन्होंने कहा कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।
आईएफएस प्रशिक्षुओं से मुलाकात में स्पष्ट संदेश
रक्षा मंत्री ने रक्षा मंत्रालय के साउथ ब्लॉक स्थित कार्यालय में भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य स्वदेशी रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
आयातक से निर्यातक बनने की दिशा
रक्षा मंत्री ने कहा कि एक समय भारत दुनिया के बड़े रक्षा आयातकों में शामिल था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है। नई तकनीकों को अपनाने, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी और नीति सुधारों के कारण भारत जमीन, समुद्र, आकाश और अंतरिक्ष—सभी क्षेत्रों में अपने प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है।
रक्षा कूटनीति में राजनयिकों की अहम भूमिका
उन्होंने कहा कि विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिक केवल राजनीतिक और आर्थिक संबंध ही नहीं संभालते, बल्कि रक्षा सहयोग और निर्यात को भी आगे बढ़ाते हैं। किसी भी रक्षा समझौते या सैन्य उपकरण निर्यात में दूतावासों और राजनयिकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
भारत की छवि मजबूत करने का आह्वान
राजनाथ सिंह ने अधिकारियों से कहा कि वे विदेशों में 1.4 अरब भारतीयों की उम्मीदों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका आचरण और निर्णय भारत की वैश्विक छवि को प्रभावित करते हैं। उन्होंने ईमानदारी, निष्ठा और पारदर्शिता को सबसे बड़ी ताकत बताया।
रक्षा ढांचे की व्यापक जानकारी
मुलाकात से पहले प्रशिक्षु अधिकारियों को रक्षा कूटनीति, रक्षा बजट, तीनों सेनाओं के एकीकरण और रक्षा खरीद प्रक्रिया की जानकारी दी गई। आईएफएस 2025 बैच में कुल 55 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 53 भारत और 2 भूटान से हैं।


