New Delhi: Union Minister Ashwini Vaishnaw speaks in the Lok Sabha during the Budget Session of Parliament in New Delhi on Wednesday, March 11, 2026. (Photo: IANS/Video Grab/Sansad TV)
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि भारतीय रेल अपने पूरे नेटवर्क में सुरक्षा और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निरीक्षण सिस्टम, ड्रोन निगरानी और कई नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। लोकसभा में लिखित जवाब में रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में तकनीकी सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और कई नई प्रणालियों को शुरू किया गया है या पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उनका परीक्षण किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि रेलवे में मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम (एमवीआईएस), व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (डब्ल्यूआईएलडी), ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऑफ रोलिंग स्टॉक (ओएमआरएस), इंटीग्रेटेड ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम्स (आईटीएमएस) और ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) जैसे सिस्टम लगाए जा रहे हैं।
मंत्री के अनुसार, एमवीआईएस एक एआई और मशीन लर्निंग पर आधारित सिस्टम है, जो चलती ट्रेन में लटके हुए, ढीले या गायब हिस्सों का पता लगाने में मदद करता है। इस सिस्टम की तीन यूनिट नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में, दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में और एक साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाई गई हैं। रेलवे ने डीएफसीसीआईएल के साथ समझौता भी किया है, जिसके तहत मालगाड़ियों के लिए नेटवर्क में चार और एमवीआईएस यूनिट लगाई जाएंगी।
मंत्री ने बताया कि रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) भी उद्योगों के साथ मिलकर इस तकनीक को और विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर सिस्टम ट्रैक पर पहियों के असर को मापकर खराब पहियों की पहचान करता है और ऐसे 24 सिस्टम पूरे रेलवे नेटवर्क में लगाए जा चुके हैं।
वहीं ओएमआरएस सिस्टम ट्रेन के बेयरिंग और पहियों की स्थिति पर नजर रखता है और अब तक 25 ओएमआरएस सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जिनमें एक सिरपुर कागजनगर में सिकंदराबाद डिवीजन के साउथ सेंट्रल रेलवे के तहत लगाया गया है। रेल पटरियों की जांच के लिए आईटीएमएस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो मशीन लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग की मदद से रेल, स्लीपर और फास्टनिंग में खराबी का पता लगाता है।
इसके अलावा, रायपुर डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ड्रोन के जरिए ओवरहेड उपकरणों की थर्मल इमेजिंग से निगरानी शुरू की गई है। आरडीएसओ त्रि-नेत्र नाम का एक सिस्टम भी विकसित कर रहा है, जिसमें ऑप्टिकल कैमरा, इंफ्रारेड कैमरा और रडार या लिडार जैसे उपकरण होंगे, ताकि कोहरे या खराब मौसम में लोको पायलट को ट्रेन चलाने में मदद मिल सके।
मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने 26 फरवरी को नई रेल टेक पॉलिसी लागू की है, जिससे रेलवे में नई तकनीकों और नवाचार को तेजी से अपनाया जा सके।







