
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि के पावन नौ दिनों का समापन महानवमी की पूजा और कलश विसर्जन के साथ होने जा रहा है। मां सिद्धिदात्री की उपासना और कन्या पूजन के बाद भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार कलश का विसर्जन करते हैं। वर्ष 2026 में तिथियों के फेरबदल के कारण कलश विसर्जन को लेकर लोगों में संशय है कि यह 27 मार्च को होगा या 28 मार्च को। आइए जानते हैं शास्त्रों के अनुसार सही समय और मुहूर्त।
27 या 28 मार्च कब है कलश विसर्जन?
पंचांग के अनुसार, इस वर्ष नवमी और दशमी तिथि का संयोग कुछ इस प्रकार है कि कलश विसर्जन के लिए दोनों ही दिन उपयुक्त माने जा रहे हैं, लेकिन व्रत की अवधि के अनुसार समय अलग-अलग होगा
27 मार्च को है महानवमी
नवमी तिथि सुबह 10:09 बजे तक रहेगी, जिसके बाद दशमी तिथि लग जाएगी। जो लोग नवमी को ही विसर्जन करना चाहते हैं, वे सुबह 10:09 बजे से दोपहर 1:00 बजे के बीच विसर्जन कर सकते हैं।
28 मार्च को दशमी
जिन भक्तों ने पूरे 9 दिनों का उपवास रखा है, उनके लिए 28 मार्च की सुबह विसर्जन करना श्रेष्ठ होगा। इस दिन दशमी तिथि सुबह 08:48 बजे तक रहेगी। एकादशी लगने से पहले ही विसर्जन कर लेना शास्त्र सम्मत है।
कलश विसर्जन की शास्त्रोक्त विधि
कलश विसर्जन मात्र एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि देवी की विदाई का भावपूर्ण क्षण है। इसकी सही विधि इस प्रकार है –
- सबसे पहले कलश के ऊपर रखे नारियल को सम्मान सहित उठाएं। इसके बाद कलश के पास बोई गई ‘जयंती’ (जौ) को थोड़ा सा काट लें।
- कलश में रखे जल में आम के पत्तों को डुबोकर पूरे घर में छिड़कें। मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और सुख-शांति आती है।
- यदि मिट्टी का कलश है, तो उसे पवित्र जलाशय में विसर्जित करें। धातु के कलश की स्थिति में केवल उसमें रखी सामग्री (अक्षत, सिक्का, सुपारी) को विसर्जित करें और कलश को घर के मंदिर में शुद्ध करके रखें।
- कलश विसर्जन करने के बाद माता का ध्यान करें और उनसे सुख-समृद्धि की कामना करें।





