
रायपुर/दिल्ली : छत्तीसगढ़ विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल से लेकर राजनैतिक गलियारों में उपमुख्यमंत्री मंत्री विजय शर्मा के इस्तीफ़े की मांग जोरों पर है,जिस तर्ज़ पर मंत्री जी की रियलिटी से परे “रील” सुर्खियां बटोर रही है,उससे लगने लगा है,कि समय रहते मंत्री जी की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं आया तो,राज्य में बीजेपी का डूबना तय है| मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार पर मंत्री शर्मा इतने भारी पड़े है,कि गांव-गांव में उनके इस्तीफ़े की मांग के स्वर गूंज रहे है| कई लोगों की दलील है,कि उपमुख्यमंत्री की बेरूख़ी से छत्तीसगढ़ जैसा शांत प्रदेश “तालिबान” की तर्ज़ पर नशे के सौदागरों की भेंट चढ़ गया है |मंत्री मस्त-जनता पस्त जैसे ज़ुमले बीजेपी सरकार पर अचानक तेज़ हो गए है,इसका श्रेय भी उपमुख्यमंत्री शर्मा को दिया जा रहा है |

विपक्षी दलों के अलावा बीजेपी के भीतरखानों में भी मंत्री शर्मा को मंत्रिमंडल से हटाएं जाने की मांग शुरू हो गई है| उनसे जुड़े विभिन्न विभागों को लेकर विधानसभा के सत्र में भी हंगामा थामे नहीं थम रहा है,कही PMGSY में टेंडर घोटालों के आरोपियों को मंत्री के संरक्षण का दावा किया जा रहा है,तो किसी मोर्चे पर गृह विभाग की ढ़ीली कमान के चलते बीजेपी के खिलाफ एक से बढ़कर एक मुद्दे, विपक्ष के हाथों में लग रहे है,गंभीर प्रकरणों में मंत्री शर्मा के “बोल वचन” राज्य की बीजेपी सरकार को ही मुंह चिढ़ा रहे है | मंत्री जी रील और रियलिटी के फेर में बुरी तरह से उलझे नज़र आ रहे है |

बताया जाता है,कि मंत्री शर्मा की कार्यशैली को लेकर आलाकमान तक शिकायतों का पुलिंदा पहुंचा है,इस पर माथापच्ची जारी बताई जाती है| सूत्र बताते है,कि पार्टी आलाकमान मंत्री जी की माली स्थिति से लेकर कार्यप्रणाली पर गौर फरमा रहा है | उसके मुताबिक,कामकाज के मामले में मंत्री शर्मा पर गाज़ गिरने के आसार बढ़ गए है| “REEL” में लाइमलाइट और “REAL” हालत टाइट जैसे हालातों से इन दिनों प्रदेश के उपमुख्यमंत्री को गुजरना पड़ रहा है| दरअसल, राज्य की जनता उनकी कार्यप्रणाली देख कर ना केवल हैरत में बल्कि बीजेपी को कोसने में भी पीछे नहीं है| उपमुख्यमंत्री मंत्री विजय शर्मा को मुख्यमंत्री साय सरकार में गृह एवं जेल, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे महत्त्वपूर्ण कमान सौंपी गई है| लेकिन,साल भर के भीतर में ही इन महकमों का कामकाज पटरी से उतर गया है ,इन विभागों में पारदर्शिता और कायदे-कानून हासिए पर है| राजनीति के जानकारों के मुताबिक, अब तक के कार्यकाल में मंत्री शर्मा ने बीजेपी की जितनी फ़जीहत कराई है,उसकी शेष बचे, मात्र ढाई साल के कार्यकाल में भरपाई करना मुश्किल है |

छत्तीसगढ़ में मंत्री विजय शर्मा के प्रभार वाले लगभग सभी विभागों में कोहराम मचा है,उनके निजी हो या सरकारी दफ्तर, मंत्री जी के “OFFICE OF PROFIT” के नाम से जाने-पहचाने जाने लगे है| मंत्री जी का रिपोर्ट कार्ड नहीं,बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से प्राप्त विशेष संरक्षण की चर्चाएं आम हो चली है,चर्चाओं के बीच मंत्री विजय शर्मा के कामकाज से ज़्यादा किस्से उनकी “रील” और “रियलिटी” के फेर में फंसे होने की हो रही है| चर्चा आम है,कि मंत्री जी मस्त है,लेकिन उनके विभागों में कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के चलते आम जनता,जनप्रतिनिधियों और नियमानुसार कार्य करने वाले ठेकेदारों के हौसले पस्त है| सवाल यह भी उठ रहा है,कि यदि मंत्री जी ईमानदार है,तो उनके प्रभार वाले विभागों में बड़े पैमाने पर घपलेबाज़ी क्यों ? यहां तो कार्य नियमानुसार ही नहीं अपितु,जनहित के मद्देनजर सुनिश्चित और मिसाल कायम करने वाले होने चाहिए ?

हालाँकि,ऐसी भी कोई बात दूर -दूर तक नहीं है,लिहाज़ा मंत्री जी के दांत “दिखाने” के कुछ और “खाने” के कुछ और बताए जाते है,सिर्फ मंत्री जी ही नहीं,बल्कि उनकी तीमारदारी में जुटे स्टाफ़ के चलनशील सदस्यों और उनके कुनबे पर लक्ष्मी जी की कृपा “छप्पर फाड़कर” हो रही है,ऐसे ख़ास मामलो में मंत्री जी का “OFFICE OF PROFIT” लगातार,“24×7” कार्यरत बताया जाता है | मंत्री जी के ज्यादातर विभागों में सरकारी तिजोरी पर बेलगाम तौर-तरीको से मारी जा रही चोट राज्य में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार और बीजेपी पर भारी पड़ रही है | मंत्री जी,अपनी धुन में रमे है,लेकिन उनकी रील और रियलिटी से जुड़ी कई दास्तान इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल है | मंत्री शर्मा के प्रभार वाले विभागों की “रील” नहीं बल्कि, रियलिटी चेक करने से पूर्व उनकी माली स्थिति पर भी गौर फरमाना बेहद जरुरी है |

छत्तीसगढ़ में इस वित्तीय वर्ष के समापन की बेला में अपनी कमाई का सालाना ब्यौरा पेश कर राज्य में तमाम बड़े नौकरशाहों के बीच ख़ुद को “गरीब” और “अति गरीब” साबित करने की होड़ मची है उनके संघर्षों और क़वायतों से मिलती-जुलती दास्तान मंत्री विजय शर्मा की भी बताई जाती है| एक जानकारी के मुताबिक,उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा की डिक्लेयर संपत्ति का आंकड़ा कुछ इस प्रकार है,वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाख़िल हलफनामे में लगभग ₹1.99 करोड़ (1 Crore+ ) की कुल संपत्ति छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा (कवर्धा) ने घोषित की थी, इसमें देनदारियां (कर्ज) लगभग ₹12.83 लाख दर्ज बताई जाती हैं। यह जानकारी उनके चुनावी शपथ पत्र पर आधारित है। लेकिन इन ढाई वर्षों के अंतराल के बाद मंत्री जी की माली हालत के ग्राफ़ ने आज आसमान में कितनी ऊंचाई तय की है,इसका आधिकारिक ब्यौरा अभी तक “रहस्यमय” बना हुआ है,ये हैरान करने वाला भी बताया जाता है ? इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री की कार्यप्रणाली सुर्ख़ियों में है |

राज्य के कई इलाको में अफीम की खेती और उसकी लहलहाती फसले सुशासन के दौर में “बंपर क्राप” का पैगाम दे रही है,वही पुलिस तंत्र का “निकम्मापन” भी आम जनता के बीच उजागर हुआ है | शासन-प्रशासन की नाक के नीचे अवैध रूप से उपजाई जा रही अफीम की खेती के मामलों की झड़ी लग गई है | पहले दुर्ग और अब बलरामपुर में भी अफीम की फसले जनता को हैरानी में डाल रही है,अन्य जिलों का हाल क्या है? इस ओर ना तो मंत्री शर्मा के दिशा-निर्देश सामने आये है और ना ही इन मामलों को लेकर पुलिस अधिकारियों पर कोई जिम्मेदारी तय करने संबंधी कोई तथ्य भी सामने लाया गया है

यही नहीं,उनके अजीबो-गरीब भौकाल,नेतृत्व और कार्यशैली के चलते राज्य के कई इलाकों में ना केवल कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हुई,बल्कि अपराधियों और अपराधों का बोल-बाला भी सुनाई देने लगा है | उनके प्रभार वाले विभागों में कार्यरत कई अधिकारी अब मंत्री जी की कार्यशैली पर चुटकी लेने से भी नहीं चूक रहे है,उनकी दलील है,कि मंत्री जी रील के फेर में जिस तर्ज़ पर रियलिटी से मुंह फेरते नज़र आए आ रहे है,उनके ऐसे तेवरों से आने वाले विधान सभा चुनाव 2028 में बीजेपी का सूपड़ा अभी से लगभग साफ़ नजर आने लगा है|आम जनता के इसी फीडबैक के चलते बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता उपमुख्यमंत्री की कार्यशैली को मुख्यमंत्री साय सरकार के लिए घातक बता रहे है |

गृह विभाग के अलावा जेल विभाग में भी अव्यवस्थाओं को लेकर मंत्री शर्मा का रुख़ और मकसद लोगों की जुबान पर है, इन दोनों ही विभागों में जंगल राज से इंकार नहीं किया जा है| जबकि,PMGSY और पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे महत्त्वपूर्ण विभागों की तुलना कांग्रेस के लुटेरे पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के कार्यकाल से भी कमतर आंकी जा रही है| विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग हो या फिर जन-कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े मलाईदार विभाग ?मंत्री शर्मा के “दोनों हाथ घी में और सिर कढ़ाई” में बताया जाता है |

PMGSY में हज़ारो करोड़ के टेंडर घोटाले और फ़र्जी जाति प्रमाण पत्र जैसे संगीन मामलों में घिरे ENC केके कटारे के साथ विभागीय मंत्री शर्मा की कार्यशैली भी जाँच के दायरे में बताई जाती है| तस्दीक की जाती है,कि भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के रजिस्टर्ड मामलों की वैधानिक जाँच से मंत्री शर्मा ने अपने हाथ पीछे खींच लिए है,मामला दागी अफसर के साथ आपसी सामंजस्य और चलनशील व्यवहार से जुड़ा बताया जाता है |

यह भी बताया जाता है,कि लंबे वक़्त से मंत्री जी और PMGSY के ENC केके कटारे के बीच आंख मिचौली का खेल जारी है,इसे प्रशासनिक और राजनैतिक भाषा में “नूरा-कुश्ती” के नाम से भी जाना-पहचाना जाता है | उधर,उपमुख्यमंत्री के समर्थक उनकी आलोचनाओं से इत्तेफाक नहीं रखते,उनका दावा है,कि नौकरशाही के भीतर अधिकारियों का एक दबाव समूह मंत्री शर्मा के नेतृत्व और कार्यशैली के आड़े आ रहा है,उनकी छवि को यह वर्ग जानबूझ कर विवादित बनाने में जुटा है | उनके विश्वासपात्र कई समर्थक नाम ना जाहिर करने की शर्त पर यह भी तस्दीक करते है,कि मंत्री शर्मा के पास ना तो SP और कलेक्टर को हटाने का अधिकार क्षेत्र है, और ना ही उनकी तैनाती का | ऐसे में चीफ सेक्रेटरी और डीजीपी की कुर्सी पर बैठे अधिकारी हो या फिर विभिन्न जिलों में तैनात अधिकारी,वे मंत्री जी के निर्देशों को एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकालना ही बेहतर समझते है |

उनकी मानें तो,पुलिस में “सिपाही” और सिविल विभाग में “चपरासी” को ही इधर-उधर करने में ही मंत्री जी कारगर भूमिका में है,महत्त्वपूर्ण मामलों के लिए उन्हें अधिकारियों की “नोट शीट” की बांट जोहनी पड़ती है | उनकी मानें तो,शेष मामलों में चलनशील अधिकारियों द्वारा प्रेषित नोट शीट पर ही मंत्री जी अपनी हस्ताक्षर और सील थप्पा लगा कर संघर्षमय दौर का सामना कर रहे है, वे प्रतिप्रश्न करते है,कि ऐसी विपरीत परिस्थितियों में मंत्री जी रील ना बनाए तो आखिर क्या करे ?
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छत्तीसगढ़ राज्य नशे की लत और अपराधों के मकड़जाल में बुरी तरह से उलझ चूका है,चर्चित मामलों को लेकर मंत्री शर्मा से न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ ने चर्चा करनी चाही लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई| मंत्री शर्मा परंपरानुसार जनहित के कार्यों में व्यस्त बताए गए| जबकि,सोशल मीडिया से लेकर गांव कस्बों तक उनका“भौकाल” लोगों की जुबान और मोबाईल स्क्रीन पर सुर्खियां बटोर रहा है | फ़िलहाल,देखना गौरतलब होगा,कि अपने दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही के दर्जनों मामलों पर बीजेपी आखिर किस तरह से मंत्री शर्मा का बचाव करती है या फिर उनके इस्तीफे की मांग पर विपक्षी दलों को कोई माकूल जवाब देती है |






