
UP Politics: यूपी में इन दिनों सियासत सर चढ़ कर बोल रहा है. विधानसभा चुनाव तो अगले साल होने वाले हैं इससे सीएम योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बीच शंकराचार्य को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. दरअसल,यूपी में एक बार फिर शंकराचार्य विवाद ने तुल पकड़ लिया है। विधानसभा सत्र के दौरान योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर पहली बार अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ‘हर व्यक्ति खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता’ और देश में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है ‘मैं भी नहीं।’ सीएम ने कहा कि भारत में कानून का शासन सबसे ऊपर है और हर नागरिक को उसका पालन करना चाहिए। उन्होंने टिप्पणी की कि यदि सपा के लोग किसी को पूजना चाहते हैं तो यह उनका अधिकार है, लेकिन व्यवस्था और मर्यादा सबके लिए समान है।

इस बयान के बाद यूपी की राजनीति फिर से गरमा गई है। सपा नेता अखिलेश यादव को इस बयान को लेकर योगी आदित्यनाथ और सरकार पर निशाना साधते हुए देखा जा रहा है। वहीं अखिलेश यादव ने इस पूरे मुद्दे को लेकर एक टिट्व किया है। उन्होंने अपने टिट्व में लिखा कि पहन ले कोई जैसे भी ‘चोले’ पर उसकी वाणी पोल खोले… परम पूज्य शंकराचार्य जी के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी। ऐसा कहने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं।

जब भाजपा के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी। जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आँकड़े नहीं बताते हैं, कैश में मुआवज़ा देकर उसमें भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं, जिन तक मुआवज़ा नहीं पहुँचा, उनका पैसा कहाँ गया, ये नहीं बताते हैं; अपने ऊपर लगे मुक़दमे हटवाते हैं; वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं। अपने बयान में उन्होंने ‘क़ानून का शासन’ बोल दिया, जैसे ही इस बात पर उनका ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दुबारा सदन बुलाएंगे या इसके लिए एक टाँग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे |







