WASHINGTON, DC - DECEMBER 08: U.S. President Donald Trump participates in a roundtable discussion with farmers in the Cabinet Room of the White House on December 08, 2025 in Washington, DC. President Trump is expected to announce a $12 billion farm aid package, which includes one-time payments to those affected by the administration’s trade policies. (Photo by Alex Wong/Getty Images)
गाजा के पुनर्निर्माण हेतु फंड जुटाने की कोशिश के तहत वाशिंगटन में बोर्ड ऑफ पीस की बैठक आयोजित की जाएगी। अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सियोस ने ये जानकारी दी है।
एक अमेरिकी अधिकारी और बोर्ड का हिस्सा रहे चार देशों के राजनयिकों के हवाले से आउटलेट ने शुक्रवार को रिपोर्ट दी कि 19 फरवरी को बैठक की योजना है। इसका प्रमुख एजेंडा गाजा पुनर्निर्माण के लिए फंड जुटाना होगा। हालांकि इन्हीं लोगों ने ये भी कहा कि इस तारीख में बदलाव संभव है।
वहीं इजरायली न्यूज साइट द टाइम्स ऑफ इजरायल ने भी दो अरब राजनयिकों के हवाले से इसकी पुष्टि की है।
राजनयिकों ने बताया कि अमेरिका ने शुक्रवार दोपहर को पैनल में शामिल 26 दूसरे देशों को न्योता भेजा। ऐसा एक्सियोस न्यूज साइट ने अपनी रिपोर्ट में बताया था।
हालांकि अंदेशा जताया जा रहा है कि चूंकि यह तारीख रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ पड़ेगी, इससे मुस्लिम नेताओं के इसमें शामिल होने में दिक्कत आ सकती है।
अमेरिका ने पिछले महीने स्विट्जरलैंड के दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मौके पर बोर्ड ऑफ पीस के लिए एक साइनिंग सेरेमनी आयोजित की थी।
लेकिन कई देश इसमें शामिल नहीं हुए थे। ज्यादातर देशों को इस प्रमुख समारोह के लिए न्योता भेजा गया था। कथित तौर पर बोर्ड ऑफ पीस के चार्टर को लेकर असुविधा के कारण कइयों ने दूरी बना ली थी।
हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने सहयोगियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि बोर्ड ऑफ पीस पहले सिर्फ गाजा से निपटेगा। यह यूएन सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के मुताबिक ही है, जिसने पैनल को अगले दो सालों के लिए गाजा पट्टी के युद्ध के बाद के मैनेजमेंट की देखरेख करने का अधिकार दिया है।
टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, अरब डिप्लोमैट्स ने बताया कि गाजा बोर्ड ऑफ पीस के प्रमुख निकोले म्लाडेनोव मानवीय मदद पहुंचाने की कोशिश में हैं, जिससे एनसीएजी (गाजा प्रशासन के लिए बनाई राष्ट्रीय समिति) को कुछ हद तक पट्टी में प्रवेश करने के लिए जरूरी साधन मिल सकें।
हालांकि, उन्हें इजरायली सरकार को सहयोग के लिए मनाने में मुश्किल हो रही है, क्योंकि यरूशलम इस बात पर जोर दे रहा है कि सिर्फ जीवन बचाने के लिए जरूरी मदद ही उन इलाकों में जाने दी जाए जहां हमास अभी भी मौजूद है।






