
नेशनल डेस्क : केंद्र सरकार ने आम बजट 2026-27 में शिक्षा और महिला सशक्तिकरण को लेकर एक अहम कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान देश के हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने की घोषणा की। इस फैसले से दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों से पढ़ाई या काम के लिए शहरों का रुख करने वाली लड़कियों और महिलाओं को सुरक्षित ठिकाना मिलने की उम्मीद है।
घर से दूर पढ़ाई करने वाली छात्राओं की मुश्किल होगी कम
अब तक कई जिलों में गर्ल्स हॉस्टल की सुविधा नहीं होने के कारण छात्राओं को या तो रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी या फिर निजी किराए के कमरों में रहना मजबूरी बन जाती थी, जहां सुरक्षा को लेकर सवाल बने रहते थे। नए हॉस्टल बनने से छात्राएं शैक्षणिक संस्थानों के पास सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में रह सकेंगी। खास तौर पर हायर एजुकेशन के लिए बाहर जाने वाली लड़कियों को इससे बड़ा फायदा मिलेगा।
STEM कोर्स में बढ़ सकती है लड़कियों की हिस्सेदारी
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आवास की समस्या दूर होने से साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स जैसे प्रोफेशनल कोर्स में लड़कियों का रुझान बढ़ेगा। कई बार सिर्फ रहने की सुविधा न होने की वजह से छात्राएं इन कोर्सों में दाखिला लेने से पीछे हट जाती थीं। बजट में मिली मंजूरी के बाद शिक्षा मंत्रालय की इस योजना को जमीन पर उतारने की राह अब साफ हो गई है।
हायर एजुकेशन में 50% नामांकन का लक्ष्य
नई शिक्षा नीति के तहत सरकार ने 2035 तक उच्च शिक्षा में छात्राओं का नामांकन 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल यह आंकड़ा करीब 29 प्रतिशत के आसपास है। सरकार का मानना है कि हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनने से लड़कियों के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंच आसान होगी और यह लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।कामकाजी महिलाओं के लिए भी खुले रहेंगे हॉस्टल
यह योजना सिर्फ छात्राओं तक सीमित नहीं होगी। नौकरी के सिलसिले में दूसरे जिलों में जाने वाली कामकाजी महिलाओं को भी इन हॉस्टलों में रहने का अवसर मिलेगा। सुरक्षित आवास मिलने से महिलाएं बिना डर बेहतर रोजगार के विकल्प चुन सकेंगी। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने साफ किया कि विकास को समावेशी बनाने और सामाजिक सशक्तिकरण को मजबूत करने पर सरकार का खास फोकस है।





