
रायपुर : छत्तीसगढ़ कैडर में 2012 बैच के एक आईपीएस अधिकारी की गुहार से मंत्रालय में खलबली है| इस बेदाग अधिकारी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से ना केवल गुहार लगाई है,बल्कि “राजधर्म” के पालन को लेकर बीजेपी सरकार को सचेत किया है| उनका एक पत्र प्रशासनिक गलियारों में चर्चा में है|कबीरधाम जिले के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र छवई ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को संबोधित पत्र में पुलिस महकमें में संवैधानिक एवं वैधानिक प्रावधानों एवं नियमों का पालन सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है|दरअसल,राज्य में आईपीएस अधिकारियों के बीच पॉवर पॉलिटिक्स के चलते बेदाग और अनुशासित आईपीएस अधिकारी ठिकाने लगाए जा रहे है| हालत यह है,कि कायदे कानूनों के उल्लघंन एवं भेदभाव पर रोक लगाने के मामले में पुलिस मुख्यालय फिसड्डी साबित हुआ है|

नतीजतन,छत्तीसगढ़ कैडर के कई आईपीएस अधिकारियों का भविष्य दांव पर लगने से गहमा-गहमी तेज़ हो गई है,दर्जनों पीड़ित आईपीएस अधिकारी न्याय के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से फ़ौरन हस्तक्षेप की मांग कर रहे है|उनकी दलील है,कि “आईपीएस लॉबी” में प्रभावशील अधिकारियों का एक तबका अनुचित लाभ अर्जित कर रहा है,जो कि सिविल सेवा आचरण संहिता के घोर उल्लंघन के दायरे में है| सूत्र तस्दीक करते है,कि इस बाबत् आईपीएस धर्मेंद्र छवई का मुख्यमंत्री को प्रेषित अध्यावेदन सुर्ख़ियों में है|इसमें मुख्यमंत्री से अनुशासन का पालन करने और बगैर किसी लाग-लपेट के “राजधर्म” के अनुरूप फैसला लेने का निवेदन किया गया है|

पीड़ित आईपीएस अधिकारियों ने पत्र लिखकर साफ़ किया है,कि जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड एवं स्केल तथा उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदोन्नत किये जाने संबंध में ना तो सरकार सचेत रही और ना ही मार्गदर्शक मंडल ने मुख्यमंत्री को हकीकत से रूबरू कराया ? अन्यथा,देश-प्रदेश की रक्षा और संविधान के पालन की कसम खाने वाले निष्ठावान आईपीएस अधिकारियों को इस तरह से पत्र लिखने को विवश नहीं होना पड़ता|जानकारों के मुताबिक,आईपीएस धर्मेंद्र छवई के मुख्यमंत्री को सम्बोधित पत्र में उन दर्जनो आईपीएस अधिकारियों का दर्द छलक रहा है,जो अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की कसौटी पर खरे उतरे है| बावजूद इसके उनके साथ भेदभाव बरता जा रहा है|

पीड़ित आईपीएस अधिकारियों की जब पुलिस मुख्यालय और सरकार के उचित फोरम पर कोई सुनवाई नहीं हुई,तो उसने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को हकीकत से रूबरू कराना मुनासिफ समझा| इस पत्र को लेकर मंत्रालय के गलियारों में यही तस्दीक की जा रही है,इसके साथ कहा तो यह भी जा रहा है,कि दागी आईपीएस अधिकारियों के हाथो में सुशासन की बागडोर सौंप दिए जाने से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की साख और उनकी लोकप्रियता दिनों-दिन घटती जा रही है| अंदेशा तो यह भी जाहिर किया जा रहा है,कि मुख्यमंत्री साय का “मार्गदर्शक मंडल” और उसके विवादित फैसलों से बीजेपी को आगामी चुनाव में तगड़ा झटका लग सकता है|

एक जानकारी के मुताबिक,बीजेपी सरकार के पिछले दो साल के कार्यकाल में बेदाग और अनुशासित आईपीएस अधिकारियों को जहाँ ठिकाने लगाने का उपक्रम लगातार परवान चढ़ रहा है,वही कई घोटालों और गैर कानूनी गतिविधियों में लिप्त आईपीएस अधिकारियोंकी“पौ-बारह’ है|

छत्तीसगढ़ कैडर के 2013 बैच के आईपीएस जितेंद्र शुक्ला के राज्य छोड़ कर NIA में डेपुटेशन में जाने के मामले को भी मुख्यमंत्री के “मार्ग दर्शक मंडल” की करतूतों से जोड़कर देखा जा रहा है कहा जाता है,कि ईमानदार छवि के इस अधिकारी ने सरकार के ‘रवैये’ से खिन्न हो कर डेपुटेशन का रास्ता चुना था|अब ऐसे कई निष्ठावान अधिकारी भी राज्य से बाहर की राह तय करने के लिए अपने कदम आगे बढ़ा रहे है|

कांग्रेस राज में जिन अधिकारियों ने पूर्व मुख्यमंत्री बघेल को लूटमार और घोटालों में सीधी मदद की थी,राज्य की बीजेपी सरकार अब उन्हें पुरुस्कृत कर रही है| ऐसे दागी अफसरों ने खाकी वर्दी की आन-बान और शान को ताक में रख करसरकारी तिजोरी पर हाथ साफ़ करने,महादेव एप्प सट्टा कारोबार संचालित करने और कोल खनन परिवहन घोटाले को अंजाम देने में कारगर भूमिका निभाई थी,उन्हें बीजेपी की विष्णुदेव साय सरकार ने अपना “हमसफ़र” बना लिया है|

दावा तो यह भी किया जा रहा है,कि दो साल पहले साय के मुख्यमंत्री बनते ही उनके “मार्गदर्शक मंडल” की टोली ने संवैधानिक प्रावधानों और कायदे कानूनों की पुस्तकों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया है| मुख्यमंत्री साय सरकार द्वारा दागी आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नति दिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है| बताया जाता है,कि महादेव एप्प सट्टा और कोल खनन परिवहन घोटाले में लिप्त अफसरों पर राज्य की बीजेपी सरकार,”भू-पे” के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार की तर्ज़ पर पूरी तरह से मेहरबान है|

यहां तक,कि दागी अफसरों को उपकृत करने के लिए मुख्यमंत्री के “मार्गदर्शक मंडल” ने सुशासन पर पलीता लगाने में जहाँ कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है,वही उसकी कथनी और करनी के चलते बीजेपी सरकार की महती भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” नीति का भी दम निकाल दिया है| कहा जा रहा है,कि विभिन्न घोटालो में लिप्त महादेव के तहत दागी अफसरों को लगातार उपकृत किए जाने से “आईपीएस लॉबी” के बाद “आईएएस लॉबी” में भी जबरदस्त ख़लबली है|

मुख्य सचिव विकासशील के संज्ञान में प्रकरण को लाए जाने की कवायतें भी जोरों पर बताई जा रही है| इस बीच 2012 बैच के आईपीएस धर्मेंद्र छवई का सरकार को आगाह करने वाला पत्र सामने आया है|मुख्यमंत्री को संबोधित इस पत्र में उन्होंने लिखा है,कि कृपया सादर निवेदन है कि मैं भारतीय पुलिस सेवा (2012 बैच) का अधिकारी हूँ। वर्तमान में पुलिस अधीक्षक कबीरघाम के पद पर कार्यरत हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर मेरी पदोन्नति के संबंध में संनिष्ठता प्रमाणित करते हुए दिनांक 10/10/2024, 31/12/2024, 26/05/2025 एवं 31/07/2025 के माध्यम से मेरी पदोन्नति की अनुशंसा की गई है, किंतु मेरे विरूद्ध लोकायुक्त संगठन भोपाल मे जाँच विवेचना स्तर पर लंबित होने के कारण उक्त पदोन्नतियाँ नहीं दी गई है।

जबकि उक्त प्रस्ताव में अन्य अधिकारियों 01. डॉ. आनंद छाबड़ा (पापुमें) के विरूद्ध अपराध क्र.-06/24 (महादेव सट्टा ऐप) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 यथासंशोधित 2018 की धारा 17 (क) के अधीन प्रकरण विवेचना में है। 02. प्रशांत अग्रवाल (भापुसे) के विरूद्ध भी विवेचना स्तर पर अपराध क्रं-06/24 (महादेव सट्टा ऐप्प) प्र.नि.अधि. 1988 यथासंशोधित 2018 की धारा 17 (क) के अधीन प्रकरण विवेचना में है। 03. अभिषेक पल्लव (पापुसे) के भी उक्त अपराध कायम होकर विवेचनाधीन है तथा 04. रजनेश सिंह (भापुसे) पर अपराध क्रं-06/19 एवं 07/19 कायम है। जिसमें आज तक न्यायालय से कोई अंतिम रिपोर्ट स्वीकृत नही है, फिर भी उक्त अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है जबकि मेरे विरूद्ध प्रकरण लंबित होने के आधार पर पदोन्नति नहीं दी गई है, जो कि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद-16 के तहत अवसर की समानता का खुला उल्लंघन है।

उन्होंने पत्र में यह भी लिखा है,कि भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा पदोन्नति हेतु जारी नियम दिनांक- 15/01/1999 के कंडिका-11 के अनुसार11 (A)के अनुसार निलंबन के दौरान 11(B) के अनुसार अधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र जारी किया जा चुका हो और विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो।11 (C) के अनुसार अधिकारी के विरूद्ध न्यायालय में आपराधिक प्रकरण लंबित हो।

दरअसल,राज्य सरकार ने हालिया एक आदेश में 2001 बैच के IPS अधिकारी डॉ. आनंद छाबड़ा को 25 साल की सेवा पूरी करने के बाद अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) के पद पर पदोन्नत किया गया है। इसी तरह 2005 बैच के शेख आरिफ को अनधिकृत रूप से एजुकेशन लीव पर भेजा गया| जबकि, 2008 बैच के IPS प्रशांत कुमार अग्रवाल को पुलिस महानिरीक्षक (IG) के पद पर और वर्ष 2013 के IPS डॉ. अभिषेक पल्लव को चयन श्रेणी में पदोन्नत किया गया है। जबकि,इन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के ठिकानों पर सीबीआई और ईडी की छापेमारी हो चुकी है|

यह भी बताया जाता है,कि पूर्व चीफ सेक्रेटरी अमिताभ जैन की तर्ज पर मौजूदा चीफ सेक्रेटरी विकासशील ने भी कायदे कानूनों के उल्लंघन के प्रकरणों से अपनी नजरे फेर ली है|ऐसे विपरीत हालातों में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार को आए दिनों अप्रिय स्थिति का सामना करना पड़ रहा है|आम जनता के साथ-साथ प्रशासनिक गलियारों में भी बीजेपी सरकार की पहचान विशिष्ट कार्यशैली के लिए जानी -पहचाने जाने लगी है|

आईपीएस धर्मेंद्र छवई के सोशल मीडिया में वायरल मुख्यमंत्री को लिखे पत्र की आधिकारिक पुष्टि न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ नहीं करता| इस पत्र को लेकर आधिकारिक जानकारी के लिए न्यूज़ टुडे छत्तीसगढ़ आईपीएस धर्मेंद्र छवई से संपर्क किया,लेकिन कोई प्रतिउत्तर नहीं मिल पाया,उधर सचिवालय में पदस्थ मुख्यमंत्री के “मार्गदर्शक मंडल” में शामिल अधिकारियों से इस पत्र को लेकर कोई जानकारी नहीं प्राप्त हो सकी| रविवार को छुट्टी होने के चलते आधिकारिक कार्यालय बंद रहे| फिलहाल,देखना गौरतलब होगा कि पीड़ित आईपीएस अधिकारी का पत्र क्या रंग दिखाता है ? या फिर हकीकत बयां करना उन्हें भारी पड़ सकता है|
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गले पड़े घोटालों के नागमणि,देखें फ़ेहरिस्त…






