
रायपुर : छत्तीसगढ़ में डीएसपी कल्पना वर्मा बनाम दीपक टंडन मामले ने देश भर में सुर्खियां बटोरी थी,अभी भी यह मामला थमा नहीं है,क्योंकि जाँच रिपोर्ट का पहले कछुआ चाल से सामना हुआ और अब कार्यवाही का इंतज़ार किया जा रहा है|जाँच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ‘गुनहगार’ पुलिस की नाक के नीचे ही मौज़ूद है,उसके सामने पुलिस तंत्र इतना लाचार नज़र आ रहा है,कि मामले की जांच और फ़ैसला महीनों से रहस्यमय बना हुआ है|

इस मामले में पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली ने भी प्रशासनिक व्यवस्था की कलई खोल कर रख दी है| जानकारी के मुताबिक, डीएसपी कल्पना वर्मा बनाम दीपक टंडन मामले में दिनांक-16.12.2025 को शिकायतकर्ता ने डीजीपी को अपना आवेदन उस वक्त सौंपा था,जब प्रेस मीडिया में डीजीपी का एक हैरानी भरा बयान सामने आया था| इस बयान में डीजीपी ने मामले के संज्ञान में ना होने का वक्तव्य देते हुए,मामले से अपना पल्ला झाड़ लिया था|जबकि,डीएसपी कल्पना वर्मा बनाम दीपक टंडन मामले ने स्थानीय स्तर से लेकर देश-प्रदेश में काफी सुर्खियां हासिल कर ली थी|इतने महत्त्वपूर्ण मामले में डीजीपी की बेरूखी सुर्ख़ियों में है,सिर्फ यही मामला नहीं,दर्जनों ऐसे लंबित प्रकरण बताए जा रहे है,जिसमें कई पुलिस कर्मी और अधिकारी कभी यौन अपराधों में तो कभी गंभीर अपराधों में संलिप्त पाए गए है |

दरअसल,चर्चा करे तो डीएसपी कल्पना वर्मा मामले में सामने आए विवाद पर शिकायकर्ता द्वारा प्रस्तुत आवेदन को डीजीपी को सौंपे 16.12.2025 से लेकर अब (समाचार लिखे जाने) तक पूरे 40 दिन गुजर चुके है,बावजूद इसके पुलिस मुख्यालय और डीजीपी मौन साधे हुए है| पुलिस प्रमुख की इस मामले में कोई भूमिका अब तक सामने आने से प्रदेश में पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली पर सवालियां निशान लग गया है|डीएसपी कल्पना वर्मा बनाम दीपक टंडन मामले में पुलिस मुख्यालय की बेरुखी से महकमें में निराशा का वातावरण देखा जा रहा है| ईमानदार और अनुशासित सिपाही को पुरुस्कार नहीं और बेईमान को दंड नहीं ? जैसे हालातों से महकमा दो-चार हो रहा है| नाम ना जाहिर करने की शर्त पर कई वरिष्ठ अधिकारी तस्दीक करते है,कि समय पर फैसला नहीं लेने और शिकायतों का त्वरित निराकरण नहीं होने से महकमें में खाकी वर्दी का दुरूपयोग और अपराधीकरण थामे नहीं थम रहा है|

उनके मुताबिक, गंभीर आरोपों से घिरे बिलासपुर के एएसपी राजेंद्र जायसवाल के फ़ौरन निलंबन से आम जनता के बीच बेहतर सन्देश पहुंचा था| लेकिन विवादों से घिरी डीएसपी के मामले में जाँच रिपोर्ट का अधर में लटक जाना दुर्भाग्यजनक है| इससे आम जनता के बीच पुलिस तंत्र की छवि घूमिल हो रही है| वरिष्ठ अधिकारी यह भी तस्दीक करते है,कि सोशल मीडिया में प्रकरणों के तूल पकड़ने पर ही वैधानिक कार्यवाही पर जोर दिए जाने के प्रचलन से पुलिस तंत्र के भीतर अपराधीकरण पनप रहा है| जबकि, इसी दौर में विभागीय शिकायतों पर पुलिस मुख्यालय स्तर पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं होने से महकमें के बहुसंख्यक कर्त्तव्यनिष्ठ और अनुशासित वर्ग पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है|

डीएसपी कल्पना वर्मा बनाम दीपक टंडन मामले में लगभग डेढ़ माह से पुलिस मुख्यालय आख़िर क्यों मौन साधे हुए है ? वो भी जब शिकायतकर्ता ने सीधे रूबरू होते हुए डीजीपी को अपनी आपबीती सुनाई थी| शिकायतों के पुलिंदे में कई डिजिटल सबूत भीशिकायतकर्ता ने डीजीपी को सौंपे थे | ऐसी स्थिति में पुलिस मुख्यालय की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में बताई जाती है|

आम जनता से सीधे तौर पर सरोकार रखने वाले पुलिस तंत्र की सक्रियता से प्रदेश में अमन चैन स्थापित होता है| पुलिस जनता के जान-माल की हिफाज़त के लिए जानी-पहचानी जाती है | उसकी छवि सशक्त बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय की वैधानिक जिम्मेदारी किसी से छिपी नहीं है| लेकिन राज्य में जिस तर्ज पर बे-रोक,टोक पुलिस के अपराधीकरण के मामले चर्चा का विषय बने हुए है, कम से कम ऐसे प्रकरणों में पुलिस मुख्यालय की निष्क्रियता सामने आने से प्रदेश के सुशासन पर खतरा मंडराने लगा है|सवाल,”सुशासन बाबू” की संवेदनशीलता पर भी उठाए जाने लगे है |

आख़िर, सुशासन को आम जनता की चौखट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ही नहीं बल्कि,हिस्सेदारी से पुलिस तंत्र की विश्वसनीयता कायम होगी|“सुशासन बाबू” का इस सिलसिले में पुलिस मुख्यालय में दस्तक देना ही नहीं बल्कि,डीजीपी की तर्ज पर डीएसपी कल्पना वर्मा बनाम दीपक टंडन मामले की सुध तक ना लेना भी अब चर्चा का विषय बन गया है| जनता की जुबान पर है,आखिर जायज मामलो में भी पीड़ितों की गुहार को डीजीपी के दरबार में नजरअंदाज कर देने से वो किसके आगे रोना रोएं ? ताकि लूटमार और वर्दी के दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों से उन्हें निज़ात मिल सके|

इस बीच “सुशासन बाबू” का पुलिस मुख्यालय में आमद दरज करना रचनात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है| मुख्यमंत्री साय ने कहा,कि प्रदेश में आधारभूत सुविधा मिलने से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सकारात्मक वातावरण में कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी| मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग के 255 करोड़ रुपए की लागत के विकास कार्यों का वर्चुअली लोकार्पण किया| मुख्यमंत्री साय ने पुलिस विभाग को 08 नए साइबर थानों समेत पुलिस आवासीय भवनों और नवीन थाना भवनों की सौगात दी|

उन्होंने कहा कि प्रेजेंटेशन के माध्यम से हमने देखा कि साइबर थाना, एसडीओपी कार्यालय, चौकी भवन, ट्रांजिट हॉस्टल एवं आवासीय भवन अत्यंत सुंदर और सुविधाजनक बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री ने गुणवत्तापूर्ण निर्माण के लिए संबंधित एजेंसियों की सराहना करते हुए कहा कि इन सुविधाओं से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सकारात्मक वातावरण में कार्य करने की प्रेरणा मिलेगी और वे अपने कर्तव्यों का और अधिक प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकेंगे|

इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अनेक स्थानों पर साइबर पुलिस थानों की शुरुआत की जा रही है। आज जशपुर, रायगढ़ और राजनांदगांव जिलों सहित कुल 8 नए साइबर थानों का शुभारंभ किया गया है। इससे पूर्व प्रदेश के पांच जिलों में साइबर थाना संचालित हैं। भविष्य में आवश्यकता के अनुसार अन्य जिलों में भी साइबर थाने स्थापित किए जाएंगे।

इस अवसर पर मुख्य सचिव विकास शील समेत सुशासन बाबू का पूरा अमला मौजूद था|लेकिन सत्ता में सुशासन का रंग भरने वाले कर्णधारों ने चर्चित मामलों में वैधानिक कार्यवाही की दशा-दिशा को लेकर चुप्पी साधे रही|

कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, गृह विभाग के सचिव हिमशिखर गुप्ता, पुलिस महानिदेशक पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन पवन देव, एडीजी एसआरपी कल्लूरी,एडीजी प्रदीप गुप्ता, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, एडीजी दीपांशु काबरा, एडीजी अमित कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही वनमंत्री केदार कश्यप, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा, विधायक भईया लाल रजवाड़े,ललित चंद्राकर, विधायक रायमुनि भगत एवं जनप्रतिनिधि वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में सहभागी रहे।






