
(सुनील नामदेव दिल्ली से )
दिल्ली/ रायपुर/रांची : छत्तीसगढ़ और झारखंड में अंजाम दिए गए,हज़ारों करोड़ के शराब घोटाले की जांच करने से CBI ने अपने हाथ पीछे खींच लिए है|साफ़ शब्दों में कहा जाए तो,अचानक सीबीआई ने, 35 सौ करोड़ से ज्यादा के शराब घोटाले की जांच करने से इनकार कर दिया है|बिलासपुर हाई कोर्ट में इससे संबंधित सीबीआई का पत्र सुनवाई के दौरान पेश किए जाने से राज्य की एक बड़ी आबादी के अरमानों पर पानी फिर गया है|

जानकारी के मुताबिक,सीबीआई द्वारा जांच से इनकार करने के बाद न्यायालय ने अगले हफ्ते इस मामले की सुनवाई करने का फैसला किया है.उधर, सीबीआई के अचानक कदम पीछे खींच लेने से शराब घोटाले में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल और उनके गिरोह में ख़ुशी की लहर देखी जा रही है|अदालती गलियारों में सीबीआई का जांच से इंकार वाला पत्र पेश होने की कवायत को हैरानी भरी निगाहो से देखा जा रहा है|

बताया जा रहा है, कि सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ शासन के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया,कि CBI घोटाले की जांच के लिए इच्छुक नहीं है,महाधिवक्ता विवेक शर्मा ने न्यायालय मे सीबीआई (रायपुर) के हेड ऑफ ब्रांच द्वारा राज्य सरकार को भेजे गये पत्र की कॉपी सौंपी गई है, इसमें कहा गया है कि सीबीआई ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव द्वारा भेजे गये पत्र को लौटा दिया है. क्योंकि सीबीआई इस मामले की जांच के लिए इच्छुक नहीं है|

उधर,छत्तीसगढ़ और झारखंड में एनडीए की मजबूती के लिए राजनैतिक सरगर्मियां जोरों पर बताई जाती है|झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल की तर्ज़ पर शराब घोटाले में लिप्त पाए गए थे|इस मामले में वे ईडी के हत्थे चढ़ चुके है,जेल की हवा खाने के बाद ज़मानत पर रिहा है|राजनैतिक गलियारों में चर्चा सरगर्म है,कि झारखंड में कांग्रेस का हाथ छोड़ कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आने वाले दिनों बीजेपी का दामन थाम सकते है|

सूत्रों के मुताबिक,एनडीए में उनकी ताजपोशी की कवायतें जल्द शुरू होने के आसार है|जबकि,छत्तीसगढ़ में स्वर्गीय अजित जोगी के विकल्प के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल बीजेपी के पालन हार की भूमिका में अपने हाथ-पैर मार रहे है|राजनैतिक पंडितों के मुताबिक,विधान सभा चुनाव-2023 में 18 सिटिंग विधायकों की टिकट तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल ने विपक्षियों के इशारे पर जानबूझ कर काट दी थी| इससे कांग्रेस को जमकर नुकसान उठाना पड़ा था|यहां तक,कि कांग्रेस के मुकाबले प्रचार-प्रसार में फिसड्डी और बगैर ठोस मेहनत के बीजेपी सत्ता में काबिज़ होने में सफ़ल हो गई थी| प्रदेश में बहुसंख्यक वोटरों ने भारी-भरकम भ्रष्टाचार से निज़ात दिलाने के लिए बीजेपी को सत्ता में आसीन कर तत्कालीन भू-पे बघेल सरकार को ख़ारिज कर दिया था|

इस दौर में स्वयं बघेल व उनके पुत्र चैतन्य बघेल, सौम्या चौरसिया,अनवर ढेबर, कोल माफ़िया सूर्यकांत तिवारी समेत उनके गिरोह के अन्य कई सदस्य आईटी-ईडी समेत अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर बताए जाते है|चर्चा है, कि विपक्ष की नज़रों में खरा उतरने पर बघेल गिरोह को अभयदान मिल गया था कई घोटालों के महारथी पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ना तो पुलिस और सीबीआई के हत्थे चढ़े और ना ही ईडी उन्हें अपनी गिरफ़्त में ले सकी|

राज्य में हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के दिग्गज नेताओं के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी सभाओं में तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल और कांग्रेस पर तीखे हमले किए थे|इन नेताओं ने जनता से वादा किया था,कि राज्य में बीजेपी की सरकार बनने पर घोटालेबाज़ों को ठिकाने लगाया जाएगा|सरकारी तिजोरी पर हाथ साफ करने वालो से पाई-पाई वसूली जाएगी|लेकिन बीजेपी सरकार पिछले दो साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति बेअसर साबित हुई है|तस्दीक की जा रही है,कि “बेईमानों को दंड नहीं और ईमानदार को पुरुस्कार नहीं” की तर्ज़ पर राज्य का सूरते हाल मौजूदा बीजेपी सरकार की गले की फ़ांस बनता जा रहा है|

राज्य में चर्चा आम है,कि सीधे-सादे मुख्यमंत्री को अफसरशाही का एक वर्ग हाईजेक कर चुका है,उनकी नेतृत्वशीलता के विपरीत ऐसे फैसले लिए जा रहे है,जिससे बीजेपी सरकार की साख दांव पर लग रही है|शराब घोटाले में गिरफ़्तार किए गए पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की हाई कोर्ट से प्राप्त जमानत को बीजेपी सरकार की कमजोर पैरवी से जोड़कर देखा जा रहा है|सीबीआई के मौजूदा रुख से बीजेपी के कई नेता भी हैरान-परेशान बताए जाते है,जबकि कांग्रेस को सुशासन से लेस बीजेपी सरकार पर पलटवार करने का मौका मिल गया है| राजनीति के कई जानकार,सीबीआई की कवायत को राजनैतिक मजबूरी से भी जोड़कर देख रहे है|हालाँकि,आख़िर क्यों सीबीआई ने जांच से इनकार किया ? रहस्यमय बना हुआ है ?

दिलचस्प बात यह है, कि शराब घोटाले की तर्ज पर महादेव एप्प घोटाला भी अब सरकार की प्राथमिकता सूची से बाहर बताया जाता है | लगभग 15 हज़ार करोड़ के महादेव एप्प घोटाला में पूर्व मुख्यमंत्री बघेल के खिलाफ ढेरों सबूत मुंह बाए खड़े है,इस मामले में दर्ज FIR में बघेल को मुख्य आरोपियों की फेहरिस्त में अव्वल नंबर पर बताया जाता है, बावजूद इसके बघेल की गिरफ़्तारी को लेकर एजेंसियों के हाथ बंधे बताए जाते है |

अलबत्ता,राज्य में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद जहाँ घोटालेबाज़ों की जेल से रिहाई सुनिश्चित हुई,वही बघेल गिरोह में शामिल कई आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की बीजेपी सरकार में भी सत्ता में हिस्सेदारी यथावत बरक़रार रही|अब सीबीआई का जांच से पल्ला झाड़ने का मामला अदालत में सुर्खियां बटोर रहा है|

जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के शराब घोटाले के मुकाबले, छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला ना केवल व्यापक बल्कि आधा दर्जन राज्यों में फैला बताया जाता है|यही नहीं, शराब घोटाले की जांच में जुटी ईडी ने अदालत में कई ऐसे तथ्य पेश किए है, जिससे साफ़ होता है, कि घोटाले की रक़म का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस के चर्चित और दिग्गज नेताओं के हाथों तक पहुंचा था |

“कांग्रेस का हाथ भ्रष्टाचारियों के साथ” का नारा बुलंद कर विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के कई नेताओं ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल पर तीखे हमले किए थे|लेकिन, सत्ता में आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री बघेल और उनके गिरोह पर राज्य की बीजेपी सरकार की बरस रही कृपा ने आम जनता के अरमानों पर पानी फेर दिया है|दरअसल,पीड़ित जनता के एक बड़े वर्ग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कार्यवाही के बीजेपी के वादों पर भरोसा कर पार्टी की झोली वोटों से भर दी थी,लेकिन अब तमाम घोटालेबाज़ एक-एक कर जेल से रिहाई की ओर अपने कदम बढ़ा रहे है|जांच एजेंसियां भी उनके आगे नतमस्तक नजर आ रही है|

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में शराब घोटाले की बानगी सामने आई|बताया जाता है,कि शराब घोटाले मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में तीन याचिकाएं विचाराधीन हैं,इसमें से एक याचिका झारखंड के तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबै, दूसरी संयुक्त उत्पाद आयुक्त झारखंड गजेंद्र सिंह और तीसरी याचिका विकास सिंह की है|
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हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायाधीश अरविंद कुमार अग्रवाल की पीठ में इन तीनों याचिकाओं की सुनवाई हुई|आरोपियों के खिलाफ विकास सिंह की शिकायत पर शराब घोटाले से संबंधित प्रकरण की जाँच ईडी और छत्तीसगढ़ आर्थिक अपराध शाखा (EOW) जांच कर रही है| हालाँकि,सीबीआई के अदालत में पेश इंकारनामे को लेकर एजेंसी के अलावा राज्य सरकार और उसकी जाँच एजेंसियों ने आधिकारिक रूप से कोई जानकारी साझा नहीं की है| इस मामले को लेकर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतज़ार किया जा रहा है|फ़िलहाल,केंद्र सरकार की जांच एजेंसी सीबीआई ने आखिर किन कारणों से प्रभावित हो कर दिल्ली से बड़े शराब घोटाले की जांच से इंकार कर दिया,यह देखना गौरतलब होगा|







