
रायपुर : रायपुर प्रेस क्लब चुनाव की सरगर्मियां जोरों पर है,कल 13 जनवरी मंगलवार को सुबह 8 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक मोती बाग स्थित प्रेस क्लब में मतदान होगा। इससे पूर्व अध्यक्ष पद के लिए मैदान में उतरे सभी 6 उम्मीदवारों ने अपनी पूरी ताकत झोक दी है। हालाँकि, राजनैतिक दलों की तर्ज पर जारी चुनाव प्रचार की कवायत में शराब परोसने का खेल भी जोरों पर बताया जा रहा है। जीत पक्की करने के लिए कई प्रत्याशियों ने मौज-मस्ती की पार्टी में शराब की नदियाँ बहा दी है।

उन्हें भरोसा है, कि यह नुस्खा कारगर साबित होगा और बाजी उनके हाथ ही लगेगी। प्रेस क्लब में पत्रकारिता की आड़ में जारी सौदेबाज़ी ने इसके नेतृत्व को “लाभ का धंधा” बना दिया है,अंदेशा जाहिर किया जा रहा है, कि यह परिपाटी अभी भी जारी रही तो आने वाले दिनों प्रेस क्लब पूरी तरह से अपने मार्ग से भटक जाएगा। वो दिन भी अब करीब बताया जा रहा है, दरअसल चुनाव की बेला में मौज-मस्ती पार्टियां पत्रकारों के जनमत को प्रभावित करने में कामयाब रही है, इसके चलते प्रदेश में पत्रकार v/s पत्रकारिता के सौदागर नामक नई जमात सामने आई है। जानकारों के मुताबिक, इस बार ऐसे सौदागरों को प्रेस क्लब सस्दयों द्वारा कड़ा संदेशा दिए जाने के आसार जाहिर किए जा रहे है।

जानकार तस्दीक करते है, कि “दारू पार्टी” के जरिए पत्रकारों को प्रभावित करने वालो की इस बार छुट्टी तय है।”क्रांतिकारी पैनल” ने वरिष्ठ पत्रकारों से इस परिपाटी पर विराम लगाने की मांग की है।”क्रांतिकारी पैनल” के संयोजक वरिष्ठ पत्रकार नीलेश शर्मा ने संदेशा जारी कर सभी सस्दयों से पत्रकार और पत्रकारिता की गरिमा बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने साफ़ किया, कि शराब पार्टियों से जनमत प्रभावित करने वालों के ख़िलाफ़ मतदान कर उनके अरमानों पर पानी फेरने की बेला करीब है, ऐसे पूर्व एवं वर्तमान पदाधिकारियों को मतदाता जरूर सबक सिखाएंगे।

वरिष्ठ पत्रकार नीलेश शर्मा ने मौज-मस्ती और सौदागिरी की चकाचौंध से मतदाताओं को सावधान किया है। उन्होंने एलान किया, कि पत्रकारिता के नाम पर अब समझौते नहीं, संकल्प लेने चाहिए। उन्होंने कहा, कि नशे की महफ़िलों ने अपने-पराए के भेद खोल दिए है, खुश करने के लिए पार्टियां दी जा रही है। लेकिन अब ऐसे लोगों से सतर्क रहने का वक्त है। उन्होंने कहा, कि अब प्रेस क्लब में नए युग की शुरुआत हो रही हो, इसके नेतृत्व की कोई नई चाल नहीं, कोई ढाल नहीं, राजनेताओं की कृपा भी नहीं,और बंद कमरों की सौदेबाज़ी तो बिल्कुल नहीं है। यहाँ बात सिर्फ़, पत्रकारों के हक़ और अधिकारों की होगी। उन्होंने कहा, कि निर्भीक और बेबाक पत्रकारिता के लिए वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव जाने पहचाने जाते है, वे पत्रकार है, सत्ता के साथी नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ है।

उन्होंने “क्रांतिकारी पैनल” का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा, कि चुनाव प्रचार में उतरे विभिन्न पैनलो ने वादों, दावों और लंच-डिनर पॉलिटिक्स की झड़ी लगा दी है,लालच की पेशकश के ज़रिए वोट साधने में ऐसे पैनल पूरी ताक़त झोंक रहे हैं। उनके “अनुभवी उम्मीदवार” और पदाधिकारी कुर्सी की जुगत में निम्न स्तरीय समीकरण भिड़ाते नज़र आ रहे हैं। उन्होंने लंच-डिनर की राजनीति को प्रेस क्लब के हितों के खिलाफ बताया, जबकि ऐसी पार्टी के आयोजकों की बाँछें खिली हुई हैं।

सवाल उठ रहा है, कि ये पार्टियां क्या निजी फ़ायदे के लिए आयोजित की जा रही है। दरअसल,चुनाव से पूर्व ऐसे कार्यक्रम की हकीकत घातक रूप से सामने आई है, इसमें पत्रकार मिलन के बजाए वोट पाने के समीकारणों पर ज़ोर दिया जाता है,इन्हीं मौज-मस्ती की पाठशालाओं में प्रेस क्लब के सदस्यों ने अब तक आवास और जमीन आबंटन,मूलभूत सुविधाएँ और सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों से मतदाताओं का ध्यान हटाया हैं। फ़िलहाल, रायपुर प्रेस क्लब चुनाव में मौज-मस्ती की पार्टियां पिछली बार की तर्ज पर इस बार भी कोई नया गुल खिलाएंगी ? यह देखना गौरतलब होगा।
रायपुर में पत्रकारों के लिए आवास, क्या हुआ ? किसने फेरा पत्रकारों के अरमानों पर पानी, कौन है सशक्त दावेदार, किसे दे समर्थन ? बताया पूर्व प्रेस क्लब अध्यक्ष दामू आम्बेडारे ने, देखें इंटरव्यू…







