
नई दिल्ली:तहलका पत्रिका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल से जुड़े 2013 के रेप मामले में सोमवार यानी 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मामले की हियरिंग जस्टिस आलोक अराधे की सिंगल बेंच ने की. इस मुद्दे पर गोवा सरकार और तरुण तेजपाल के बीच सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट नियमों के मुताबिक किसी भी सजा के आदेश को चुनौती देने से पहले सरेंडर करना होता है और सरेंडर सर्टिफिकेट लगाना होता है. या फिर अपील के साथ सरेंडर से छूट की अर्जी लगाई जाती है, जो सिंगल जज के सामने लिस्ट होती है.

सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कहा कि तेजपाल की अपील तभी सुनी जा सकती है, जब वह पहले सरेंडर करने का सर्टिफिकेट दाखिल करें. वैकल्पिक रूप से उन्हें सुप्रीम कोर्ट से सरेंडर से छूट मांगनी होगी. मेहता ने मामले की गंभीरता का भी हवाला दिया.कपिल सिब्बल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने पहले ही तेजपाल की सजा पर रोक लगा रखी है. ऐसे में उन्हें दोबारा सरेंडर करने के लिए कहना उचित नहीं होगा. उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट यह मानता है कि तेजपाल को राहत नहीं मिलनी चाहिए, तो वह हिरासत में जाने के लिए तैयार हैं.कपिल सिब्बल ने इस फैसले को अलग बताते हुए कहा कि मौजूदा मामले में वे किसी राहत की अवधि बढ़ाने की मांग नहीं कर रहे हैं. उनका कहना था कि तेजपाल को पहले से संरक्षण प्राप्त है और मामले को 31 तारीख को सूचीबद्ध किया जा सकता है.बहस के दौरान कपिल सिब्बल ने मामले के गुण-दोष पर भी टिप्पणी की. अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के निष्कर्ष CCTV फुटेज से मेल नहीं खाते और न्याय किया जाना चाहिए. जस्टिस अलोक अराधे ने कहा कि पीठ इस संबंध में आदेश पारित करेगी.





