
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अहम फैसला सुनाते हुए हत्या के दोषी 105 साल के एक बुजुर्ग को बड़ी राहत दी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बुजुर्ग को जेल की सलाखों से हमेशा के लिए आजाद कर दिया है। अदालत ने उनकी उम्र और सेहत को ध्यान में रखते हुए न सिर्फ उनका केस बंद कर दिया, बल्कि उनकी उम्रकैद की बाकी सजा को भी पूरी तरह माफ कर दिया है।
मामले में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह फैसला सुनाते हुए साफ किया कि भले ही उनकी उम्रकैद की पूरी अवधि खत्म न हुई हो, लेकिन उन्हें अब दोबारा हिरासत में नहीं लिया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने साल 2024 में दिए गए उनके अंतरिम जमानत के आदेश को पूर्ण और अंतिम रूप दे दिया है।
अब समझिए पूरा मामला
बता दें कि पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1920 में जन्मे रसिक चंद्र मंडल को साल 1994 में एक हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। उस समय उनकी उम्र 68 वर्ष थी। वह तब से जेल में बंद थे, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 नवंबर 2024 को उन्हें जमानत नहीं दे दी। बुजुर्ग होने के कारण उन्हें कई उम्र संबंधी बीमारियां और स्वास्थ्य समस्याएं थीं।
इसके बाद 2018 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने रसिक चंद्र मंडल की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने अपनी सजा को चुनौती दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उनकी याचिका खारिज हो गई थी।
99 साल की उम्र में डाली थी रिहाई की याचिका
गौरतलब है कि उम्र के 99वें साल में पहुंचने पर उन्होंने अपनी अत्यधिक उम्र और स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देते हुए समय से पहले रिहाई की याचिका दाखिल की। इसके बाद मई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया था।
इसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 2024 में उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी, जिसे अब अदालत ने फाइनल कर दिया है। इस फैसले के बाद अब 105 साल के रसिक चंद्र मंडल बिना किसी कानूनी बंदिश के एक स्वतंत्र नागरिक के रूप में अपना बाकी जीवन जी सकेंगे।




