
रायपुर: छत्तीसगढ़ में डीएसपी कल्पना वर्मा V/S दीपक टंडन विवाद ने वर्ष 2025 की विदाई की बेला में ख़ूब सुर्खियां बटोरी थी। मामले की जाँच-पड़ताल का “कछुआ चाल” दौर अब वर्ष 2026 के शुरुआती पायदान पर है, खबर आ रही है,कि डीएसपी कल्पना वर्मा अपने अंतिम बचाव के लिए बयान दर्ज करवाने की कवायत में जुटी हुई है। जबकि, कारोबारी दीपक टंडन अपनी आय-व्यय का पूरा ब्यौरा पुलिस को सौंप चुके है।

यह भी जानकारी सामने आई है, कि डीएसपी कल्पना वर्मा रकम के लेन -देन के अलावा “नक्सली उन्नमूलन गोपनीयता” भंग करने और दंतेवाड़ा में महादेव ऑनलाइन सट्टा एप्प पैनल संचालित करने से जुड़ी क़वायतों को लेकर बार -बार अपना बयान बदल रही है। डीएसपी कल्पना वर्मा ने कारोबारी टंडन पर पिता के साथ 75 लाख के लेन -देन के आरोप लगाए थे।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस रकम के लेन -देन संबंधी तथ्यों को लेकर संदेही डीएसपी नए-नए ऐसे बयान दे रही है, जो किसी के गले नहीं उतर पा रहे है। यहाँ तक की पिता के रिटायरमेंट से मिली रकम की थ्योरी भी बेबुनियाद साबित हो रही है। जानकारी यह सामने आ रही है, कि दंतेवाड़ा पुलिस ने भी डीएसपी कल्पना वर्मा की कार्यप्रणाली की पृथक से जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि,आधिकारिक रूप से अधिकारियों ने इसकी अभी पुष्टि नहीं की है। जबकि, मामले की जाँच कर रही रायपुर पुलिस अब अपनी रिपोर्ट से आईजी रायपुर रेंज को अवगत कराएगी। यह जाँच रिपोर्ट अंतिम दौर में बताई जा रही है, रिपोर्ट जमा करने के उपरांत ही जाँच अधिकारी एएसपी कीर्तन राठौर के रिलीव होने के आसार जाहिर किए जा रहे है।

डीएसपी कल्पना वर्मा V/S दीपक टंडन मामले में जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार जल्द खत्म होने की बारी करीब बताई जा रही है। जबकि दीपक टंडन भी “कंगाली ” के कगार पर बताये जाते है। बैंक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ग्राहक दीपक टंडन के खाते से जुड़ी जानकारी रायपुर पुलिस को सौंप दी गई है। इसमें मांगे गए वित्तीय वर्ष का ब्यौरा शामिल है। एक जानकारी के मुताबिक, टंडन की ओर से 2 करोड़ 28 लाख की उस रकम का हवाला दिया गया है, जो डीएसपी कल्पना वर्मा को कभी प्यार के इज़हार, तो कभी प्यार में कारोबार की थ्योरी की तस्दीक कर रहा है, इसमें कल्पना को समय – समय पर सौंपे गए हीरे और सोने के आभूषणों की ख़रीद -फ़रोख़्त का ब्यौरा शामिल है।

सूत्रों के मुताबिक दीपक टंडन ने विभिन्न बैंको से प्राप्त “कारोबारी लिमिट” पूरी तरह से स्वहा कर दी थी। यही नहीं, शहर के “नामी-गिरामी” आभूषण कारोबारियों के खातों में उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा बिलों के भुगतान के तहत दर्ज है। डीएसपी कल्पना वर्मा के स्वयं के एकाउंट में दीपक टंडन ने एक लाख से अधिक की रकम का डिजिटल भुगतान किया था।

प्यार,तकरार, कारोबार और अब अपराध की ओर रुख़ कर रहे डीएसपी कल्पना वर्मा V/S दीपक टंडन मामले ने छत्तीसगढ़ पुलिस को सुर्ख़ियों में ला दिया है। इस प्रकरण से पुलिस तंत्र में वर्दी के भीतर अपराधिकरण की “बू” आने लगी है। बताया यह भी जा रहा है, कि निष्पक्ष जाँच के लिए आईजी रायपुर रेंज ने कड़े निर्देश जारी किये है, दोनों ही शिकायतकर्ताओं की दलीलों पर हर एंगल से जाँच-पड़ताल कर सबूतों को इक्कठा करने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

पुलिस सूत्र तस्दीक करते है,कि अब तक की जाँच में डीएसपी कल्पना वर्मा V/S दीपक टंडन मामले में दस्तावेजी और डिजिटल सबूतों का लाल फीता वाला पुलिंदा इतना मोटा और ‘तंदुरुस्त’ हो चुका है, कि उसका भार लगभग 30 किलो के आस-पास आंका जा रहा है। इस दस्तावेजी पुलिंदे को इधर से उधर करने के लिए पुलिस कर्मियों को अपनी पूरी ताक़त झोकनी पड़ती है। फ़िलहाल,नए साल के पहले हफ्ते में डीएसपी कल्पना वर्मा V/S दीपक टंडन मामला फिर सुर्ख़ियों में आ गया है।

हालाँकि, इस प्रकरण जाँच रायपुर पुलिस के हवाले पिछले चार माह से लंबित बताई जाती है। कारोबारी दीपक टंडन और उनकी पत्नी बरखा टंडन ने रायपुर के पंडरी और खम्हारडीह थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन स्थानीय थानों में बग़ैर जाँच और शिकायतकर्ताओं के बयान दर्ज किए ही दीपक टंडन को चलता कर दिया गया था। बताते है, कि डीएसपी कल्पना वर्मा के रसूख के चलते दीपक टंडन को “फेना ” थमा दिया गया था | इसमें प्रकरण को पुलिस हस्तांतरण अयोग्य बताया गया था। प्रेस-मीडिया में मामले के तूल पकड़े जाने के बाद उच्चाधिकारियों ने डीएसपी कल्पना वर्मा V/S दीपक टंडन मामले की निष्पक्ष जाँच के निर्देश दिए थे। यह जाँच विगत वर्ष के आख़िरी महीने से अभी भी जारी बताई जाती है।

उधर,पुलिस की शरण में पहुंचे कारोबारी दीपक टंडन ने अपनी आप -बीती के दस्तावेजी सबूत जाँच अधिकारी की झोली में डाल दिए है। इस मामले में अपनी तंज भरी प्रतिकिया जाहिर करते हुए दीपक टंडन ने कहा- कि मुझसे जो कल्पना ने माँगा मैंने उसे दिया, अब पुलिस जो मांग रही है, उन्हें सौंपा है, फैसला तो खाकी वर्दी को ही करना है ? प्रेम-प्यार से लबरेज़ टंडन ने कहा-कि मैं बाबा गुरु घासीदास जी के सानिध्य में जीवन यापन करता हूँ, प्रेम-प्यार के मार्ग का अनुशरण करता हूँ, मेरे मन में किसी के प्रति दुर्भावना नहीं है, “जैसी करनी वैसी भरनी ” का जिक्र करते हुए, टंडन ने तंज कसा, कि “जो प्रेम आपको मूर्ख नहीं बनाता, वह प्रेम नहीं”, डीएसपी कल्पना वर्मा की कथनी और करनी के दावों पर वरिष्ठ अफसर ही गौर फरमाएंगे।

इधर, पुलिस महकमें में चर्चा सरगर्म है, कि डीएसपी कल्पना वर्मा के खिलाफ दीपक टंडन की तर्ज पर कई और शिकायतकर्ता सामने आ सकते है, उन्हें वक्त का इंतज़ार है। कहा जा रहा है, कि भुक्तभोगियों की फेहरिस्त में एक आईएफएस अधिकारी के अलावा पुलिस महकमें का एक आरआई और दो डीएसपी बैचमेट भी शुमार बताए जाते है। यह भी जानकारी सामने आई है, कि एटीएस में तैनाती के दौरान तत्कालीन एडीजी आनंद छाबड़ा के साथ चर्चित डीएसपी ने रायपुर से दिल्ली के लिए कई मौकों पर उड़ान भरी थी। सरकारी खर्च पर संपन्न ऐसी यात्राओं के मक़सद और उपयोगिता को लेकर भी सवाल उठ रहे है ? डीएसपी की अनुचित उड़ान का कनेक्शन आनंद छाबड़ा की गोपनीय अवैधानिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्र तस्दीक करते है, कि 2001 बैच के आनंद छाबड़ा की “दिल्ली, गुड़गांव और मथुरा” के आस-पास बेनामी संपत्ति की खरीद-फ़रोख़्त में चर्चित डीएसपी कल्पना वर्मा ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सूत्र तस्दीक करते है, कि प्यार में छले गए पीड़ित एक जिले के डीएफओ मूलतः उत्तर प्रदेश के निवासी बताए जाते है। उनका मथुरा के साथ-साथ डीएसपी कल्पना वर्मा से करीब का नाता बताया जाता है। बताते है, कि वृंदावन और मथुरा मार्ग पर आनंद छाबड़ा की लगभग 7 एकड़ बेनामी संपत्ति की खरीद-फ़रोख़्त में इस आईएफएस ने भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कहा जा रहा है,कि जाँच तो इन तथ्यों पर भी होनी चाहिए, कि छत्तीसगढ़ कैडर के कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों द्वारा सुनियोजित रूप से बेनामी सम्पत्ति ठिकाने लगाने के लिए कनिष्ठ महिला पुलिस अफसरों का कही दुरूपयोग और शोषण तो नहीं हो रहा है ?

दरअसल,पुलिस रिकॉर्ड तस्दीक करता है,कि मात्र 5 वर्षों के कार्यकाल में किसी भी कनिष्ठ डीएसपी को ट्रेनिंग खत्म होते ही पहली पोस्टिंग में एटीएस और रायपुर माना सीएसपी जैसे महत्त्वपूर्ण पदों का प्रभार कभी नहीं सौंपा गया था, लेकिन वर्ष 2017 बैच के राज्य पुलिस सेवा के तमाम प्रोबेशनर डीएसपी अपनी सुविधा सुलभ स्थानों में तैनाती को लेकर वर्षों “बाँट जोहते रहे”। जबकि दूसरी ओर कल्पना वर्मा ने चंद वर्षों के भीतर ऐसी “उड़ान” भरी की महकमें के लोग ही दांतों तले उंगलियां दबाते रहे। इस दौर में ट्रेनिंग खत्म होते ही उनका बीजापुर किया गया तबादला आदेश 2005 बैच के आईपीएस शेख आरिफ ने रातों -रात ना केवल निरस्त करवा दिया बल्कि उसकी नई पोस्टिंग रायपुर एटीएस में बतौर वरिष्ठ डीएसपी करवा दी गई थी।

अब दोनों पक्षों की दलीलें जिस तर्ज पर सामने आ रही है, उससे साफ होता है, कि डीएसपी कल्पना वर्मा ने अपनी चाही-अनचाही “मांग भरने” के लिए दीपक टंडन का उपयोग ” ATM ” की तर्ज पर कर रही थी। सूत्र यह भी तस्दीक करते है,कि डीएसपी कल्पना वर्मा ने दीपक टंडन का आपराधिक रिकॉर्ड भी पुलिस को सौंपा है, इसमें टंडन पर लगे आरोपों का ब्यौरा शामिल बताया जाता है।

एक जानकारी के मुताबिक टंडन ने उन पर दर्ज मामलो और आरोपों को लेकर पुलिस को प्रकरणों की विधिक स्थिति से अवगत कराते हुए दावा किया है, कि डीएसपी कल्पना वर्मा के तमाम आरोप झूठे और निराधार है। कल्पना वर्मा के दावों पर यकीन करे तो सवाल उठ रहा है, कि वे स्वयं पुलिस अधिकारी होने के बावजूद आखिर क्यों दीपक टंडन के साथ प्रेम की पींगे बढ़ा रही थी ? क्या ये सोशल पुलिसिंग का नमूना है या फिर अँधा प्यार और या फिर अंधाधूंध प्यार के बीच की कोई सोची समझी आपराधिक कड़ी ? बहरहाल, नए साल में पूर्ण हो रही जाँच रिपोर्ट के जल्द सामने आने के आसार जाहिर किये जा रहे है, मामला क्या रंग लेगा यह तो वक्त ही बताएगा।
अँधा प्यार या फिर अंधाधूंध प्यार ! डीएसपी कल्पना वर्मा V/S दीपक टंडन अब नए मोड़ में ,2 करोड़ 28 लाख की चढ़ोत्तरी का ब्यौरा पुलिस को सौंपने के बाद कसा तंज – “जो प्रेम आपको मूर्ख नहीं बनाता, वह प्रेम नहीं”






