
रायपुर का टिकरापारा इलाका अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर जांच के घेरे में है। पुलिस के मुताबिक, पिछले करीब डेढ़ साल में टिकरापारा थाना क्षेत्र से 15 बांग्लादेशी नागरिक पकड़े गए हैं। इनमें चार धरमनगर और बाकी संजय नगर व संतोषी नगर इलाके से पकड़े गए। जांच में सामने आया कि ये लोग किराए के मकानों में रह रहे थे और किसी ने भी यहां अपने नाम से मकान नहीं खरीदा था। हैरानी की बात यह है कि कई लोगों के पास आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे भारतीय दस्तावेज मिले। कुछ मामलों में पासपोर्ट और वीजा बनवाए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब इन दस्तावेजों के आधार और उन्हें तैयार कराने में मदद करने वालों की जांच कर रही है।
पुलिस की कार्रवाई फरवरी 2025 में शुरू हुई, जब मोहम्मद इस्माइल, शेख अकबर और शेख साजन को पकड़ा गया। जांच में सामने आया कि तीनों विदेश जाने की तैयारी में थे और उनके पास पासपोर्ट व वीजा भी मौजूद थे। इसके बाद जून में 10 अन्य बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया, जिनमें एक ही परिवार के पांच सदस्य शामिल थे। हाल ही में शेख रेहान और जमाल करीम भी पुलिस की पकड़ में आए। जांच में दावा किया गया कि दोनों ने तत्कालीन पार्षद की चिट्ठी के आधार पर पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार कराए थे। इसी आधार पर वोटर आईडी, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज बनवाए गए। पुलिस ने संबंधित रिकॉर्ड जुटाने के लिए कलेक्टर कार्यालय और आधार केंद्र को पत्र लिखा है। वहीं दस्तावेज तैयार कराने में कथित भूमिका निभाने वाले शेख अली की तलाश जारी है।
पुलिस के सामने अब करीब आधा दर्जन अन्य संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों के नाम भी आए हैं, जिनकी तस्दीक की जा रही है। इनमें कुछ महिलाएं भी शामिल हैं, जो कथित तौर पर कम उम्र में रायपुर आई थीं और बाद में यहीं शादी कर ली। कुछ बुजुर्ग दंपती के भी फोन बंद कर गायब होने की जानकारी सामने आई है। दूसरी ओर, अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए बनाई गई स्पेशल टास्क फोर्स की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए लोगों के आधार, राशन कार्ड और अन्य दस्तावेज किस आधार पर बनाए गए, इसकी जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे लिया गया और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।







