
जोधपुर: नाबालिग से यौन शोषण के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम की जमानत मंजूर होने के बावजूद अब तक जेल से रिहाई नहीं हुई है। जमानत आदेश जारी हुए चार दिन गुजर चुके हैं, लेकिन वह अभी भी जेल में है। इस मामले में अब राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है।

रिहाई में देरी पर हाईकोर्ट सख्त
जोधपुर स्थित हाईकोर्ट की मुख्य पीठ में मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से पूछा कि जब जमानत मंजूर हो चुकी है, तो आसाराम की रिहाई अब तक क्यों नहीं हुई। कोर्ट ने देरी की वजह स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
आसाराम की ओर से पेश वकील यशपाल राजपुरोहित ने अदालत को बताया कि जमानत मिलने के बाद भी रिहाई से जुड़ी जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इसी वजह से आसाराम अभी जेल में ही है।

पहली बार बिना मेडिकल आधार के मिली पैरोल
वकील के मुताबिक, आसाराम को पहली बार 20 दिन की पैरोल मंजूर हुई है, जो 3 अगस्त को स्वीकार की गई थी। इससे पहले जब भी उसे जेल से बाहर आने की अनुमति मिली, उसके पीछे मेडिकल आधार रहा था। इस बार पैरोल मेडिकल कारणों के बजाय अन्य आधार पर मिली है।बचाव पक्ष का कहना है कि कानून में अच्छे आचरण वाले कैदियों के लिए पैरोल का प्रावधान है। निर्धारित अवधि की सजा पूरी करने के बाद पात्र कैदी को नियमों के तहत पैरोल मिल सकती है।
दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया बनी वजह?
जमानत या पैरोल के बाद किसी कैदी की रिहाई से पहले कई कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं। इनमें जमानत की शर्तों की जांच, जरूरी दस्तावेज, जमानतदार और अन्य लंबित मामलों से जुड़े अदालत के आदेशों की स्थिति देखना शामिल है।
अब हाईकोर्ट के सवाल के बाद सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि आसाराम की रिहाई में आखिर किस स्तर पर और किस वजह से देरी हुई। मामले की अगली कार्रवाई सरकार के जवाब के बाद स्पष्ट होगी।




