
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संसद सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष की केवल दो मांगें हैं। पहली, प्रधानमंत्री छात्रों से माफी मांगें और दूसरी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर पूरे घटनाक्रम पर बयान दें। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन मांगों से बच रही है, जिसके कारण संसद का गतिरोध बना हुआ है।
खरगे ने गुरुवार को यहां अपने आवास पर पत्रकार वार्ता में कहा कि विपक्ष लगातार यह सवाल उठा रहा है कि छात्र आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज, पैलेट गन, आंसू गैस और अन्य बल प्रयोग का आदेश किसने दिया। शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे छात्रों, विशेषकर छात्राओं, के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह अस्वीकार्य है।
खरगे ने कहा कि विपक्ष की मांग केवल इतनी है कि गृहमंत्री संसद में आकर स्पष्ट करें कि लाठीचार्ज, पैलेट गन और आंसू गैस के इस्तेमाल का निर्णय किस स्तर पर लिया गया। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करती हैं, इसलिए इस कार्रवाई की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 दिनों से न तो गृहमंत्री सदन में आ रहे हैं और न ही प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर कोई वक्तव्य दे रहे हैं। इसके केवल दो अर्थ हो सकते हैं, या तो सरकार संसद को महत्व नहीं दे रही है या फिर जवाब देने से बच रही है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार चाहती थी कि छात्र अपना आंदोलन समाप्त करें तो प्रधानमंत्री या गृहमंत्री संसद में आकर अपील कर सकते थे और समाधान का भरोसा दे सकते थे, लेकिन ऐसा भी नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि गुरुवार को राज्यसभा के विपक्षी सांसदों ने सभापति से मुलाकात कर प्रधानमंत्री से माफी और गृहमंत्री के बयान की मांग रखी। सभापति ने भी संसदीय कार्य मंत्री से कहा कि सदन की भावना यही है कि गृहमंत्री आकर अपना पक्ष रखें, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने कोई पहल नहीं की।
उन्होंने कहा कि संसद चर्चा और संवाद का मंच है तथा विपक्ष हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सरकार जवाबदेही से बच रही है। खरगे ने आरोप लगाया कि जब भी वह नियम 267 के तहत महत्वपूर्ण मुद्दा उठाने का प्रयास करते हैं तो उन्हें अपनी बात पूरी नहीं रखने दी जाती।
खरगे ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री छात्रों से यह कहते कि उनके साथ जो हुआ, वह नहीं होना चाहिए था और सरकार इस पर खेद व्यक्त करती है, तो स्थिति सामान्य हो सकती थी। प्रधानमंत्री को छात्रों और उनके अभिभावकों से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि पुलिस कार्रवाई से उन्हें गहरा मानसिक कष्ट पहुंचा है।
उन्होंने कहा कि संसद का गतिरोध विपक्ष की वजह से नहीं, बल्कि सरकार की जिद के कारण बना हुआ है। सरकार यदि गृहमंत्री का बयान और प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया सदन में रख दे तो चर्चा आगे बढ़ सकती है।
एक प्रश्न के उत्तर में खरगे ने कहा कि सदन की कार्यवाही आगे कैसे चलेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार कब और किस प्रकार अपनी बात रखती है। पहले सरकार सदन में आए, बयान दे और उसके बाद आगे की रणनीति तय होगी।
झारखंड में छात्र आंदोलन से जुड़े सवाल पर खरगे ने कहा कि कांग्रेस हर राज्य में छात्रों के साथ खड़ी है। चाहे झारखंड हो, पंजाब हो या दिल्ली, यदि छात्रों के साथ अन्याय होगा तो कांग्रेस उनकी आवाज उठाती रहेगी और समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष जारी रखेगी।




