
रायपुर / दुर्ग : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भू-पे बघेल का दावा है, कि उनके स्वर्गीय पिता का नाम नन्द कुमार बघेल है, सरकारी दस्तावेजों में पूर्व मुख्यमंत्री की वल्दियत स्व.नन्द कुमार बघेल ही दर्ज है, लेकिन उनके सगे भाई हितेश बघेल की सरकारी रिकॉर्ड में वल्दियत देख कर आपकी आँखे फटी की फटी रह जाएगी। हितेश बघेल ने सरकारी अभिलेखों में अपने पिता का नाम सदाराम दर्शाया है। सरकारी रिकॉर्ड में बाप का असल नाम स्व.नन्द कुमार बघेल ना दर्शाएं जाने की वज़ह भी साफ़ बताई जा रही है।

यह भी बताया जा रहा है, कि पूर्व मुख्यमंत्री के सगे भाई हितेश बघेल और उसके साले के नाम कांग्रेस राज के पांच वर्षों के भीतर करोड़ों की ज़मीन और अन्य संपत्ति अर्जित की गई है। जानकारी के मुताबिक, सत्ता की आड़ में अवैध कमाई छिपाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने अपने पिता के नाम के साथ भी समझौता किया था। प्रदेश के विभिन्न घोटालो से अर्जित संपत्ति को ठिकानें लगाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने सगे भाई के पिता का नाम तक ही बदल दिया था। उसके पिता के नाम में बदलाव देख कर लोग हैरानी जता रहे है।

छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री का “बाप घोटाला” उजागर हुआ है, शराब, कोल खनन परिवहन और महादेव ऑनलाइन सट्टा एप्प घोटाले में इसके पूर्व बघेल का नाम सुर्ख़ियों में रहा है , लेकिन अब बाप बदलने को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री चर्चा में आ गए है। रायपुर, दुर्ग, भिलाई, बेमेतरा,राजनांदगांव, कवर्धा, धमतरी और बालोद में पूर्व मुख्यमंत्री के परिजनों के बाप-दादा सामने “रहस्यमय” ढंग से सामने आ रहे है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में “चिप्स ” ( छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी) ने NIC के जरिए जमीनों के रजिस्ट्रीकरण, लैंड रिकॉर्ड और भुइयां नक्शा का डिजिटल डाटा तैयार किया था। इसकी कमान “चिप्स ” के तत्कालीन CEO और निलंबित IAS समीर विश्नोई के हाथों में थी।

यह भी बताया जाता है, कि जाँच एजेंसियों की निग़ाह से बचने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बघेल और उसके गिरोह में शामिल दागी अधिकारियों ने अपनी सुविधानुसार जमीनों, भवनों और अन्य चल -अचल सम्पति का पंजीयन कराया था। इसमें जमीनों के क्रेता -विक्रेता की पहचान छिपाने के लिए पिता समेत अन्य परिजनों के नामों में काट-छांट और बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया था।

सूत्र तस्दीक करते है, कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने अपने भाई हितेश बघेल और उसके परिजनों साला समेत अन्य रिश्तेदारों के नाम करोड़ों की रकम ठिकाने लगाई थी। इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पिता का नाम स्व.नन्द कुमार बघेल दर्शाने के मामले में परहेज़ बरता था। हितेश बघेल के पिता की वल्दियत में सदाराम गोंड दर्ज कर अपनी दिन दुगुनी रात चौगुनी कमाई छिपाने का षड्यंत्र रचा गया था। जानकारी के मुताबिक असलियत पर पर्दा डालने के लिए पिता का नाम “सदाराम गोंड” का पूरा नाम ना लिखते हुए सिर्फ “सदाराम” दर्ज किया गया है, जबकि सदाराम गोंड की जाति आदिवासी से परहेज़ करते हुए उसे ओबीसी “कुर्मी” जाति का बताया गया है।

उधर, आदिवासी सदाराम गोंड के आश्रित और परिजन फटे हाल बताये जाते है। उनकी गरीबी और आर्थिक रूप से कमजोरी के किस्से आम है, जबकि भूपेश- हितेश समेत पूर्व मुख्यमंत्री का कुनबा करोड़ों में खेल रहा है। सवाल उठ रहा है, कि एक पिता की दो संतानों के अलग -अलग पिता कैसे हो सकते है ? यहीं नहीं अपने हितों के लिए गरीब आदिवासी की जाति पर चोट करते हुए उसे अन्य पिछड़ा वर्ग कुर्मी करार देना वैधानिक रूप से कहाँ तक उचित है ?

जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के कई इलाकों में पूर्व मुख्यमंत्री और उसके गिरोह में शामिल अधिकारियों ने इसी तर्ज पर जमीनों की ख़रीद-फ़रोख़्त कर असलियत पर पर्दा डाल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री के कृत्यों को आदिवासियों के नाम बेनामी संपत्ति ख़पाने और आदिवासी समुदाय पर अत्याचार से जोड़कर देखा जा रहा है। फ़िलहाल, राज्य सरकार मामले का स्वतः संज्ञान लेगी या फिर शिकायतकर्ताओं का इंतज़ार किया जायेगा ? यह देखना गौरतलब होगा।






