
रायपुर : छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों के शिकार और तस्करी का मामला जोरदार ढंग से गूंजा। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर वन्यजीव संरक्षण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए कई गंभीर सवाल उठाए। जवाब में वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है।डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों का शिकार होने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) की ओर से पहले ही अलर्ट जारी किया गया था, इसके बावजूद विभाग सक्रिय नहीं हुआ। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल से जुड़े जवान का नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क या राजनीतिक संरक्षण है।

नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि प्रदेश में बाघों के संरक्षण पर हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद लगातार शिकार और तस्करी की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इंद्रावती टाइगर रिजर्व में निगरानी व्यवस्था कमजोर है और कैमरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए।इस पर वन मंत्री केदार कश्यप ने स्पष्ट किया कि कैमरे बंद होने या निगरानी में लापरवाही जैसी बातें तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने बताया कि रिजर्व क्षेत्र में 126 कैमरे लगाए गए हैं और बाघों की सुरक्षा के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

मंत्री ने सदन को बताया कि मार्च 2026 में दंतेवाड़ा वनमंडल में दर्ज एक मामले में बाघ की खाल बरामद होने के बाद जांच शुरू हुई थी। वहीं 29 जून 2026 को मिली सूचना के आधार पर वन विभाग, पुलिस और एंटी-पोचिंग टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए कांकेर जिले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनके पास से दो बाघों की खाल, 13 मूंछें और एक मोटरसाइकिल बरामद की गई।पूछताछ में दोनों आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से जुड़े व्यक्तियों के रूप में हुई। इनमें बियेश्वर गेड़ाम, महाराष्ट्र पुलिस के इंटेलिजेंस सेल का सिपाही, और बाबूराव मडावी, पुलिस का गोपनीय मुखबिर शामिल हैं। दोनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। महाराष्ट्र पुलिस ने भी संबंधित सिपाही को निलंबित कर दिया है, जबकि मुखबिर को सेवा से अलग कर दिया गया है।

वन मंत्री ने बताया कि आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर नेतीवाड़ा गांव में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान शिकार में इस्तेमाल होने वाले फंदे, चाकू, 12 नाखून, 4 कैनाइन दांत और एक अन्य बाघ की खाल बरामद की गई। बरामद अवशेषों के डीएनए और वैज्ञानिक परीक्षण के लिए नमूने भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून भेजे गए हैं।उन्होंने बताया कि इस पूरे मामले में अब तक 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं कर्तव्य में लापरवाही पाए जाने पर वन विभाग के तीन अधिकारियों—परिक्षेत्र अधिकारी, उपवनक्षेत्रपाल और वनरक्षक—को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि सरकार ने बाघ संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ टाइगर फाउंडेशन सोसायटी का गठन किया है और जंगलों में शिकार रोकने के लिए नियमित एंटी-स्नेयर वॉक अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बाघों के शिकार और तस्करी से जुड़े हर मामले की गहन जांच की जा रही है तथा अपराधियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।






