
रायपुर : छत्तीसगढ़ में भले ही कोल भंडार लूटपाट के शिकार हो गए हो, लेकिन राहत भरी बात यह है,कि खेती-किसानी के मामले में किसानों की बदहाली भी तेज़ी से दूर हुई है,हालिया वर्षों में पहली बार कई इलाको के किसान तस्दीक कर रहे है,कि उनके खेत-खलियान पहली बार साल भर हरे-भरे रहे। मौसमी साग-सब्जियों के अलावा धान की बम्पर पैदावार हुई। ये किसान गूढ़ रहस्य, कि ये बाते गांव की चौपाल में नहीं बल्कि कृषि उपज मंडियों में दस्तक़ देकर, इसकी तस्दीक कर रहे है।

राज्य में इस बार बम्पर क्राप और जमकर लाभ जैसे लब्जों के साथ किसानों का रेला धान बेच रहा है। पहले के मुकाबले उनके चेहरे कुछ ज्यादा ही खिले हुए नज़र आ रहे है। ऐसे किसानों की मानें तो खेत-खलियानों में सौर ऊर्जा के छोटे बड़े प्लांट उनके लिए चौबीसों घंटे बिजली उपलब्ध कराने वाले पावर प्लांट बन गए है। ना बिजली का बिल भरने की झंझट और ना ही मानसून और बारिश की राह तकने की नौबत इस वर्ष आई। उनके लिए सौर सुजला योजना वरदान बन कर उभरी है। समय पर भरपूर पानी मुहैया होने से फसल भी अच्छी हुई, अब बम्पर क्राप से परिवार के बैंक खातों में भी धन की वर्षा हो रही है।

ये किसान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को किसानों की तक़दीर बदलने वाला मुख्यमंत्री बता रहे है। उनकी जुबान अब खेतिहर समस्या का ब्यौरा पेश करने में नहीं बल्कि बाजार के उतार-चढ़ाव को लेकर कैंची की तर्ज पर तेज़ी से चल रही है। उनके मुताबिक साल भर पहले लगाया गया सोलर सिंचाई पंप पानी के साथ -साथ खेतों की पैदावार और उनका भाग्य भी बदल रहा है।

जानकारी के मुताबिक क्रेडा (छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण) द्वारा किसानों को रियायती दरों पर सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराकर सशक्त बनाया जा रहा है। इसके चलते कई किसान बिजली बिल और डीजल की निर्भरता से मुक्त होकर खेती -किसानी पर जोर दे रहे है। उनकी मेहनत रंग ला रही है,सिंचाई एवं कृषि उत्पादन में उछाल देखा जा रहा है। किसानों के मुताबिक, इस योजना के तहत 3 HP और 5 HP क्षमता के पंप स्थापित होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में तेज़ी आई है, किसानों की आमदनी में बढ़ौतरी दर्ज की जा रही है।

राज्य में किसानों को सस्ते सोलर पंप मुहैया करा कर सिंचाई की समस्या दूर करने में सरकार को काफी मदद मिली है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में कृषि और किसानों को समृद्ध बनाने के लिए जारी प्रयासों की तस्दीक आम किसान करने हैं। इससे लाभान्वित होने के बाद उनके द्वारा तस्दीक की जा रही है, कि खेती-किसानी अब लाभ का धंधा बनने की ओर अग्रसर हो गया है।

उनकी मानें तो राज्य सरकार हर संभव मदद और कृषि में आर्थिक सहायता कर रही है, इससे उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि हो आई है। पहले के मुकाबले उनका जीवन स्तर ऊंचा उठा है। छत्तीसगढ़ में धान खरीदी जोरो पर है, किसानों ने इस बार मंडी का रूख कर साफ़ कर दिया है, कि उनके कदम अब नई राह तय करेंगे। ज़ेब में पैसा और खेत में पॉवर प्लांट लग जाने से कृषि उपज मंडियों में आम किसानों की बाढ़ आई हुई है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के लिए 15 नवंबर 2025 से शुरू होकर 31 जनवरी 2026 तक चलने वाले धान खरीदी अभियान में छोटे और मध्यम किसानों की तादाद रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि दर्ज कर रही है।

छत्तीसगढ़ कैडर के 2008 बैच के IAS राजेश सिंह राणा तस्दीक करते है, कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि प्रधान है, इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार कृषि को समृद्ध और सुदृढ़ता प्रदान करने में जुटी है। उनके मुताबिक राज्य में वर्तमान समय में सिंचाई क्षमता लगभग 39 प्रतिशत है, इसके चलते यहां किसान वर्षा आधारित एक फसली खेती करते है। जबकि, कृषि के क्षेत्र में समृद्धि के लिए द्विफसली एवं त्रिफसली खेती जरूरी मानी जाती है। इसको ध्यान में रखकर छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसे इलाकों में जहां नहरों के माध्यम से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वहां सौर सुजला योजना एवं किसान समृद्धि योजना अथवा सामान्य नलकूप योजना के माध्यम से किसानों को लाभान्वित किया है।

CREDA के CEO के मुताबिक,सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए खेतों में नलकूप की स्थापना के लिए अनुदान सहायता देने से अच्छे परिणाम सामने आ रहे है। उनके मुताबिक छत्तीसगढ़ राज्य में सौर सुजला योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस योजना के तहत ऐसे इलाके जहां परम्परागत बिजली सुविधा नहीं है, वहां सौर सुजला के नलकूप से किसानों को सिंचाई के लिए सहजता से पानी मिल जाता है।

राणा बताते है, कि सौर सुजला योजना ने किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने में बहुत मददगार साबित हो रही है,पम्पों में ऑटोमेशन तकनीक के उपयोग ने इसको और उपयोगी बना दिया है। उनके मुताबिक सिंचाई के लिए पम्प को चालू और बंद करने के लिए किसानों को अब खेत में जाकर पम्प चालू करने की जरूरत नहीं रही है।

किसान अपने घर में ही या किसी दूसरे शहर में वह अपने मोबाईल के माध्यम से सौर सुजला के सिंचाई को आवश्यकता के अनुरूप चालू और बंद करके अपने खेत में सिंचाई का प्रबंधन कर रहे है। फ़िलहाल, सौर सुजला योजना ने किसानों की आर्थिक समस्याओं को कुछ हद तक दूर कर दिया है। राज्य में खेतों में ही सूर्यदेवता के अवतरण के रूप में इस योजना का आगाज़ प्रदेश को नई दिशा देगा।







