
अयोध्या में राम मंदिर के दानपात्र से जुड़े कथित अनियमितता और गबन मामले में जांच तेज हो गई है। एसआईटी (विशेष जांच दल) की प्रारंभिक जांच के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार जिन लोगों के नाम सामने आए हैं उनमें चंपत राय के करीबी बताए जा रहे टिन्नू यादव, लवकुश और अनुकल्प भी शामिल हैं। जांच के दौरान इनसे जुड़े स्थानों पर नकदी मिलने की भी चर्चा है।

बताया जा रहा है कि एसआईटी ने पहले चरण में संदिग्धों से करीब 20 घंटे तक पूछताछ की। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार पूछताछ में कई सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाए, जिससे संदेह और गहरा गया है। हालांकि अंतिम फैसला एसआईटी रिपोर्ट और शासन स्तर पर समीक्षा के बाद लिया जाएगा।इसी बीच मंदिर निर्माण व्यवस्था से जुड़े सहायक गोपाल राव के कर्नाटक जाने को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक वे एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जहां संघ के सर कार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले भी मौजूद थे। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें सामने आने के बाद सवाल उठने लगे क्योंकि जांच के दौरान कुछ लोगों के अयोध्या से बाहर न जाने की चर्चा भी रही थी।

सूत्रों के मुताबिक वर्ष 2022 से मंदिर निर्माण व्यवस्था में सक्रिय भूमिका निभा रहे गोपाल राव को जिम्मेदारियों से हटाया जा सकता है। हालांकि वे ट्रस्ट के औपचारिक पदाधिकारी नहीं हैं, लेकिन व्यवस्थाओं में उनकी सक्रिय भूमिका बताई जाती रही है। वहीं बढ़ते विवाद के बीच ट्रस्ट के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

एसआईटी अपनी प्रारंभिक जांच पूरी कर चुकी है और लगभग 140 पन्नों की रिपोर्ट तैयार होने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट में वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेज और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का विस्तृत उल्लेख बताया जा रहा है।सूत्रों के अनुसार सरकार को जल्द प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी जा सकती है। जांच का दायरा बढ़ने के कारण एसआईटी जांच अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव भी दे सकती है। प्रदेश सरकार ने शुरुआती जांच के लिए 15 दिन का समय निर्धारित किया था, लेकिन सामने आ रहे नए तथ्यों के चलते आगे जांच जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।राम मंदिर देश की आस्था से जुड़ा विषय होने के कारण सरकार पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे जवाबदेही तय करने के साथ वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नए कदम उठाए जा सकते हैं।







