
वैश्विक चुनौतियों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय रेलवे ने मई 2026 में 14.5 करोड़ टन माल ढुलाई कर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। यह मई 2025 की तुलना में 1.3 प्रतिशत अधिक है। रेलवे के अनुसार इस वृद्धि में लौह अयस्क, इस्पात, उर्वरक और अन्य वस्तुओं की ढुलाई का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक “अन्य वस्तु” श्रेणी में माल ढुलाई 16 प्रतिशत बढ़ी, जबकि लौह अयस्क की ढुलाई में 4.8 प्रतिशत और पिग आयरन एवं तैयार इस्पात की ढुलाई में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। उर्वरकों की ढुलाई भी 6.2 प्रतिशत बढ़ी, जिससे कृषि क्षेत्र को आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिली।
देश में ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए रेलवे ने कोयले की ढुलाई को प्राथमिकता दी। कोयला, जो रेलवे की कुल माल ढुलाई का सबसे बड़ा हिस्सा है, उसकी ढुलाई में भी लगभग 1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
यात्री परिवहन के मोर्चे पर भी भारतीय रेलवे का प्रदर्शन मजबूत रहा। मई 2026 में रेलवे ने 61 करोड़ से अधिक यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या लगभग 59 करोड़ थी। गैर-उपनगरीय श्रेणी में यात्रियों की संख्या 28 करोड़ से बढ़कर 30 करोड़ हो गई, जो 7.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
गर्मी की छुट्टियों के दौरान बढ़ी यात्रा मांग को देखते हुए रेलवे ने विभिन्न मार्गों पर बड़ी संख्या में समर स्पेशल ट्रेनें संचालित कीं। इसके साथ ही आधुनिक रेल सेवाओं का विस्तार भी जारी है। वर्तमान में देशभर में 164 वंदे भारत ट्रेनें संचालित हो रही हैं, जिनमें हाल ही में शुरू की गई हावड़ा-कामाख्या स्लीपर वंदे भारत सेवा भी शामिल है। वहीं अमृत भारत ट्रेनों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है और मई के दौरान तीन नई सेवाओं का शुभारंभ किया गया।
रेल मंत्रालय का कहना है कि माल ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों क्षेत्रों में लगातार वृद्धि भारतीय रेलवे की क्षमता और देश की अर्थव्यवस्था में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है





