
भोपाल :बहुचर्चित त्विषा शर्मा दहेज मौत मामले में आज गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया है| केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सेवानिवृत्त जिला जज गिरिबाला सिंह को भोपाल स्थित उनके घर से हिरासत में लिया है। इससे पूर्व 3 घंटे से ज्यादा चली सीबीआई की पूछताछ में गिरिबाला सिंह के बयान और कई दलीले जाँच अधिकारियों के गले नहीं उतरी | अंदेशा जाहिर किया जा रहा है,कि अब आरोपी माँ-बेटे को आमने-सामने बैठा कर CBI पूछताछ कर सकती है | यह भी बताया जाता है,कि आज प्रारंभिक पूछताछ में पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने CBI को कई महत्त्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दिए थे |

चर्चा यह भी है,कि त्विषा के पति समर्थ सिंह और उसकी माँ गिरिबाला सिंह के बयानों में काफी विरोधाभास सामने आने के बाद CBI ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया | जानकारी के मुताबिक,आज सुबह सीबीआई की टीम भारी पुलिस बल के साथ कटारा हिल्स स्थितगिरिबाला के निवास पर पहुंची थी। इस दौरान पूरे इलाके में बैरिकेडिंग कर आम लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई थी। एक जानकारी के मुताबिक,बीती रात्रि अर्थात एक दिन पहले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी गई थी |

बता दे,कि त्विषा शर्मा की 12 मई को भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनकी शादी पूर्व जज गिरिबाला सिंह के पेशे से वकील बेटे समर्थ सिंह से 9 दिसंबर 2025 को हुई थी। यह भी तथ्य सामने आया,कि अपनी बहु त्विषा की आत्महत्या की घटना के दो दिन बाद ही गिरिबाला सिंह ने भोपाल जिला अदालत से याचिका दायर कर अग्रिम जमानत प्राप्त की थी। अदालत में 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 15 मई को उनकी उम्र और मृतका को किए गए पैसों के ट्रांसफर का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत स्वीकृत की थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने बुधवार को 17 पन्नों के आदेश में इस जमानत को निरस्त कर दिया था। न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने अपने फैसले में कहा, कि निचली अदालत ने महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया था। हाई कोर्ट ने माना कि व्हाट्सएप चैट और मृतका के परिजनों के बयानों से आरोप केवल पति समर्थ सिंह तक सीमित नहीं हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि दहेज प्रताड़ना और क्रूरता के आरोपों की गहन जांच आवश्यक है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि त्विषा के शरीर पर फांसी के अलावा छह से सात अन्य चोटों के निशान मिले थे, जिनमें हाथ, उंगली और सिर की चोटें शामिल थीं। बाद की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि ये चोटें शव उतारने या अस्पताल ले जाने के दौरान नहीं लगी थीं।




