सीबीआई से बचाव में जुटे महादेव ऐप घोटाले के संदेही, आईपीएस अधिकारियों ने लगाई दौड़, डॉक्टर रमन सिंह के बंगले से ना उम्मीद लौटे आईएएस-आईपीएस दंपति, मिलने से इंकार, बड़ी कार्यवाही की ओर सीबीआई….

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दिल्ली/रायपुर: महादेव ऐप घोटाले में पुलिस तंत्र के इस्तेमाल को लेकर सीबीआई ने कई आईपीएस और छत्तीसगढ़ पुलिस सर्विस के अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। खाकी वर्दीधारी दागी अधिकारियों से पूछताछ जारी है। इस बीच घोटाले में लिप्त आईपीएस अधिकारियों ने सीबीआई से बचने के लिए हाथ-पैर मारना भी शुरू कर दिया है। रायपुर से लेकर दिल्ली तक उन प्रभावशील अधिकारियों और नेताओं के ठिकानों तक दागी अफसरों की दौड़ शुरू हो गई है, जिनकी केंद्र सरकार और सीबीआई में पकड़ मजबूत मानी जाती है।

सीबीआई में पदस्थ कई रिटायर अधिकारियों से मार्गदर्शन-मेल मुलाकत के साथ-साथ क़ानूनी दांव पेचों को लेकर तमाम अफसर सक्रिय बताये जाते है। यह भी बताया जा रहा है कि महादेव ऐप घोटले में पुलिस अधिकारियों के एक गिरोह के खिलाफ एजेंसियों को पुख्ता सबूत मिले है। उनसे पूछताछ का दौर शुरू हो गया है, अंदेशा है कि जल्द उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है, सीबीआई के विशेष जज की ज्वाइनिंग का इंतजार किया जा रहा है, जज साहब के कुर्सी पर बैठने के साथ ही छत्तीसगढ़ कैडर के कई आईपीएस अधिकारियों के भी नपने के आसार जाहिर किये जा रहे है।

दागी अफसरों को भी अपनी गिरफ्तारी का भय सता रहा है, लिहाजा वे बचाव के लिए अब नए-नए ठिकानों का रुख कर रहे है। सूत्रों के मुताबिक बीती रात 2005 बैच के आईपीएस शेख आरिफ अपनी इसी बैच की आईएएस पत्नी शम्मी आबिदी के साथ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के बंगले में इंतजार करते नजर आये। लेकिन सांसद बृजमोहन अग्रवाल की तर्ज पर डॉ. रमन सिंह ने भी इस दंपति से दूरियां बना ली। खबर है कि डॉ. रमन सिंह ने इस दंपति से मिलने से इंकार कर दिया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विधानसभा अध्यक्ष के बंगले पर सफ़ेद कार में सवार शेख आरिफ दम्पति को देखकर कर्मियों ने हैरानी जताई है, बीती रात शेख आरिफ अपनी अपनी के साथ विधानसभा अध्यक्ष के शंकर नगर आवास पर नजर आ रहे थे। नजारा देखते ही, यह खबर जंगल में आग की तरह फ़ैल गई। महादेव ऐप घोटाला कवर कर रहे रायपुर से लेकर दिल्ली तक के कई पत्रकारों के फ़ोन घटनाक्रम को लेकर देर रात तक घन-घनाते रहे। कई पत्रकारों ने तंज भरे अंदाज में घटनाक्रम को जाहिर भी किया।

इस बीच यह भी खबर सामने आई कि डॉ. रमन सिंह के बंगले से इस दंपति को बैरंग लौटा दिया गया था। सूत्र तस्दीक करते है कि विधानसभा अध्यक्ष के बंगले पर ड्यूटी पर तैनात कई पुलिस कर्मी उस समय हैरत में पड़ गए, जब उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को निगाह बचाते एक कमरे की ओर बढ़ते देखा। बताते है कि आनन-फानन में बंगले में दाखिल हुए इस दंपति के कदम विधानसभा अध्यक्ष के बंगले स्थित दफ्तर की ओर बढ़ ही रहे थे कि ड्यूटी पर तैनात संतरी ने उन्हें रोक दिया।

इस दंपति के हाजिर होने की सूचना भीतर दी गई। चंद मिनटों बाद भीतर से आये एक सन्देश से शेख आरिफ के पैरों तले जमीन खिसकती दिखाई दी। ‘साहब व्यस्त’ है ? बताया गया। सूत्र यह भी तस्दीक करते है कि इसके पूर्व सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी शेख आरिफ दंपति से मिलने से इनकार कर दिया था। पहले रायपुर और फिर दिल्ली में इस दंपति ने सासंद अग्रवाल से मिलने के लिए हाथ-पांव मारे थे। लेकिन सीबीआई के लपेटे में आने के बाद सांसद अग्रवाल भी इस दंपति से किनारा करते नजर आये थे।

बताते है कि संसद सत्र में व्यस्तता का हवाला देते हुए सांसद के स्टाफ ने शेख आरिफ को चलता कर दिया था। सूत्र यह भी तस्दीक करते है कि ED और सीबीआई के चर्चित संदेही प्रदेश के कई बड़े नेताओं के दरबार में उपस्थित होने के लिए दिन रात एक किये हुए है। लेकिन उन्हें नाकामयाबी ही हाथ लग रही है। 15 हज़ार करोड़ के महादेव ऐप घोटाले में छत्तीसगढ़ कैडर के 4 आईपीएस अधिकारियों की लिप्तता सामने आई है। इनमे अव्वल नाम रायपुर रेंज के तत्कालीन आईजी शेख आरिफ का बताया जाता है।

उनके भी ठिकानों पर सीबीआई ने छापेमारी की थी। शेख आरिफ दंपति की नामी-बेनामी संपत्ति करोड़ों में बताई जाती है। इनमे लखनऊ, पुणे, मुंबई के अलावा अन्य राज्यों में होटल, रियल एस्टेट, कृषि और मछली पालन जैसे उद्योग-धंधों में करीबी नाते-रिश्तेदारों के नाम पर मोटा निवेश बताया जाता है। 2018 में पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार के सत्ता से बाहर होते ही शेख आरिफ दंपति ने पहले तत्कालीन वन मंत्री मोहम्मद अकबर और फिर मुख्यमंत्री भूपे बघेल का दामन थाम लिया था। ऊंची राजनैतिक पहुँच के चलते इस दंपति ने अपने कार्यकाल में कई आपराधिक वारदातों को अंजाम दिया था।

महिला एवं बाल विकास, हाउसिंग बोर्ड, आदिवासी कल्याण विभाग की कई योजनाओं पर इस दंपति ने डाका डाला था। इन विभागों में मोटे कमीशन और भ्रष्टाचार को लेकर शम्मी आबिदी की कई शिकायतें तत्कालीन मुख्यमंत्री बघेल के कार्यकाल में रद्दी की टोकरी में डाल दी गई थी। यही हाल शेख आरिफ की आपराधिक शैली वाली कार्यप्रणाली से सामने आया था। ACB-EOW में तैनाती के दौरान शेख आरिफ ने मोटी रकम लेकर भ्रष्टाचार से जुड़े दर्जनों पंजीबद्ध मामलों का खात्मा कर दिया था। इससे उन सरकारी आला अफसरों को फायदा पहुंचा, जिनके प्रकरण अदालत में पंजीबद्ध थे। उन पर कानून की मार पड़ती नजर आ रही थी। फ़िलहाल, दागी आईपीएस अधिकारियों की जोड़-तोड़ जोरो पर जारी बताई जाती है।