आतंकवाद की कमर तोड़ने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस एक बार फिर एक्शन मोड में है। पुलिस ने तीन वर्ष पहले अपनाई रणनीति को दोबारा अमल में लाते हुए आतंकियों को मिलने वाली मदद का नेटवर्क ध्वस्त करने के लिए अभियान शुरू किया है। 150 से ज्यादा आतंकी मददगारों की पहचान की है। जम्मू संभाग में पांच दिन में 200 ठिकाने खंगाले गए हैं। आतंकी मददगारों की संपत्तियों को जब्त किया है।
वर्ष 2021 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पुराने अफसरों के साथ मिलकर कश्मीर में एक अभियान चलाया था। इसमें बड़े स्तर पर कश्मीर में आतंकियों के नेटवर्क को ध्वस्त किया। आतंकियों को मिलने वाला पैसा, हथियार, गोला बारूद, रहने के लिए बनाए जाने वाले ठिकाने और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराने वालों पर कार्रवाई की।
नतीजा यह हुआ कि आतंकवाद काफी हद तक काबू में आ गया, लेकिन आतंंकी संगठनों ने यही काम जम्मू संभाग में शुरू कर दिया। जम्मू संभाग में मददगारों का नेटवर्क खड़ा कर लिया। इसे ध्वस्त करने के लिए पुलिस अब जम्मू संभाग में कश्मीर की तर्ज पर कार्रवाई कर रही है। इसमें आतंकियों को रसद, गोला बारूद, हथियार पहुंचाने वालों की पहचान कर धरपकड़ के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
2024 में पुंछ, कठुआ, डोडा, किश्तवाड़ में हुए हमलों में शामिल आतंकी अब भी पहेली बने हुए हैं। इनकी धरपकड़ के लिए पुलिस और सेना ने मिलकर रणनीति बनाई है। इस रणनीति के तहत आतंकियों को अपने ठिकानों से बाहर आने के लिए मजबूर किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, अगले तीन महीनों में इन आतंकियाें को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, ताकि ये किसी और वारदात को अंजाम न दे सकें। यह भी बताया जा रहा है कि सुरक्षाबल अब अपना और नुकसान नहीं चाहते, इसलिए दहशतगर्दों के खिलाफ ऑपरेशन बड़े ही संयोजन और धैर्य से चलाए जाएंगे।
बता दें कि जम्मू के राजोरी, पुंछ, किश्तवाड़, डोडा, कठुआ, रियासी, सांबा में पुलिस की तरफ से आतंकियों और इनके सहयोगियों की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। इनके ठिकानों को खंगाला गया है। एडीजीपी जम्मू आनंद जैन का कहना है कि एक विशेष रणनीति के तहत कार्रवाई की गई है। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।