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भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) ने देशभर में दवाओं की सुरक्षा को मजबूत करने और दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बिहार, महाराष्ट्र और मिजोरम की राज्य फार्मेसी परिषदों के साथ तीन समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन स्वायत्त संस्था आईपीसी के गाजियाबाद स्थित मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में इन समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।फार्माकोविजिलेंस और रोगी सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावाइन समझौता ज्ञापनों का उद्देश्य आईपीसी और राज्य फार्मेसी परिषदों के बीच सहयोग को मजबूत कर संबंधित राज्यों में दवाओं के तर्कसंगत उपयोग, फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों और रोगी सुरक्षा से जुड़ी पहलों को बढ़ावा देना है। समझौतों के तहत पंजीकृत फार्मासिस्टों के बीच भारत की राष्ट्रीय दवा सूची (एनएफआई) के व्यापक उपयोग और प्रसार को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि दवाओं का सुरक्षित, प्रभावी और साक्ष्य-आधारित इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके। साथ ही, अस्पतालों की फार्मेसियों में एनएफआई को अनिवार्य संदर्भ दस्तावेज के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।एडीआर रिपोर्टिंग और निगरानी केंद्रों की स्थापना पर जोरयह सहयोग भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपीआई) को और मजबूत करने में मदद करेगा। इसके तहत प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया (एडीआर) रिपोर्टिंग तंत्र को बढ़ावा दिया जाएगा और पीवीपीआई के समन्वय से एडीआर निगरानी केंद्रों (एएमसी) की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे दवा सुरक्षा निगरानी प्रणाली मजबूत होगी और फार्मासिस्टों तथा स्वास्थ्य पेशेवरों की फार्माकोविजिलेंस गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी बढ़ेगी।प्रशिक्षण और अनुसंधान गतिविधियों को भी मिलेगा बढ़ावाआईपीसी और राज्य फार्मेसी परिषदें संयुक्त रूप से फार्मासिस्टों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सतत शिक्षा पहल आयोजित करेंगी। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दवाओं के तर्कसंगत उपयोग, फार्माकोविजिलेंस और फार्माकोपियल मानकों में पेशेवर दक्षता बढ़ाना है। यह साझेदारी दवा सुरक्षा, नियामक मानकों और तर्कसंगत फार्माकोथेरेपी के क्षेत्रों में अनुसंधान और पेशेवर सहयोग को भी बढ़ावा देगी।जागरूकता कार्यक्रमों पर रहेगा विशेष फोकससमझौता ज्ञापनों के तहत औषधि सुरक्षा, औषध संहिता मानकों और रोगी सुरक्षा के प्रति जन और पेशेवर जागरूकता बढ़ाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आईपीसी तकनीकी मार्गदर्शन, वैज्ञानिक सहायता और विशेषज्ञता उपलब्ध कराएगा, जबकि राज्य फार्मेसी परिषदें फार्मासिस्टों, अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहयोग करेंगी।वरिष्ठ विशेषज्ञ भी रहे मौजूदकार्यक्रम में आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन, बिहार राज्य फार्मेसी परिषद के अध्यक्ष डॉ. प्रकाश सिन्हा, मिजोरम राज्य फार्मेसी परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. एच. लालहलेनमाविया और महाराष्ट्र राज्य फार्मेसी परिषद के अध्यक्ष अतुल अहिरे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।इसके अलावा नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी.के. पॉल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह और एम्स कल्याणी के अध्यक्ष प्रो. वाई.के. गुप्ता भी कार्यक्रम में मौजूद थे।




