
दुनियाभर में बढ़ता वायु प्रदूषण अब केवल फेफड़ों की बीमारी तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। एक नई शोध में सामने आया है कि प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण दिमाग पर भी गंभीर असर डाल सकते हैं और अल्जाइमर जैसी याददाश्त से जुड़ी बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं।
अमेरिका में बुजुर्गों पर लंबा अध्ययन
अमेरिका में करीब 2.78 करोड़ बुजुर्गों पर किए गए एक बड़े अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला है। यह शोध Emory University की रिसर्च टीम ने किया। अध्ययन में वर्ष 2000 से 2018 के बीच 65 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को शामिल किया गया था। शोध के अनुसार, हवा में मौजूद बेहद छोटे प्रदूषित कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर खून तक पहुंच सकते हैं और वहां से दिमाग पर असर डालते हैं। ये कण ब्रेन फंक्शन को प्रभावित करते हैं, जिससे याददाश्त कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। खासतौर पर बुजुर्गों में इसका असर ज्यादा देखा गया।
अल्जाइमर क्या है?
अल्जाइमर एक ऐसी दिमागी बीमारी है, जिसमें व्यक्ति की स्मरण शक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है। स्थिति गंभीर होने पर व्यक्ति रोजमर्रा के सामान्य काम भी ठीक से नहीं कर पाता। यह बीमारी आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ ज्यादा देखी जाती है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा?
अध्ययन में यह भी पाया गया कि जिन लोगों को पहले स्ट्रोक हो चुका है, उनमें प्रदूषण के कारण अल्जाइमर का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। हालांकि प्रदूषण से हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी जुड़ी हैं, लेकिन इनका जोखिम 2 से 3 प्रतिशत तक ही पाया गया। तुलना में अल्जाइमर का खतरा अधिक गंभीर माना गया।
दिमाग पर कैसे असर डालते हैं कण?
रिपोर्ट के मुताबिक, हवा में मौजूद सूक्ष्म कण दिमाग में सूजन पैदा कर सकते हैं। इससे न्यूरॉन्स (दिमाग की कोशिकाएं) के बीच संचार कमजोर पड़ने लगता है। साथ ही दिमाग में टाउ प्रोटीन का जमाव बढ़ सकता है, जो याददाश्त से जुड़े हिस्सों को नुकसान पहुंचाता है। यही प्रक्रिया धीरे-धीरे अल्जाइमर जैसी बीमारी को जन्म दे सकती है।
सावधानी बरतना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में वायु प्रदूषण का स्तर ज्यादा है, वहां रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। प्रदूषण पहले से ही फेफड़ों के कैंसर और अस्थमा जैसी बीमारियों का कारण बन रहा है। अब यह स्पष्ट हो रहा है कि इसका असर दिमाग पर भी पड़ सकता है। ऐसे में साफ हवा, मास्क का उपयोग, नियमित स्वास्थ्य जांच और प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाना बेहद जरूरी है, खासकर बुजुर्गों के लिए।




