गेंदलाल शुक्ला
कोरबा। नगरीय निकाय चुनाव के लिए परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगर निगम कोरबा के महापौर पद को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं में सरगर्मी बढ़ गयी है । कांग्रेस पार्टी में छत्तीसगढ़िया बनाम परदेशिया प्रत्याशी को लेकर पारा गर्माने लगा है । इस अंतर्द्वंद के चलते कांग्रेस में महापौर पद के प्रत्याशी को लेकर घमासान के आसार अभी से नजर आने लगे हैं ।
बीते 18 सितंबर को प्रदेश की राजधानी रायपुर में नगरीय निकायों के अध्यक्षों और महापौर के पदों की आरक्षण प्रक्रिया पूरी की गई । नगर पालिक निगम कोरबा का महापौर का पद इस बार अपेक्षा के अनुसार ही ओ बी सी के लिए आरक्षित घोषित किया गया है । आरक्षण के दिन से ही नगर निगम कोरबा के महापौर पद के लिए कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में प्रत्याशी की तलाश के साथ ही टिकट चाहने वालों में हलचल तेज हो गई है । एक और जहां भारतीय जनता पार्टी में जिताऊ प्रत्याशी को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस में छत्तीसगढ़िया बनाम परदेसिया प्रत्याशी की सरगर्म चर्चा शुरू हो गई है । कांग्रेस पार्टी में जहां छत्तीसगढ़ी मूल के ओबीसी नेता और कार्यकर्ता पार्टी टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं वही दूसरी ओर गैर छत्तीसगढ़िया ओबीसी वर्ग के पार्टी नेता भी टिकट की दौड़ में कुलाचे भर रहे हैं । मजे की बात यह है कि टिकट के दावे करने वाले कांग्रेस के सभी नेता किसी न किसी मजबूत खंभे से अपना रिश्ता रखते हैं । ऐसे में किसी एक नाम पर टिकट बांटने वाले पार्टी के नेताओं के बीच आम सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण होगा वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़िया बनाम परदेसिया के भाव को दूर करना भी कम कठिन नहीं होगा। कांग्रेस पार्टी में यह सुगबुगाहट भी सुनने में आ रही है कि छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़िया के ध्वज वाहक प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत की अग्नि परीक्षा नगर निगम कोरबा के महापौर की टिकट तय करने से हो जाएगी ।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि पार्टी परदेसिया उम्मीदवार को मैदान में उतारती है तो उसे छत्तीसगढ़िया कार्यकर्ताओं के अंदरूनी विरोध से दो चार होना पड़ सकता है । इसी तरह दूसरी ओर परदेसिया दावेदारों को टिकट नहीं देने पर उनके सामूहिक विरोध का नुकसान भी कांग्रेस को पहुंच सकता है। ऐसे में कांग्रेस के महापौर पद के प्रत्याशी का चयन पार्टी नेताओं के गले की हड्डी भी साबित हो सकता है। बहरहाल आने वाले दिनों में कांग्रेस का टिकट वितरण रोचक नजारा पेश करेगा, ऐसा राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है ।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी में भी महापौर की टिकट को लेकर भारी घमासान के आसार नजर आने लगे हैं । पार्टी के वरिष्ठ नेता अपने आग्रह दुराग्रह के अनुसार प्रत्याशी तय करने की कवायद में जुट गए हैं। पहली पंक्ति के भाजपा नेताओं का मतभेद किसी से छिपा नहीं है। पार्टी के प्रांतीय नेता भी इस तथ्य से अच्छी तरह वाकिफ हैं। पिछले तीन विधानसभा चुनाव में यह नजारा दरपेश आ चुका है कि घर को आग लग गई घर के चिराग से । बावजूद इसके भाजपा के नेता हैं कि मानते ही नहीं । महापौर प्रत्याशी के चयन और नगर निगम के चुनाव में भी पार्टी के पहली पंक्ति के नेता पिछली विफलताओं से कोई सबक लेंगे ऐसा प्रतीत नहीं हो रहा है । कुल मिलाकर नगर निगम कोरबा के महापौर से लेकर पार्षद पद तक की टिकटों के बंटवारे में प्रांतीय नेताओं को निर्णायक भूमिका अदा करना होगा, ऐसा माना जा रहा है। पार्टी के ही कार्यकर्ताओं का कहना है कि भाजपा का प्रदेश नेतृत्व यदि दृढ़ता और कठोरता के साथ निर्णय लेने में और स्थानीय नेताओं की मुश्कें कसने में विफल रहता है तो नगर निगम कोरबा की सत्ता उसके हाथों से दोबारा फिसल सकती है । भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में एक उज्जवल संभावना यह है कि महापौर की टिकट की दौड़ में अभी तक जो भी नाम चर्चा में आए हैं वे सब के सब छत्तीसगढ़िया ही हैं।