अंतागढ़ टेपकांड मामले कथित आरोपी मंतूराम पवार और डॉ पुनीत गुप्ता के अग्रिम याचिका को जिला सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया है । कोर्ट ने दलील दी है कि टेपकांड मामले में जांच बहुत प्रारंभिक दौर पर है इसलिए अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती । अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार वर्मा की कोर्ट में ये सुनवाई हुई। अतिरिक्त महाधिवक्ता सतीश चंद्र वर्मा ने सरकार का पक्ष कोर्ट में रखा । डॉ पुनीत गुप्ता और मंतुराम पवार की ओर से पूर्व उप महाधिवक्ता अनिल पिल्लई, हितेंद्र तिवारी प्रशांत बाजपेयी और कमलेश पांडेय ने रखा पक्ष था । वकील हितेंद्र तिवारी ने इस पूरे मामले को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने की कही है |
गौरतलब है कि तागढ़ टेपकांड मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद डॉ. गुप्ता की ओर से अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की गई थी । सोमवार को जिला सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका लगाई गई थी । मंतूराम पवार ने भी अग्रीम जमानत के लिए याचिका लगाई थी । उनके खिलाफ अंतागढ़ मामले में पंडरी थाने में 420 और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया था ।
राज्य सरकार ने प्रकरण को अत्यंत गंभीर बताते हुए अदालत में याचिका पर आपत्ति करते हुए यह तथ्य भी दिया है कि, डॉ पुनीत गुप्ता एफआईआर दर्ज होने के बाद नौकरी छोड चुके हैं, जबकि यह अंतागढ प्रकरण हुआ था वे विदेश में थे और उन्होने तब भुमिका निभाई । जबकि मंतुराम पवार को लेकर राज्य सरकार ने यह आपत्ति की है कि, पूरे प्रकरण में मंतूराम सबसे अहम किरदार रहे हैं ।
यह है पुरा मामला
साल 2014 में अंतागढ़ के तत्कालीन विधायक विक्रम उसेंडी ने लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद इस्तीफा दिया था । अंतागढ़ मे हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने पूर्व विधायक मंतू राम पवार को प्रत्याशी बनाया था । भाजपा से भोजराम नाग खड़े हुए थे । नाम वापसी के अंतिम दिन मंतूराम ने पार्टी बिना बताये अचानक अपना नाम वापिस ले लिया । इसके बाद सिद्दीकी नाम से एक व्यक्ति का फोन कॉल वायरल हुआ था । आरोप लगे थे कि तब कांग्रेस में रहे पूर्व सीएम अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी ने मंतू की नाम वापसी कराई। टेपकांड में कथित रूप से अमित जोगी और तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता के बीच हुई बातचीत बताई गई थी ।